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Sunday, February 28, 2021

आयुष्मान कार्ड आज से जिले में आज से बनेंगे निःशुल्क ..5 लाख तक के मुफ्त इलाज सुविधा.

February 28, 2021 0

प्रधानमंत्री जन आरोग्य योजना डाॅ. खूबचंद स्वास्थ्य सहायता योजनांतर्गत अधिक से अधिक हितग्राहियों को लाभ देने के उद्वेश्य से केन्द्र सरकार एवं राज्य सरकार के द्वारा ''आपके द्वार आयुष्मान'' योजना का क्रियान्वयन 01 मार्च से 31 मार्च 2021 तक किया जा रहा है। शासन के निर्देशानुसार जिले के च्वाइस सेंटरो में हितग्राहियों को निःशुल्क आयुष्मान कार्ड उनकी पात्रता के आधार पर बनाकर दिया जावेगा। इन कार्डों द्वारा बी.पी.एल एवं प्राथमिकता वाले राशन कार्ड में प्रतिवर्ष 5 लाख रूपये एवं सामान्य राशन कार्डधारी परिवारों को 50 हजार रूपये तक कि मुफ्त चिकित्सा सुविधा राज्य के किसी भी पंजीकृत निजी एवं शासकीय चिकित्सालयों में करा सकेंगे।

च्वाइस सेंटर में निःशुल्क बनेगा आयुष्मान कार्ड
आयुष्मान कार्ड बनाने का आरम्भ 01 मार्च से देश भर में किया जा रहा है। जिसमें जिले के समस्त च्वाइस सेंटरो के द्वारा हितग्राहियों को निःशुल्क आयुष्मान भारत का कार्ड बनाया जायेगा। कार्ड बनवाने के लिए हितग्राहियों को राशन कार्ड, आधार कार्ड, मोबाइल नंबर सहित च्वाइस सेंटरो में जाना होगा। च्वाइस सेंटर के द्वारा हितग्राहियांे को उनकी पात्रता के आधार पर आयुष्मान कार्ड निःशुल्क बनाया जाएगा।
इसके लिए च्वाॅइस सेंटरों द्वारा सर्वप्रथम हितग्राहियों को कागज में आयुष्मान कार्ड प्रदान किया जाएगा। कुछ दिनों उपरांत च्वाइस सेंटर के केंद्रीय कार्यालय से इन हितग्राहियों के प्लास्टिक कार्ड संबंधित च्वाइस सेंटर को प्रेषित किए जाएंगे। च्वाइस सेंटर द्वारा प्लास्टिक कार्ड प्राप्त होने की सूचना हितग्राहियों को दी जाएगी। हितग्राही च्वाइस सेंटर से ही पुनः बायोमेट्रिक अथेंटीकेसन उपरांत पीव्हीसी आयुष्मान कार्ड प्राप्त कर सकेंगे। मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी टीआर कुँवर ने जिले के नागरिकों से अपील की है कि वे 01 मार्च से 31 मार्च के मध्य चॉइस सेंटर जाकर अपना कार्ड बनावें।

- 5 लाख रुपए की सहायता प्रदान की जा रही है
- चॉइस सेंटर में पूरी तरह नि:शुल्क बनेंगे
- छत्तीसगढ़ में आयुष्मान भारत पीएम जनआरोग्य डॉ. खूबचंद बघेल स्वास्थ्य सहायता योजना का संचालन

 इस कार्ड को दिखाते ही राज्य के अनुबंधित सरकारी और गैर सरकारी अस्पतालों में शत-प्रतिशत नि:शुल्क इलाज मिलेगा। 1 मार्च से 31 मार्च 2021 तक प्रदेश के चॉइस सेंटर में नि:शुल्क कार्ड बनाएं जाएंगे। 25 फरवरी को आयुष्मान भारत प्रधानमंत्री जनआरोग्य डॉ. खूबचंद बघेल स्वास्थ्य सहायता योजना की राज्य नोडल एजेंसी ने इससे संबंधित गाइडलाइन सभी सीएमएचओ को जारी कर दी।

केंद्र सरकार के अभियान ‘आपके द्वार आयुष्मान’ अंतर्गत कार्ड बनाने की प्रक्रिया शुरू होने जा रही है। कांग्रेस सरकार के सत्ता में आते ही सरकार ने राज्य में राशन कार्ड के जरिए नि:शुल्क इलाज की घोषणा कर दी थी। जो अभी भी जारी है। मगर, यह देखा गया कि कार्ड होने से लोग ज्यादा संतुष्ट होते हैं कि उन्हें जरुरत के वक्त सरकारी सहायता मिलेगी। पूर्व में स्मार्ट कार्ड की तर्ज पर ही ये कार्ड बनने जा रहे हैं।

स्वास्थ्य विभाग के आंकड़ों के मुताबिक प्रदेश में 65,49,159 परिवारों को इस अभियान का लाभ मिलेगा। केंद्र सरकार ने निर्देश दिए हैं कि इस अभियान के प्रचार-प्रसार के लिए मुनादी करवाएं, होर्डिंग्स, बैनर-पोस्टर, वॉल पेंटिंग और शिविरों का आयोजन करें। गाइडलाइन में कोरोना प्रोटोकॉल के पालन करने के निर्देश दिए गए हैं।

50 हजार और 5 लाख तक की सहायता
केंद्र सरकार द्वारा आयुष्मान भारत योजना अंतर्गत हितग्राही बीपीएल परिवारों के लिए 5 लाख रुपए की सहायता प्रदान की जा रही है, जबकि राज्य सरकार द्वारा एपीएल परिवारों को अपने तहत 50 हजार रुपए की तक स्वास्थ्य सहायता दी जा रही है।

*ऐसे बना सकते हैं कार्ड*
*1- व्यक्तिगत पहचान पत्र के लिए आधार कार्ड। पारिवारिक सदस्यता सत्यापन के लिए राशनकार्ड ले जाना होगा।*
*2- प्रक्रिया पूरी होते ही पहले कागज वाला कार्ड मिलेगा, कुछ दिनों के संबंधित चॉइस सेंटर पर आपके कार्ड बन जाने की जानकारी भेजी जाएगी। वहां से बाद बायोमेट्रिक सत्यापन के बाद प्लास्टिक कार्ड जारी होंगे*
(नोट- इस संबंध अधिक जानकारी के लिए मितानीन, स्वास्थ्य कार्यकर्ता एएनएम और आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं से सहायता ली जा सकती है।)
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Thursday, February 11, 2021

