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शिवनाथ नदी के बीचों-बीच पर्यटन की अनूठी जगह मदकू द्वीप दो धर्म और आस्था का संगम स्थल

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परम प्रेम की परिणिति काम-क्रीडा को परिलक्षित करती छत्तीसगढ का खजुराहो भोरमदेव मंदिर।

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शिवरीनारायण का मंदिर माता शबरी का आश्रम छत्तीसगढ़-इतिहास के पन्नो में

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प्रेम का लाल प्रतीक लक्ष्मण मंदिर...........

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ताला की विलक्षण प्रतिमा-देवरानी जेठानी मंदिर

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वक्त का पहिया-अंग्रेजो ने जिस ईस्ट इंडिया कंपनी के नाम पर भारत पर 200 साल राज किया वह कंपनी आज भारतीय का गुलाम है

जय हिन्द दोस्तों ,

                          कल इतिहास की कुछ कहानिया पढ़ते ईस्ट इंडिया कंपनी के बारे मे पढ़ा, तभी दिमाग मे आया की जिस कंपनी ने कभी व्यापार के नाम पर भारत को गुलाम बना लिया था  आज उस कंपनी की स्थिति क्या है ???

                   पुस्तको मे पढने पर जानकारी थी की 
ब्रिटिश ईस्ट इंडिया कंपनी की स्थापना 31 दिसम्बर 1600 ईस्वी में हुई थी। इसे यदाकदा जॉन कंपनी के नाम से भी जाना जाता था। इसे ब्रिटेन की महारानी ने भारत के साथ व्यापार करने के लिये 21 सालो तक की छूट दे दी। बाद में कम्पनी ने भारत के लगभग सभी क्षेत्रों पर अपना सैनिक तथा प्रशासनिक अधिपत्य जमा लिया। 
........................विकिपीडिया

 100 साल ईस्ट इंडिया कंपनी के राज करने के बाद देश मे ईस्ट इंडिया कंपनी के स्थान पर भारत पर ब्रिटिश शाशन लागु हो गया था लेकिन वो कम्पनी ख़त्म नहीं हुई थी , तो मुझे लगा की इसके बारे मे ज्यादा जानकारी गूगल बाबा के अलावा कोई और नहीं बता पायेगा !!!

फिर क्या लैपटॉप उठा "गूगल बाबा की जय" बोल  चल पड़े  सर्च पर .............

परिणाम मे जो कुछ आया वो देख कर पहले तो चौक पड़ा , फिर सीना गर्व से चौड़ा हो गया ...........

पत्रिका न्यूज़ , बीबीसी इंडिया , विभिन्न न्यूज़ मे पहले से जानकारी आ चुकी थी ......और हम अभी तक जगे ही नहीं ....................

           जिस कंपनी ने कभी व्यापार के नाम पर भारत को गुलाम बना लिया था और 100 सालों तक हमारे देश पर राज किया था आज उस ईस्ट इंडिया कंपनी का मालिक भारतीय बन गया है.



                             100 सालों तक हमारे देश पर राज करने वाली ईस्ट  इंडिया कंपनी की शुरुआत 1600 में हुई थी। इस कंपनी ने 17वीं व 18वीं शताब्दी में पूरी दुनिया के बिजनेस पर राज किया था। ईस्ट इंडिया कंपनी 1757 में भारत पहुंची थी और धीरे-धीरे 'फूट डालो और राज करो' की नीति के बल पर इसने पूरे भारत पर कब्जा कर लिया था।

ईस्ट  इंडिया कंपनी  ने कभी व्यापार के नाम पर भारत को गुलाम बना लिया था और 100 सालों तक हमारे देश पर राज किया था आज उस ईस्ट इंडिया कंपनी का मालिक भारतीय बन गया है.

ईस्ट  इंडिया कंपनी   कंपनी को खरीदने के लिए संजीव ने कंपनी के 40 शेयर धारकों से वर्ष 2010 में डील फाइनल की थी। संजीव की मानें तो इस डील को सफल बनाने के लिए उन्‍होंने दिन-रात एक कर दिया था।संजीव जो कि मुंबई के हीरे के उद्योगपति हैं, कहते हैं कि उनके लिए यह मौका काफी इमोशनल पल था। वह बार-बार इसी बात को सोचते कि जिसने हम पर कभी राज किया, आज वह उसी कंपनी के मालिक हैं। संजीव ने अब अपनी इस कंपनी के लिए कई प्‍लान भी बना डालें हैं।

अंग्रेजों के किए अत्याचार की कहानियां दिन रात उनके दिमाग में चलती थी. इस कंपनी को खरीदना उनके जीवन का एकमात्र उद्देश्य बन चुका था.