राजीव गांधी किसान निधि योजना पंजीकरण की पंजीकरण करवाने की अंतिम तिथि 28 फरवरी 2021 I धान, मक्का, गन्ना किसानों को छोड़कर अन्य फसलों तथा सोयाबीन, मूंगफली, तिल, अरहर, मूंग, उड़द, कुलथी, राम तिल, कोदो, कुटकी तथा रागी फसल में मिलेगा फायदा I

February 11, 2021 3

राजीव गांधी किसान निधि योजना पंजीकरण की समय सीमा बढ़ी



राजीव गांधी किसान न्याय योजना के अंतर्गत सरकार द्वारा पंजीकरण करवाने की समय सीमा बढ़ा दी गई है। यह पंजीकरण खरीफ वर्ष 2020 के लिए होने हैं। कृषि विकास, किसान कल्याण एवं प्रौद्योगिकी विभाग द्वारा अब समय सीमा को बढ़ाकर पंजीकरण करवाने की अंतिम तिथि 28 फरवरी 2021 कर दी है। पहले यह तिथि 31 जनवरी 2021 थी। वह सभी किसान जिन्होंने अब तक राजीव गांधी किसान न्याय योजना के अंतर्गत पंजीकरण नहीं करवाए हैं वह समय सीमा रहते पंजीकरण करवा ले।

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राजीव गांधी किसान न्याय योजना – Rajiv Gandhi Kisan Nyan Yojana Chhattisgarh

छत्तीसगढ़ राज्य में लगभग 70 प्रतिशत आबादी कृषि पर निर्भर है। राज्य का अधिकांश क्षेत्र वर्षा आधारित होने से मौसमीय प्रतिकूलता एवं कृषि आदान लागत में वृद्धि के कारण कृषि आय में अनिश्चितता तथा ऋण ग्रस्तता बनी रहती है, फलस्वरुप कृषक फसल उत्पादन के लिए आवश्यक आदान जैसे उन्नत बीज, उर्वरक, कीटनाशक, यांत्रिकीकरण एवं नवीन कृषि तकनीकी में पर्याप्त निवेश नहीं कर पाते है। कृषि में पर्याप्त निवेश एवं कास्त लागत में राहत देने के लिए राज्य शासन द्वारा कृषि आदान सहायता हेतु “राजीव गांधी किसान न्याय योजना लागू की गई है।

राजीव गांधी किसान न्याय योजना के तहत खरीफ मौसम के धान, मक्का, सोयाबीन, मूंगफली, तिल, अरहर, मूंग, उड़द, कुल्थी, रामतिल, कोदो, कुटकी, तथा रबी में गन्ना फसल को सम्मिलित किया गया है।



राजीव गांधी किसान न्याय योजना का उद्देश्य


  • राजीव गांधी किसान न्याय योजना का मुख्य उद्देश्य प्रदेश में फसल उत्पादन के लिए किसानों को प्रोत्साहित करना है।
  • फसल क्षेत्राच्छादन, उत्पादन एवं उत्पादकता में वृद्धि।
  • फसल के कार्ड लागत की प्रतिपूर्ति कर कृषकों के शुद्ध आय में वृद्धि करना।
  • कृषकों को कृषि में अधिक निवेश हेतु प्रोत्साहन।
  • कृषि को लाभ के व्यवसाय के रुप में पुनर्स्थापित करते हुए जी डी. पी. में कृषि क्षेत्र की सहभागिता में वृद्धि।

राजीव गांधी किसान न्याय योजना (Rajiv Gandhi Kisan Nyay Yojana – RGKNY) के तहत राज्य सरकार प्रदेश में 18 लाख से अधिक किसानों को आदान राशि प्रदान करेगी जो कि DBT के माध्यम से सीधे किसानों के बैंक खातों में जमा कर दी जाएगी।



Rajiv Gandhi Kisan Nyay Yojana दिशा निर्देश

इन सभी पंजीकृत किसानों के डाटा को राजीव गांधी किसान योजना के लिए मान्य किया जाएगा और दूसरी फसलों के लिए राजस्व विभाग द्वारा एक और पोर्टल आरंभ किया जाएगा जिसमें एरिया वाइज, क्रॉप प्राइस कवरेज होगी।
धान, मक्का, गन्ना उत्पादक किसानों को छोड़कर अन्य फसलों के लिए आदान सहायता राशि की गणना की जाएगी। जिसके लिए भुइया पोर्टल से डाटा कलेक्ट किया जाएगा।
एग्रीकल्चर एक्सटेंशन ऑफिसर द्वारा आवेदन पत्र का सत्यापन किया जाएगा। इसके बाद किसान को कोऑपरेटिव सोसाइटी में अपना पंजीकरण करवाना होगा और फॉर्म वन सभी जरूरी दस्तावेजों के साथ जमा करना होगा। यह जरूरी दस्तावेज लोन बुक, आधार नंबर, बैंक पासबुक की फोटोकॉपी है।
इस योजना में केवल उन्हीं फसलों पर लाभ प्रदान किया जाएगा जिसकी जानकारी दिशानिर्देशों में दी गई है। इसके अलावा किसी और फसल पर इस योजना का लाभ नहीं प्रदान किया जाएगा।

CG Rajiv Gandhi Kisan Nyay Scheme के दस्तावेज़ (पात्रता )

  • आवेदक छत्तीसगढ़ का स्थायी निवासी होना चाहिए।
  • इस योजना के तहत राज्य के केवल किसानो को ही पात्र माना जायेगा।
  • आवेदक का बैंक आकउंट होना चाहिए और बैंक अकाउंट आधार कार्ड से लिंक होना चाहिए।
  • आधार कार्ड
  • निवास प्रमाण पत्र
  • मोबाइल नंबर
  • पासपोर्ट साइज फोटो