हम सबको पता है कि ईस्ट इंडिया कंपनी व्यापार के नाम पर 1757 में हिंदुस्तान की धरती पर कदम रखा था और बाद में अपनी शातिर चालों के दम पर पूरे देश में कब्जा कर लिया और 100 साल तक गुलाम में बनाए रखा.







लेकिन अब........ 
वक्त पहिया ऐसा घूमा है कि जिस कंपनी भारत को गुलाम बनाया था आज उसका मालिक भारत का ही बेटा है.
अब यह कंपनी ब्रिटिश नागरिक नहीं बल्कि एक भारतीय के मालिकाना हक वाली कंपनी है।

भारत को गुलाम बनाने वाली ईस्ट इंडिया कंपनी का मालिक बना एक भारतीय, पढ़ें कौन है ये

            मुंबई के उद्योगपति संजीव मेहता ने उस कंपनी का खरीद लिया है. इस सौदे को पक्का करने के लिए संजीव मेहता को अच्छी खासी रकम देनी पड़ी थी.

वह ईस्‍ट इंडिया कंपनी को नए बिजनेस में लाने की तैयारी कर रहे हैं। उनकी योजना ई-कॉमर्स बिजनेस के जरिए कई तरह के लग्‍जरी गिफ्ट्स बेचने की है। संजीव ने 15 अगस्‍त यानी आजादी के दिन अपने इस ब्रांड को लांच भी कर दिया है।


संजीव का कहना है कि ये एक बिजेनस डील से कहीं ज्यादा इमोशनल डील है. मुंबई के इस कारोबारी ने 15 मिलियन डॉलर में खरीदा है.
मुंबई के बिजनेसमैन संजीव को इस बात को भी कोई अफसोस नहीं है कि इस कंपनी को खरीदने के लिए उन्‍हें एक बड़ी कीमत अदा करनी पड़ी है। संजीव ने 15 मिलियन डॉलर की कीमत अदा करके खरीदा है। 

संजीव मेहता ने इस कंपनी को खरीदने के लिए पूरा कैरियर, सारा रुपया यहां तक की अपनी नींद हराम कर ली थी. उनको कहना है कि जब 2010 में डील की बात चली थी तो उस समय से रात में उनको आजादी की कहानी के सपने आते थे.


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20 दिन में 5 वीं बार जीते गोल्ड मेडल-विश्व एथलेटिक्स चैम्पियन हिमा दास.....

भारतीय एथलीट हिमा दास ने चेक रिपब्लिक में आयोजित 400 मीटर रेस जीतने के साथ ही एक महीने में 5वां गोल्ड मेडल अपने नाम किया। दास ने ये रेस 52:09 सेंकेंड में पूरी की।





भारत की नई उड़न परी हिमा दास ने शनिवार को एक और स्वर्ण पदक अपने नाम किया हिमा ने नोवे मेस्टो नाड मेटुजी ग्रां प्री में महिलाओं की 400 मीटर स्पर्धा में पहला स्थान हासिल किया।यह उनका महीनेभर में 5वां गोल्ड मेडल रहा इस दौड़ को जीतने के लिए उन्होंने 52.09 सेकंड का समय लिया।इससे पहले वे दो जुलाई को यूरोप में, सात जुलाई को कुंटो ऐथलेटिक्स मीट में, 13 जुलाई को चेक गणराज्य में ही और 17 जुलाई को टाबोर ग्रां प्री में अलग-अलग स्पर्धाओं में स्वर्ण जीत चुकी हैं।
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विश्व चैंपियन-15 दिनों में 5 Gold लेकिन देश को सबसे पहले जानना है जाति -भारत की 'उड़न परी' हिमा दास.


धा
न के खेतों से चलकर अंतरराष्ट्रीय मैदान पर फ़र्राटे सी दौड़ने वाली एथलीट हिमा दास का नाम आज ज़्यादातर लोग जानते हैं.


51.46 सेकेंड में आईएएएफ़ विश्व अंडर-20 एथलेटिक्स चैंपियनशिप की 400 मीटर दौड़ पूरी कर गोल्ड मेडल जीतना. ये वो कारनामा था, जिसके बाद पूरी दुनिया ने भारत की 'उड़न परी' हिमा दास के बारे में जाना. लेकिन कुछ लोगों के मन में एक सवाल रह गया. सवाल कि हिमा दास की जाति क्या है?


हिमा के जीतने के बाद से गूगल पर ऐसे लोगों की तादाद में इजाफ़ा हुआ, जो हिमा दास की जाति जानना चाहते हैं. ऐसा 2016 ओलंपिक्स के दौरान भी हुआ था, जब पीवी सिंधु मैदान पर बैडमिंटन खेल रही थीं, तब लोग सिंधु की जाति जानना चाह रहे थे.

गूगल पर 12 जुलाई के बाद से अगर गूगल ट्रेंड्स पर नज़र दौड़ाएं तो भारत में लोग हिमा दास की जाति जानना चाह रहे हैं. अगर आप गूगल पर हिमा लिखते हैं तो पहला सुझाव 'जाति' मिलता है.




काश यह लड़की  प्रियंका चोपडा या कैटरीना कैफ होती जो सोशल मीडिया पर छा जाती लेकिन जनाब यह तो किसान की बेटी है जिसने भारत का नाम रोशन किया है हैरानी की बात है अधिकतर लोगो को इसकी जानकारी तक नहीं है धन्य है वह असम का गरीब धान उगाने वाला किसान परिवार जिसने एक दृढ़ संकल्पी खिलाड़ी भारत मां को दिया है ।

जिसके पास सप्लीमेंट और प्रोटीन कभी नहीं थे जो सिर्फ दाल और चावल खाकर उस मुकाम पर पहुंची है 

वह कभी स्टेडियम के पक्के ट्रैक पर नहीं दौड़ पाई क्योंकि उसके लिए तो खेतों के कच्चे रास्ते ही उसके सपने और देश के सपने पूरे करने वाले थे।

जिसने जब देश के लिए विश्व चैंपियनशिप में गोल्ड मेडल जीता उसकी आंखें आंसुओं से भरी हुई थी जब राष्ट्रीय गान चल रहा था । यह आंसू गोल्ड मेडल के नही थे यह आंसू थे भारत का नाम रोशन करने के लिए भारत के राष्ट्रगान के सम्मान मे ओर अब लगातार भारत का नाम रोशन करती जा रही है सभी तरह की प्रतियोगिता मे भारत को पदक अवश्य दिलाती है अभी हाल ही मे असम बाढ पीड़ितों के लिए अपने पदक की राशी दान कर दी इसे कहते है अपने देश अपने राज्य के प्रति वफादारी






























15 दिनों में हिमा दास ने जीता 5 गोल्ड मेडल, पूरे देश ने ऐसे किया सलाम

भारत की स्टार एथलीट हिमा दास की शानदार फॉर्म जारी है। उन्होंने पिछले 15 दिनों में अपना 5 वा गोल्ड मेडल जीता है। 

हिमा ने इससे पहले कुछ इस तरह जीते  गोल्डः


  • पहला गोल्ड: 2 जुलाई को हिमाहिमा दास ने पोजनान एथलेटिक्स ग्रांड प्रिक्स में 200 मीटर रेस में हिस्सा लिया था। उन्होंने 23.65 सेकंड में उस रेस पूरा कर गोल्ड जीता था।

  • दूसरा गोल्ड: हिमा दास ने 7 जुलाई को पोलैंड में कुटनो एथलेटिक्स मीट में 200 मीटर रेस को 23.97 सेकंड में पूरा कर गोल्ड मेडल जीता था

  • तीसरा गोल्ड: हिमा दास ने 13 जुलाई को चेक रिपब्लिक में हुई क्लांदो मेमोरियल एथलेटिक्स में महिलाओं की 200 मीटर रेस को 23.43 सेकेंड में पूरा किया।

  • चौथा गोल्ड:महिलाओं की 200 मीटर रेस में हिमा दास ने चेक रिपब्लिक में चल रहे टबोर एथलेटिक्स मीट में बुधवार (17 जुलाई) को एक और गोल्ड मेडल अपने नाम कर लिया। हिमा ने महज 23.25 सेकेंड में दौड़ पूरी कर ली।
  • 5वा गोल्ड: हिमा ने नोवे मेस्टो नाड मेटुजी ग्रां प्री में महिलाओं की 400 मीटर स्पर्धा में पहला स्थान हासिल किया।यह उनका महीनेभर में 5वां गोल्ड मेडल रहा इस दौड़ को जीतने के लिए उन्होंने 52.09 सेकंड का समय लिया