राजीव गांधी किसान न्याय योजना सत्यापन प्रक्रिया

  • वह किसान जो अन्य फसल लगाएंगे उन्हें संबंधित प्राथमिक कृषि साख सहकारी समिति में पंजीकरण करवाना अनिवार्य होगा।
  • पंजीकरण फॉर्म का सत्यापन रूरल एग्रीकल्चर एक्सटेंशन ऑफिसर द्वारा किया जाएगा।
  • यह सत्यापन गिरदावरी के डाटा के माध्यम से किया जाएगा। जो कि भुइयां पोर्टल पर उपलब्ध होगा।
  • सत्यापन के बाद किसान अपने आप को कोऑपरेटिव सोसाइटी में पंजीकरण करवा पाएंगे।
  • पंजीकरण प्रक्रिया 28 फरवरी 2021 से पहले करनी होगी।
  • पंजीकरण में किसानों को सभी महत्वपूर्ण दस्तावेज जैसे कि लोन बुक, आधार नंबर, बैंक पासबुक फोटोकॉपी तथा पंजीकरण फॉर्म जमा करना होगा।
  • राजीव गांधी किसान न्याय योजना के अंतर्गत केवल उन्हीं फसलों पर सहायता राशि प्रदान की जाएगी जो इस योजना के अंतर्गत शामिल है।
  • राजीव गांधी किसान न्याय योजना के अंतर्गत वह किसान लाभ नहीं उठा सकते हैं जिन्होंने अपना पंजीकरण नहीं करवाया है।
  • इस पूरी प्रक्रिया के अंतर्गत जो डेटाबेस प्राप्त होगा उसके आधार पर नोडल बैंक के माध्यम से सहायता राशि सीधे किसानों के खाते में डायरेक्ट बेनिफिट ट्रांसफर के माध्यम से पहुंचाई जाएगी।
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Thursday, September 24, 2020

क्या है नया कृषक बिल ? क्यों हो रहा है विरोध ? समझे आसान भाषा व संक्षिप्त में |

September 24, 2020 2


New Farm Bill: राज्यसभा में हंगामे के बीच कृषि से संबंधित दो विवादित बिलों को मंजूरी दे दी गई. जिसके बाद देश के कई किसान संगठन और राजनीतिक दल विरोध में सड़कों पर उतर आए. मोदी सरकार जहां इन विधेयकों (New Farm Bill) को किसानों को सशक्त बनाने का माध्यम बता रही है तो वहीं विपक्ष और लाखों की संख्या में किसान यह मानकर विरोध कर रहे हैं कि इस विधेयक के बाद किसान कॉरपोरेट घरानों के आगे मजबूर हो जाएंगे. वहीं कुछ किसान ऐसे भी जो इस पूरे मामले के राजनीतिकरण से कंफ्यूज हैं, उनकी मांग है कि सरकार आगे आए और किसानों की आशंकाओं को दूर करे और बताए कि किसानों को इस बिल से क्या फायदा.
क्या है बिल और क्यों हो रहा है विरोध:

कृषि संबंधी दो विधेयको को राज्यसभा में मंजूरी दे दी गई है, इस पर राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद के हस्ताक्षर होने के साथ ही यह कानून का रूप ले लेगा. जिन विधेयरों को मंजूरी मिली है उसमें कृषि उपज व्यापार और वाणिज्य (संवर्द्धन और सुविधा) विधेयक-2020 और कृषक (सशक्तीकरण एवं संरक्षण) कीमत आश्वासन समझौता और कृषि सेवा पर करार विधेयक-2020 शामिल है.

किसानों को इस बिल से क्या फायदा:-

  • कृषि उपज व्यापार एवं वाणिज्य (संवर्धन एवं सरलीकरण) विधेयक 2020 के तहत किसान या फिर व्यापारी अपनी उपज को मंडी के बाहर भी अन्य माध्यम से आसानी से व्यापार कर सकेंगे.


  • इस बिल के अनुसार राज्य की सीमा के अंदर या फिर राज्य से बाहर, देश के किसी भी हिस्से पर किसान अपनी उपज का व्यापार कर सकेंगे. इसके लिए व्यवस्थाएं की जाएंगी. मंडियों के अलावा व्यापार क्षेत्र में फार्मगेट, वेयर हाउस, कोल्डस्टोरेज, प्रोसेसिंग यूनिटों पर भी बिजनेस करने की आजादी होगी. बिचौलिये दूर हों इसके लिए किसानों से प्रोसेसर्स, निर्यातकों, संगठित रिटेलरों का सीधा संबंध स्थापित किया जाएगा.


  • भारत में छोटे किसानों की संख्या ज्यादा है, करीब 85 फीसदी किसानों के पास दो हेक्टेयर से कम जमीन है, ऐसे में उन्हें बड़े खरीददारों से बात करने में परेशानी आती थी. इसके लिए वह या तो बड़े किसान या फिर बिचौलियों पर निर्भर होते थे. फसल के सही दाम, सही वक्त पर मिलना संभव नहीं होता था. इन विधेयकों के बाद वह आसानी से अपना व्यापार कर सकेंगे.


  • कृषक (सशक्तिकरण व संरक्षण) कीमत आश्वासन और कृषि सेवा पर करार विधेयक किसानों को व्यापारियों, कंपनियों, प्रसंस्करण इकाइयों, निर्यातकों से सीधे जोड़ता है. यह कृषि करार के माध्यम से बुवाई से पूर्व ही किसान को उपज के दाम निर्धारित करने और बुवाई से पूर्व किसान को मूल्य का आश्वासन देता है.


  •  किसान को अनुबंध में पूर्ण स्वतंत्रता रहेगी, वह अपनी इच्छा के अनुरूप दाम तय कर उपज बेचेगा. देश में 10 हजार कृषक उत्पादक समूह निर्मित किए जा रहे हैं. ये एफपीओ छोटे किसानों को जोड़कर उनकी फसल को बाजार में उचित लाभ दिलाने की दिशा में कार्य करेंगे.

क्यों राजनीतिक दल और किसान कर रहे हैं कृषि विधेयकों का विरोध? 

  • नए बिल में न्‍यूनतम समर्थन मूल्‍य यानी MSP को नहीं हटाया गया है (पीएम नरेंद्र मोदी देकर यह बात कह चुके हैं कि एमएसपी को खत्‍म नहीं किया जा रहा है) लेकिन 'बाहर की मंडियों'को फसल की कीमत तय करने की इजाजत देने को लेकर किसान आशंकित हैं.