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Hima Das Biography in Hindi | हिमा दास जीवन परिचय

Hima Das Biography in Hindi | हिमा दास जीवन परिचय

जीवन परिचय
वास्तविक नामहिमा दास
उपनामहिमा, मोन जय, गोल्डन गर्ल
व्यवसायएथलीट
प्रसिद्ध हैंविश्व स्तर पर ट्रैक स्पर्धा में स्वर्ण पदक जीतने के लिए
शारीरिक संरचना
लम्बाई (लगभग)से० मी०- 165 
मी०- 1.65
फीट इन्च- 5' 5”
वजन/भार (लगभग)55 कि० ग्रा०
आँखों का रंगकाला
बालों का रंगभूरा
ट्रैक और फील्ड#colspan#
अंतर्राष्ट्रीय शुरुआतवर्ष 2018 में आईएएएफ विश्व U-20 चैंपियनशिप में
कोच/संरक्षकनिपोन
हिमा दास अपने कोच के साथ
इवेंटSprint
रिकॉर्ड्स (मुख्य)वर्ष 2018 आईएएएफ वर्ल्ड U-20 चैम्पियनशिप में, उन्होंने 400 मीटर की रेस में स्वर्ण पदक जीता और विश्व चैंपियनशिप में खिताब जीतने वाली वह पहली भारतीय ट्रैक एथलीट बनी।
व्यक्तिगत जीवन
जन्मतिथि9 जनवरी 2000
आयु (वर्ष 2018 के अनुसार)18 वर्ष
जन्मस्थानगांव धिंग, जिला नगांव, असम
राशिमकर
राष्ट्रीयताभारतीय
गृहनगरगांव धिंग, जिला नगांव, असम
धर्महिन्दू
शौक/अभिरुचिफुटबॉल खेलना, शूटिंग करना, संगीत सुनना, फिल्में देखना
प्रेम संबन्ध एवं अन्य जानकारियां
वैवाहिक स्थितिअविवाहित
परिवार
पतिकोई नहीं
माता-पितापिता - रोंजित दास (किसान)
माता - जोमाली
हिमा दास अपनी माँ के साथ
भाई-बहन5 (नाम ज्ञात नहीं)
पसंदीदा चीजें
पसंदीदा ट्रैक एथलीटअश्विनी अक्कुनजी
पसंदीदा फुटबॉल खिलाड़ीNicolás Vélez (Argentina)
पसंदीदा संगीतकारजुबिन गर्ग
पसंदीदा फ़िल्मेंमोन जय, मिशन चाइना
धन/संपत्ति संबंधित विवरण
आय (लगभग)ज्ञात नहीं
कुल संपत्ति (लगभग)ज्ञात नहीं


हिमा दास से जुड़ी कुछ रोचक जानकारियाँ

  • ट्रैक स्पर्धा में आने से पहले, हिमा फुटबॉल में रुचि रखती थीं।
  • अपने स्कूल समय में हिमा लड़कों के साथ फुटबॉल खेलती थीं।
  • निपोन (हिमा कोच) ने हिमा को अंतर-जिला प्रतियोगिता के दौरान देखते हुए कहा कि “हिमा ने सबसे सस्ते स्पाइक्स पहन रखे हैं और इसके बावजूद भी वह 100 मीटर और 200 मीटर की दौड़ में स्वर्ण जीत जाती हैं, वह हवा की तरह दौड़ रही थी, अपने संपूर्ण जीवन में मैंने इतनी कम उम्र में ऐसी प्रतिभा नहीं देखी।”
  • निपोन ने हिमा पर गांव से 140 किमी दूर गुवाहाटी में स्थानांतरित होने के लिए दबाव डाला और उसे आश्वस्त किया कि उनके पास एथलेटिक्स में सुनहरा भविष्य है।
  • शुरुआत में उनके माता-पिता गुवाहाटी भेजने के लिए अनिच्छुक थे, लेकिन बाद में वह भी सहमत हो गए।
  • विश्व U-20 चैंपियनशिप में स्वर्ण पदक जीतने के बाद, भारतीय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने उन्हें ट्विटर पर बधाई दी।
  • ऑस्ट्रेलिया के गोल्ड कोस्ट में 2018 राष्ट्रमंडल खेलों में, वह 400 मीटर के फाइनल में छठे स्थान पर रहीं।
  • हिमा ने फिनलैंड के टैम्पेयर शहर में आयोजित IAAF विश्व U-20 एथलेटिक्स चैंपियनशिप (IAAF World U20 Championships) की 400 मीटर दौड़ में स्वर्ण पदक जीता। जिसमें उन्होंने दौड़ को पूरा करने में 51.46 सेकंड का समय लिया।
  • आईएएएफ विश्व U-20 एथलेटिक्स चैंपियनशिप की 400 मीटर दौड़ के सेमीफाइनल में जीत दर्ज करने के बाद एथलेटिक्स फेडरेशन ऑफ इंडिया (Athletics Federation of India) ने हिमा दास की अंग्रेजी भाषा को लेकर अपमानित करते हुए एक ट्वीट किया :