  • किसानों की इन चिंताओं के बीच राज्‍य सरकारों-खासकर पंजाब और हरियाणा- को इस बात का डर सता रहा है कि अगर निजी खरीदार सीधे किसानों से अनाज खरीदेंगे तो उन्‍हें मंडियों में मिलने वाले टेक्‍स का नुकसान होगा.


किसान यूनियन ने इन पर जताई आपत्ति


  • किसान यूनियन ने राज्यसभा में बिना चर्चा के पास हुए बिल को देश की संसद के इतिहास में पहली दुर्भाग्यपूर्ण घटना बताया है। उन्होंने कहा कि अन्नदाता से जुड़े तीन कृषि विधेयकों को पारित करते समय ना तो कोई चर्चा की और ना ही इस पर किसी सांसद को सवाल करने का सवाल करने का अधिकार दिया गया। टिकैत ने कहा कि यह भारत के लोकतंत्र के अध्याय में काला दिन है।

  • युनियन आगे कहता है कि अगर देश के सांसदों को सवाल पूछने का अधिकार नहीं है तो सरकार महामारी के समय में नई संसद बनाकर जनता की कमाई का 20,000 करोड़ रूपए क्यों बर्बाद कर रही है?

  • आज देश की सरकार पीछे के रास्ते से किसानों के समर्थन मूल्य का अधिकार छीनना चाहती हैं, जिससे देश का किसान बर्बाद हो जाएगा।

  • मण्डी के बाहर खरीद पर कोई शुल्क ना होने से देश की मण्डी व्यवस्था समाप्त हो जाएगी। सरकार धीरे-धीरे फसल खरीदी से हाथ खींच लेगी।

  • किसान को बाजार के हवाले छोड़कर देश की खेती को मजबूत नहीं किया जा सकता। इसके परिणाम पूर्व में भी विश्व व्यापार संगठन के रूप में मिले हैं।

यूनियन बोला- 'सरकार को करना होगा समझौता'


प्रधानमंत्री को संबोधित इस ज्ञापन में किसानों की ओर से कहा गया है कि-

1.केन्द्र सरकार द्वारा 5 जून को लागू किए गए अध्यादेशों का देश के किसान विरोध कर रहे हैं। हालांकि, केन्द्र सरकार इन अध्यादेशों को एक देश एक बाजार के रूप में कृषि सुधार की दशा में एक बड़ा कदम बता रही है। यह अध्यादेश अब कानून की शक्ल ले चुके हैं।

2.वहीं, देश के किसान कानून बन चुके इन अध्यादेशों को, यानी दोनों सदनों से पास हो चुके तीनों किसान विधेयकों को, कृषि क्षेत्र में कंपनी राज के रूप में देख रहे हैं। कुछ राज्य सरकारों ने भी इसे संघीय ढांचे का उल्लंघन मानते हुए इन्हें वापस लिए जाने की मांग की है। देश के अनेक हिस्सों में इसके विरोध में किसान आवाज उठा रहे हैं।

3.किसान जानते हैं कि इन तीनों नए कानूनों के कारण प्राइवेट कम्पनियां उनका जो हाल करेंगी वो बन्धुआ बना लिए जाने के बराबर ही होगा।

4.कृषि में कानून नियंत्रण मुक्त, विपणन, भंडारण, आयात-निर्यात, किसान हित में नहीं है। इसका खामियाजा देश के किसान विश्व व्यापार संगठन के रूप में भी भुगत रहे हैं।

5.देश में 1943-44 में बंगाल के सूखे के समय ईस्ट इण्डिया कम्पनी के अनाज भंडारण के कारण 40 लाख लोग भूख से मर गए थे।

6.समर्थन मूल्य कानून बनाने जैसे कृषि सुधारों से किसान का बिचौलियों और कंपनियों द्वारा किया जा रहा अति शोषण बन्द हो सकता है और इस कदम से किसानों के आय में वृद्धि होगी।

ये है किसानों की मागें


मांग-1 : किसान बिलों से जुड़े अध्यादेशों को तुरंत वापस लिया जाए

(अ) कृषक (सशक्तिकरण और संरक्षण) कीमत आश्वासन एवं कृषि सेवा पर करार अध्यादेश 2020 (ब) कृषक उपज व्यापार और वाणिज्य (संवर्धन और सरलीकरण) अध्यादेश 2020 (स) आवश्यक वस्तु अधिनियम संशोधन अध्यादेश 2020 कृषि और किसान विरोधी तीनों अध्यादेशों को तुरंत वापिस लिया जाए।

मांग-2: एमएसपी (MSP) पर कानून बने

न्यूनतम समर्थन मूल्य को सभी फसलों पर (फल और सब्जी) लागू करते हुए कानून बनाया जाए। समर्थन मूल्य से कम कीमत पर फसल खरीदने को अपराध की श्रेणी में शामिल किया जाए।

मांग-3: सरकारी मंडी और फसल खरीदी का कानून बने

मण्डी के विकल्प को जिन्दा रखने के लिए आवश्यक कदम उठाए जाएं एवं फसल खरीद की गारंटी के लिए कानून बनाया जाए। कानून में ये स्पष्ट हो कि प्राइवेट मंडियों की अधिकता हो जाने पर भी सरकारी मंडियां बंद नहीं होंगी बल्कि प्रतिस्पर्धा की भावना से किसानों के हित में काम करती रहेंगी।



फसलों के न्यूनतम समर्थन मूल्य का ऐलान

कृषि सुधार के विधेयकों को लेकर मचे घमासान के बीच सरकार ने फसलों के न्यूनतम समर्थन मूल्य का ऐलान कर दिया है.  किसानों की चिंता को देखते हुए एक महीने पहले ही न्यूनतम समर्थन मूल्य मंजूरी दे दी गई है. सरकार ने एमएसपी में 50 रुपये से 300 रुपये प्रति क्विंटल तक की वृद्धि की है.किसानों से उनके अनाज की खरीदी FCI व अन्य सरकारी एजेंसियां एमएसपी पर करेंगी.