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भारत का पहला डिजिटल गाँव, बना देश की शान!

Akodara India’s first Digital Village
भारत, जहां की अधिकतर जनसंख्या गाँवों में अपना जीवन व्यतीत करती है। एक तथ्य के अनुसार यह कहा जाता है कि भारत का निर्माण ही गांवों की देन है पर आज लोगों द्वारा बढ़ते आधुनिक युग की वजह से गाँवों को एक पिछड़े समाज की श्रेणी में गिना जाता है जिसके पीछे है लोगों की गाँवों के प्रति नकारात्मक सोच।
लेकिन आज कई गाँव भी स्मार्ट शहरों को मुकाबले की टक्कर दे रहे हैं इसी कड़ी में आज हम आपको भारत की सबसे पहले डिजिटल गाँव से अवगत करवाने जा रहे हैं जिसने भारत की शान में चार चाँद लगा दिए हैं।

भारत का पहला डिजिटल गाँव, बना देश की शान – Akodara India’s first Digital Village

देश के पहले आधुनिक गाँव का नाम है अकोदरा। यह गाँव भारत के गुजरात की राजधानी अहमदाबाद से करीब 90 किलोमीटर की दूरी पर स्थित है।
इस गाँव के डिजिटल होने के पीछे निम्नलिखित कारण है। इस गाँव की आबादी तकरीबन 1190 है जिस में से 1040 लोग वयस्क लोगों की सूची में आते हैं व साथ ही 250 से ज्यादा लोगों के बैंक में खाते भी खुले हुए हैं। गाँव के निवासी पूर्ण रूप से कैश पर निर्भर नहीं हैं ये अपना अधिकतर लेने देन डिजिटल माध्यमों से करते हैं।

दूध का व्यवसाय, बैंक में आती आय – First Cashless Village of India

अकोदरा गाँव में सबर डायरी ने पशुओं के रख रखाव के लिए एक हॉस्टल की सुविधा मुहैया करवाई हुई है। इसी डायरी में ग्रामीण अपने रोजाना जानवरों का दूध लाकर बेचते हैं व यहीं पर दूध की जांच भी की जाती है।
यहां के एक निवासी के अनुसार दूध से होने वाली आय हर 10 दिन के भीतर लोगों के बैंक खाते में आ जाती है। जिससे लोगों को दूर दूध बेचने के लिए नहीं जाना पड़ता और ना ही पैसों के मामले में लोगों से उधारी की मार झेलनी पड़ती।

स्मार्ट गांव में स्मार्ट स्कूल – Smart School in Akodara

आज यह गाँव इस स्तर पर डिजिटल हो गया है कि यहां पर विधार्थियों को स्कूली शिक्षा में डिजिटल यंत्रों का समावेश किया जाता है। गाँव में मौजूद स्कूल में टेबलेट, स्मार्ट बोर्ड, कम्प्यूटर आदि यंत्र हैं जिसका प्रयोग स्कूल के शिक्षकों द्वारा किया जाता है।
स्मार्ट स्कूल का अंदाजा इस कदर लगाया जा सकता है कि विद्यार्थी अपनी उपस्थिति भी एक कार्ड को स्वाइप कर के दर्ज करवाते हैं।
नोटबंदी में नहीं छाई मंदी –
जिस दौरान भारत में सरकार द्वारा नोटबंदी का फैसला सुनाया गया था तब देश के अधिकतम क्षेत्रों पर हाहाकार मच गया था क्यों की लोग रोजाना की चीजों को नहीं खरीद पा रहे थे व उन्हें कहीं अन्य मुश्किलों का सामना करना पड़ था पर अकोदरा गाँव के निवासियों को नोटबंदी के फैसले से किसी भी प्रकार की समस्या नहीं आई थी क्यों की कैश की अलावा ये लोग सभी डिजिटल उपकरणों से जैसे मोबाइल बैंकिंग, कार्ड पेमेंट और नेटबैंकिंग आदि से आसानी से लेन देन कर पा रहे थे।
इसी कारण ना तो यहां पर व्यापारियों को समस्या आयी ना ही ग्राहकों को। नोटबंदी का प्रभाव शहरों पर भी पड़ा था पर अकोदरा एक गाँव होने के बावजूद भी इस समस्या से मुक्त था।