कृषि मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर के अनुसार, रबी मौसम के लिए चने की एमएसपी में 225 रुपये प्रति क्विंटल की वृद्धि की गई है और यह बढ़कर 5100 रुपये प्रति क्विंटल हो गई है. मसूर का न्यूनतम समर्थन मूल्य 300 रुपये प्रति क्विंटल बढ़ाया गया है और यह 5100 रुपये प्रति क्विंटल हो गया है. उन्होंने बताया कि सरसों के एमएसपी में 225 रुपये प्रति क्विंटल की वृद्धि की गई है और यह बढ़कर 4650 रुपये प्रति क्विंटल हो गई है. जौ के न्यूनतम समर्थन मूल्य में 75 रुपये की वृद्धि के बाद यह 1600 रुपये प्रति क्विंटल और कुसुम के एमएसपी में 112 रुपये प्रति क्विंटल की वृद्धि के साथ यह 5327 रुपये प्रति क्विंटल हो गई है.


कृषि बिलों की तारीफ करते हुए 'पीएम ने कहा कि 'हमारे देश में अब तक उपज बिक्री की जो व्यवस्था चली आ रही थी, जो कानून थे, उसने किसानों के हाथ-पांव बांधे हुए थे. इन कानूनों की आड़ में देश में ऐसे ताकतवर गिरोह पैदा हो गए थे, जो किसानों की मजबूरी का फायदा उठा रहे थे.




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Monday, September 21, 2020

बलौदाबाजार-भाटापारा पूरा जिला पूरी तरह से सील , प्रदेश का पहला जिला होगा कोना-कोना सील !

September 21, 2020 0



बलौदाबाजार/भाटापारा- कलेक्टर एवं जिला दंडाधिकारी सुनील कुमार जैन ने दण्ड प्रकिया संहिता, 1973 की धारा 144, आपदा प्रबंधन अधिनियम, 2005 की धारा 30 एवं 34 सहपठित एपिडेमिक डिसीजेज एक्ट, 1897 यथा संशोधित 2020 द्वारा प्रदत्त शक्तियों का प्रयोग करते हुए 1973 की धारा 144 सम्पूर्ण जिले में 22 सितम्बर दिन मंगलवार रात्रि 12 बजे से 29 सितम्बर, दिन मंगलवार के रात्रि 12 बजे तक तथा बलौदाबाजार भाटापारा जिला अन्तर्गत सम्पूर्ण क्षेत्र को कंटेनमेंट जोन घोषित किया है।

जिले की सभी सीमाएं 22 से 29 सितम्बर के रात्रि 12 बजे तक पूर्णतः सील

आज जारी किए गए आदेश के अनुसार बलौदाबाजार-भाटापारा जिले की सभी सीमाएं 22 सितम्बर रात 12 बजे से 29 सितम्बर के रात 12 बजे की अवधि तक पूर्णतः सील रहेगी। इस अवधि में केवल मेडिकल दुकानों को अपने निर्धारित समय में खोलने की अनुमति होगी। मरीज एवं मेडिकल दुकान संचालक दवाओं की होम डिलीवरी व्यवस्था को प्राथमिकता दिया जाएगा। पेट्रोल पंप संचालकों द्वारा केवल शासकीय वाहनों व शासकीय कार्य में प्रयुक्त वाहन, मेडिकल इमरजेन्सी से संबंधित निजी वाहन, एम्बुलेंस तथा एल.पी.जी. परिवहन कार्य में प्रयुक्त वाहनों को ही पी.ओ.एल. प्रदान किया जाएगा। अन्य सभी वाहनों हेतु पी.ओ.एल. प्रदान करना पूर्णतः प्रतिबंधित रहेगा। दुग्ध पार्लर व वितरण की समयावधि सुबह 8 बजे से सुबह 9.30 बजे तक एवं शाम 5.30 बजे से शाम 7.00 बजे तक ही होगी। साथ ही यह स्पष्ट किया गया है कि दुग्ध व्यवसाय हेतु कोई भी दुकान या पार्लर नही खोले जायेंगे। केवल दुकान या पार्लर के सामने फिजिकल डिस्टेंसिग एवं मास्क संबंधी निर्देशों का पालन करते हुए उपरोक्त समयावधि में केवल दुग्ध विक्रय की अनुमति होगी। पैट शॉप एक्वेरियम को केवल पशुओं को पशुचारा देने हेतु सुबह 6 बजे से सुबह 8 बजे तक एवं शाम 5 बजे से शाम 6.30 बजे तक दुकान खोलने की अनुमति होगी। एल.पी.जी. गैस सिलेन्डर की एजेसिंयाँ केवल टेलीफोनिक या ऑनलाइन ऑर्डर लेंगे तथा ग्राहकों को सिलेन्डरों की घर पहुँच सेवा उपलब्ध करायेगें। औद्योगिक संस्थानों एवं निर्माण इकाईयों को अपने कैम्पस के भीतर मजदूरों को रखकर व अन्य आवश्यक व्यवस्था करते हुये उद्योगों के संचालन व निर्माण कार्यो की अनुमति होगी।







जिले के सभी शराब दुकानें रहेंगे बंद

इस अवधि के दौरान सम्पूर्ण जिले के अन्तर्गत संचालित समस्त शराब दुकाने बंद रहेगी। सभी धार्मिक, सांस्कृतिक एवं पर्यटन स्थल आम जनता के लिए पूर्णतः बंद रहेंगे।


केन्द्रीय, शासकीय, अर्द्धशासकीय एवं निजी कार्यालय भी रहेगें बंद

इस अवधि में जिले के अन्तर्गत सभी केन्द्रीय, शासकीय, अर्द्धशासकीय एवं निजी कार्यालय बंद रहेगें। सभी प्रकार की सभा, जुलुस, आयोजन आदि प्रतिबंधित रहेगें। होम आइसोलेशन में रह रहे कोविड पॉजिटिव मरीजों को भोजन की समस्या उत्पन्न होने पर कोविड केयर सेंटर आवश्यकतानुसार भेजा जाएगा। आपात स्थिति में 07727-223532 नंबर पर आवश्यकतानुसार संपर्क किया जा सकता है।



कोरोना संक्रमण रोकथाम एवं नियंत्रण के लिए गठित विभिन्न दलों में शामिल अधिकारी-कर्मचारी की उपस्थिति अनिवार्य


आदेश का उल्लंघन करने वाले पर भारतीय दण्ड संहिता के अनुसार होगी कड़ी कार्यवाही

कोविड संक्रमण के रोकथाम हेतु जिले में समस्त कार्य जैसे कांटेक्ट ट्रेसिंग, एक्टिव सर्विलांस, होम आइसोलेसन, दवाई वितरण आदि पूर्वानुसार चलते रहेगें। इन कार्य में संलग्न सभी शासकीय कर्मचारियों की उपस्थिति पूर्वानुसार अनिवार्य होगी। कोविड केयर सेंटर से डिस्चार्ज होने वाले मरीजों के परिवहन में संलग्न वाहन पूर्वानुसार संचालित रहेगें। अपरिहार्य परिस्थितियों में बलौदाबाजार भाटापारा जिले से अन्यत्र जाने वाले यात्रियों को ई-पास के माध्यम से पूर्व अनुमति लिया जाना अनिवार्य होगा। आपात स्थिति में यात्रा के दौरान 04 पहिया वाहनों में ड्राइवर सहित अधिकतम 3 एवं दो पहिया वाहन में केवल 2 व्यक्तियों को यात्रा की अनुमति होगी। इस निर्देश का उल्लंघन किए जाने पर 15 दिवस हेतु वाहन जप्त करते हुये चालानी व अन्य कानूनी कार्रवाई की जाएगी। मीडिया कर्मी यथासंभव वर्क फ्रॉम होम द्वारा कार्य संपादित करेगें। अत्यावश्यक स्थिति में कार्य हेतु बाहर निकलने पर अपना आई-कार्ड साथ रखेगें तथा फिजिकल डिस्टेंसिंग एवं मास्क संबंधी निर्देशा का कड़ाई से पालन सुनिश्चित करेंगे।
यह आदेश कार्यालय पुलिस महानिरीक्षक, कलेक्टर, पुलिस अधीक्षक, अतिरिक्त जिला दण्डाधिकारी, अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक, उप पुलिस अधीक्षक (शहर/ग्रामीण), मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी कार्यालय एवं उनके अधीनस्थ समस्त कार्यालय, अनुविभागीय दण्डाधिकारी, तहसील, थाना एवं पुलिस चौकी पर लागू नही होगा। इसके अतिरिक्त कानून व्यवस्था एवं स्वास्थ्य सेवा से संबंधित पदाधिकारी एवं कर्मी, बिजली, पेयजल आपूर्ति एवं नगरपालिका सेवायें जिसमें सफाई, सीवरेज एवं कचरे का डिस्पोजल इत्यादि भी शामिल है तथा अग्निशमन सेवाएं प्रदान करने वाले शासकीय कार्यालयों में उपरोक्त अवधि में आम जनता का प्रवेश प्रतिबंधित रहेगा। उपर्युक्त बिन्दुओं को छोड़कर जिले में समस्त गतिविधियाँ पूर्णतः प्रतिबंधित रहेगी। इस आदेश का उल्लंघन करने वाले व्यक्ति अथवा प्रतिष्ठानों पर भारतीय दण्ड संहिता 1860 की धारा 188 तथा अन्य सुसंगत विधि अनुसार कड़ी कार्यवाही की जाएगी।
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Monday, September 14, 2020

क्या हुआ तेरा वादा ........... चुनावी सरकार का अनियमित कर्मचारीयों से नाता @नियमितीकरण

September 14, 2020 2
छत्तीसगढ़ के युवाओं में 1,80,000 कर्मचारी-अधिकारी विभिन्न विभागों के केंद्र एवं राज्य प्रवर्तित योजनाओं में विगत 17 वर्षों से अनियमित कर्मचारी (संविदा/ठेका) होने का दंश झेल रहे हैं, प्रत्येक कर्मी न्यूनतम 15 से 20 रिश्तेदार के वोटों को प्रभावित कर सकते हैं, जिससे विधानसभा निर्वाचन 2018 को लगभग 18 से 20 लाख वोटर प्रभावित हो हुए , जिसका सीधा प्रभाव छत्तीसगढ़ सरकार बनाने में महत्वपूर्ण साबित हुआ था ।


ज्ञातव्य हो, कि छत्तीसगढ़ सरकार ने लगभग 5-6 वर्षों पूर्व ही 8 वर्ष की सेवा अवधी को पूर्ण करने वाले शिक्षाकर्मियों को नियमित भी किया गया है और कुछ माह पूर्व ही उन्हें राज्य सरकार के कर्मचारी मानते हुए स्कूल शिक्षा विभाग में संविलियन भी किया, इसी के साथ ही मातृराज्य मध्यप्रदेश के संविदा कर्मचारियों को भी नियमित किया गया, इस विषय से माननीय प्रधानमंत्री महोदय को भी निरंतर अवगत कराया गया, किन्तु छत्तीसगढ़ के स्थाई निवासी होने के बावजूद भी आधी नौकरी- आधे वेतन से नाराज अनियमित कर्मियों ने विगत कई वर्षों से मौजूदा सरकार से नियमितीकरण की मांगों के लिए धरना, प्रदर्शन, आन्दोलन और शासन से पत्राचार निरंतर कई वर्षो से करने के बावजूद मौजूदा सरकार की अनदेखी और नजरअंदाज किये जाने से अनियमित कर्मचारियों में काफी रोष व्याप्त रहा था ।

सरकार बदलने से अपनी मांगों के सम्बन्ध में वर्तमान सरकार से अनियमित कर्मचारी संगठन काफी आशान्वित थी, किन्तु सरकार द्वारा कोई भी पहल नहीं होने से काफी आक्रोशित रहे हैं.