गाँव में वाई फाई – Wifi in Village

पहले डिजिटल गाँव से सम्मानित अकोदरा गाँव में वाई फाई की सुविधा भी उपलब्ध है व साथ ही विशेष तौर पर वाई फाई टॉवर भी लगाया गया है।
इस सुविधा का लाभ ग्रामीणों द्वारा किया जाता है। गाँव को डिजिटल बनाने में गाँव वासियों का भी भरपूर योगदान है यहां पर पंचायत स्तर को- ऑपरेटिव सोसाइटी भी बनाई गयी है।
गाँव की वेबसाइट –
अकोदरा गाँव की अपनी एक वेबसाइट भी इंटरनेट पर मौजूद है जिस पर गाँव से संबंधित सम्पूर्ण जानकारी उपलब्ध है। इसमें गांव से जुड़ी तमाम कार्यों, सकलताओं, जनसंख्या, आर्थिक स्थिति आदि की जानकारी पल पल अपडेट के साथ वेबसाइट के जरिये सांझा की जाती है।

डिजिटल गाँव होने का श्रेय – Digital Village

अकोदरा गाँव पूर्व में आम गाँवों की सूची में ही गिना जाता था परन्तु जब 2015 में सरकार द्वारा चलाये गए एक अभियान के दौरान इसे आई सी आई सी आई बैंक ने गोद लिया था तब से इस गाँव की काया पलट गयी थी।
बैंक ने अकोदरा को डिजिटल बनाने के लिए अनेक कठिन प्रयास किये हैं। शुरुआत में आई सी आई सी आई ने ग्रामीणों को कैशलेस करने के लिए उनके बैंक में खाते खुलवाये और इसके उपरान्त ग्रामीणों को कैशलेस जीवन व्यापन करने के लिए आधुनिक यंत्रों का प्रयोग करना सिखाया।
बैंक ने एक साल के भीतर गाँव को इस स्तर पर लाकर खड़ा कर दिया था कि छोटे मोटे व्यापार से लेकर बड़े व्यापार तक हर कोई डिजिटल ट्रांजेक्शन करने में पूर्ण हो गया था फिलहाल अब मोबाइल बैंकिंग, नेट बैंकिंग के लिए गुजराती, अंग्रेजी, हिंदी भाषा का उपयोग में लाया जाता है।

एशिया का पहला ऐनिमल हॉस्टल का स्थान प्राप्त – India’s first Animal Hostel

पहले डिजिटल गाँव के साथ साथ इस गांव को एक अन्य उपलब्धि प्राप्त है। अकोदरा में एशिया का पहला ऐनिमल हॉस्टल है। इस हॉस्टल को अकोदरा में खोले जाने के पीछे एक मुख्य वजह यह थी कि गांव के 100 फीसदी लोग साक्षर हैं जो कि ऐनिमल हॉस्टल को चलाने के लिए अनिवार्य चुनौती थी।
बैंक में 100 से 1200 खाते खुले – 
इस डिजिटल गाँव में पहले केवल 100 खाते थे जिनका प्रयोग केवल गिने चुने लोग ही करते थे परन्तु आईसीआईसी बैंक ने जब लोगों को डिजिटल लेन देन के फायदे बताये व उन्हें ट्रेनिंग देकर बैंक के कार्यों से अवगत करवाया इसके उपरान्त बैंक में 1200 लोगों ने अपने खाते खुलवाये और इसका लाभ उठाया।
आज गाँव में हर वर्ग के लोग बच्चे, बुजुर्ग, महिलाएं, किशोर सभी पूर्ण रूप से डिजिटल हो गए हैं व गाँव को पहले डिजिटल गाँव की उपलब्धि प्राप्त है।
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