अपना विरोध प्रदर्शन हेतु “मेरा वोट उसको, जो नियमितीकरण करे मुझको” से सभी अनियमित कर्मचारी अपने नियमितीकरण की मांग को प्रबल बनाने परिवार और रिश्तेदारों को सम्पर्क कर ज्यादा से ज्यादा संख्या में मतदान करने हेतु प्रेरक मुहीमचला था ।

भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष श्री राहुल गाँधी जी ने प्रदेश कांग्रेस से चर्चा कर अपने संज्ञान में लिया और राष्ट्रीय स्तर पर इस मुद्दे पर अपना पक्ष रखा और इसे छत्तीसगढ़ के रोजगार और युवाओं के विकास में बाधक मानते हुए, छत्तीसगढ़ में कांग्रेस सरकार बनेगी, “नियमित किये जायेंगे सभी अनियमित कर्मचारी” का भी केन्द्रीय होर्डिंग से अनियमित कर्मचारियों में काफी उत्साह दिखा था , उत्साही युवा सुरक्षित भविष्य की कामना लिए “हमारा वोट उसको जो नियमित रोजगार दे सबको” का धेय बना चूके थे ।


अनियमित कर्मचारियों से किए वादे अनुरूप इस बज़ट में उनके लिए प्रावधान नहीं किए जाने से समस्त अनियमित कर्मचारियों में आक्रोश है।

जबकि घोषणा पत्र में किए वादे के अनुसार अनियमित कर्मचारियों को नियमित किए जाने व छटनी नहीं किए जाने का वादा किया गया था परन्तु इसके विपरीत लगातार अनियमित कर्मचरियों की छटनी जारी है ।

अनियमित कर्मचारियों की मांगों में मुख्य रूप से नियमितीकारण किए जाने की मांग है पर अनियमित कर्मचारियों की मांगों से सरकार उदासीन नजऱ आ रही है। जबकि मुख्यमंत्री द्वारा वर्ष 2019 में कहा गया था कि यह वर्ष किसानों का,अगला वर्ष कर्मचारियों के लिए होगा। परन्तु अनियमित कर्मचारियों के किए कुछ ना देकर यह उन्हें ठेंगा दिखा दिया।अनियमित कर्मचारियों के लिए कुछ प्रावधान नहीं किए जाने से क्षुब्ध अनियमित कर्मचारियों के पास एक मात्र विकल्प आन्दोलन ही है।

जनघोषणा पत्र में सरकार बनने के 10 दिन के अंदर नौकरी, नियमितिकरण, और बेरोजगारी भत्ता देने का वादा किया था,लेकिन पिछले 18 महीने से सिर्फ़ खोखली घोषणाओं करने के अलावा कुछ नहीं किया है। जब कोरोना काल में सरकार प्रदेश भर में शराब की होम डिलीवरी और निगम मंडल अध्यक्षों की नियुक्ति कर सकती है, तो नौकरी नियमितिकरण और भत्ता क्यों नहीं दे सकती? क्या सरकार की नजर में अब प्रदेश के युवा केवल गोबर बीनने लायक ही बचे हैं?



उपरोक्त वादा खिलाफी अनियमित कर्मचारियों  गुनगुनाने का मन बनाया है ....

क्या हुआ तेरा वादा ...........वो कसम ............

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Thursday, September 10, 2020

भाटापारा के नए तहसीलदार मयंक अग्रवाल!!!

September 10, 2020 1
भाटापारा-10 सितंबर को जिले के विभिन्न तहसील व उपतहसील में पदासीन अफसरों का तबादला का आदेश जारी किया गया है । जिसमे आदेशनुसार भाटापारा के नए तहसीलदार अब मयंक अग्रवाल होंगे। जानकारी के अनुसार भाटापारा में मयंक अग्रवाल पहले भी नायाब तहसीलदार के रूप में कर चुके है काम।।
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Saturday, August 15, 2020

तीजा पोरा में महिलाओं के आने जाने संबंधित अफवाह पर जिलाधीश बलौदाबाजार भाटापारा द्वारा मिला दिशा निर्देश

August 15, 2020 1
कार्यालय कलेक्टर बलौदाबाजार भाटापारा (छः ग)
हाल में हो रहे अफवाह को खारिज करते हुए सरपंच/पंच/ग्रामीणों को निर्देश सभी अपने स्तर में लोकडौन का पालन करे पर तीजा-पोरा छत्तीसगढ़ के पारंपरिक त्योहार मनाने से रोकने महिलाओं के आने जाने पर ग्राम द्वारा किये कार्यवाही पर रोक हेतु ग्रामीण छेत्रों पर गलत पर प्रचार सरकारी दफ्तर के नाम पर अफवाह फैलाना गलत है अगर कोई ग्रामीण/महिला अपने निकटतम तहसीलदार/तहसील कार्यालय में ग्राम के अफवाह पर संज्ञान दे सकते है जिस पर अफवाह फैलाने के जुर्म में  सरपंच/पंच/प्रमुख/कोतवाल पर कार्यवाही की जा रही है 

(1)अपने ग्राम स्तर पर लोकडाउन कर सकते है
(2)पर लोकडाउन महिलाओं के लिए नही सभी के लिए हो 
(3)बाहरी आगन्तुक-सब्जी वाला ,वस्त्र, दूध,ओर अन्य सामान बेचने वाले पर भी प्रतिबंध लगा सकते हैं
(4) इस प्रकार के लोकडाउन में ग्राम से कोई व्यक्ति बाहर नही जाना चाहिए न आय काम के लिए ही क्यों न हो नियम सब पर लागू हो केवल महिलाओं पर नही

(यह सब निम्न 1से4 तक कार्यवाही अपने ग्राम स्तर पर कर सकते है)

किसी भी ग्रामीण/महिलाओं को कोई त्योहार मनाने से कोई रोका नही जा सकता वे अपने घर वालो के मर्जी से अपने गृह ग्राम आ जा सकते है छत्तीसगढ़ शासन से कोई ऐसा आदेश नही मिला है जिसे लागू कर सके सरपंच/ पंच/कोतवाल/प्रमुख और उस पर लोकडौन का बहाना कर उस पर अलग रहने का दबाव डाले तो समस्त सरपंच पंच पर कार्यवाही कलेक्टर/तहसीलदार/थाना प्रभारी द्वारा पूर्ण कारवाही की जाएंगी-

कार्यलय कलेक्टर  एवं जिला निर्वाचन अधिकारी जिला बलौदा बाजार भाटापारा(छः ग)
Sunil kumar jain{collector}
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Thursday, July 9, 2020

शराब की अवैध बिक्री पर रोक लगाने चलेगा अभियान, मंत्री लखमा ने सीमावर्ती इलाकों में विशेष निगरानी के दिए निर्देश

July 09, 2020 1



रायपुर, 9 जुलाई 2020- वाणिज्यिक कर (आबकारी) विभाग मंत्री कवासी लखमा ने वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से आबकारी विभाग के कामकाज की गहन समीक्षा की। उन्होंने विभाग के अधिकारियों को मदिरा के अवैध विक्रय पर कड़ाई से रोक लगाने के साथ ही सीमावर्ती इलाकों में सघन जांच पड़ताल का अभियान संचालित करने के निर्देश दिए। 


मंत्री लखमा ने गौरेला-पेन्ड्रा-मरवाही में आबकारी विभाग का कार्यालय शुरू करने के निर्देश अधिकारियों को दिए। मंत्री श्री लखमा ने इस दौरान जिला स्तरीय अधिकारियों से मदिरा के विक्रय, आबकारी आय, आबकारी अपराधों के नियंत्रण आदि के बारे में भी जानकारी ली। उन्होंने अधिकारियों को अपने-अपने जिलों में मदिरा के अवैध विक्रय की रोकथाम के लिए भी कड़ी कार्रवाई के निर्देश दिए।



आबकारी आयुक्त ने अधिकारियों को आबकारी राजस्व वृद्धि के निर्देश दिये गये। 


प्रदेश में अधिक दर पर मदिरा के विक्रय की प्राप्त हो रही शिकायतों की समीक्षा की गई एवं अधिक दर पर मदिरा के विक्रय पर कड़ाई से नियंत्रण लगाए जाने के निर्देश समस्त संभागीय उपायुक्तों एवं जिला आबकारी अधिकारियों को दिए गए। आबकारी आयुक्त ने जिलों से संबद्ध मैनपावर एजंेसी द्वारा नियोजित कर्मचारियांे की गतिविधियों पर भी निगाह रखने तथा किसी भी तरह की गड़बड़ी पाए जाने पर उन्हें तत्काल हटाने की कार्यवाही के निर्देश भी छत्तीसगढ़ स्टेट मार्केटिंग कार्पोरेशन लिमिटेड के अधिकारियों को निर्देश दिए गये। आबकारी आयुक्त द्वारा प्रदेश की समस्त विदेशी मदिरा दुकानांे में उपभोक्ताआंे की पसंद के अनरूप लोकप्रिय ब्रांड की मदिरा की उपलब्धता सुनिश्चित कराने के निर्देश दिए गए। बैठक के दौरान होम डिलेवरी की व्यवस्था की भी समीक्षा की गई तथा उसमें आवश्यक सुधार के निर्देश दिए गए। प्रदेश की सीमावर्ती जिलों की आबकारी जाँच चौकी को भी मदिरा के अवैध क्रय-विक्रय पर कड़ाई से रोक लगाने के निर्देश दिए गए। परिवहन विभाग द्वारा प्रारम्भ की गई 16 परिवहन जाँच चौकियों पर आबकारी विभाग के चेक-पोस्ट की स्थापना करने के निर्देश भी दिये गये।



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Friday, July 3, 2020

सांसद का PSO सहित 8 कोरोना पॉजेटिव : छत्तीसगढ़ के इस सांसद का PSO निकला कोरोना पॉजेटिव….3 दिन पहले टेस्ट कराने के बाद आज भी आया था ड्यूटी पर…..सांसद का हो रहा कोरोना टेस्ट

July 03, 2020 0












छत्तीसगढ़ में आज सुबह 8 नये कोरोना मरीज मिले हैं। इन आठ कोरोना पॉजेटिव में 7 की रिपोर्ट एम्स से आयी है, जबकि 1 की पॉजेटिव रिपोर्ट SLR लैब से मिली है। जिन 8 लोगों की रिपोर्ट पॉजेटिव मिली है, उनमें से 5 अकेले राजधानी रायपुर से हैं।






रायपुर सांसद सुनील सोनी के PSO की कोरोना रिपोर्ट पॉजेटिव आयी



खास बात ये है कि रायपुर सांसद सुनील सोनी के PSO की कोरोना रिपोर्ट पॉजेटिव आयी है। इस खबर के बाद अब सियासी गलियारों में हड़कंप मच गया है। दरअसल पीएसओ ने तीन दिन पहले ही कोरोना का टेस्ट एम्स में कराया था। लेकिन इसकी जानकारी सांसद सुनील सोनी तक को नहीं दी।

सुनील सोनी ने इसकी पुष्टि की है। दरअसल तीन दिन पहले कोरोना टेस्ट कराने के बावजूद भी लगातार ड्यूटी आया था। वो लगातार सांसद सुनील सोनी के संपर्क में रहा है, लिहाजा सांसद सुनील सोनी खुद का कोरोना टेस्ट करा रहे हैं। वहीं उनके कार्यालय के स्टाफ का भी कोरोना टेस्ट कराया जायेगा। दरअसल पीएसओ ने टेस्ट कराने के बाद इसकी जानकारी किसी को नहीं दी, लिहाजा ना सिर्फ वो सांसद के साथ घूमता रहा, बल्कि कई लोगों से मुलाकात की। कल ड्यूटी नहीं होने के बावजूद वो बंगले में आया था और कार्यालय में काफी देर तक बैठा था।

सांसद सुनील सोनी को आज सड़क सुरक्षा सप्ताह की बैठक लेनी थी, लेकिन पीएसओ के कोरोना पॉजेटिव आने के बाद सांसद ने अपनी बैठक को तत्काल स्थगित किया है। सांसद के PSO के अलावे 4 एम्स के स्टाफ की रिपोर्ट भी पॉजेटिव आयी है। वहीं तीन अन्य मरीज रायपुर से बाहर के हैं। स्वास्थ्य विभाग अब पॉजेटिव आये लोगों के कांटेक्ट लिस्ट को खंगाल रहा है, ताकि उन्हें क्वारंटीन किया जा सके।
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Thursday, June 18, 2020

प्रदेश भर में मत्स्य आखेट पर 15 अगस्त तक प्रतिबंध तालाब , जलाशय और कुओं से नहीं निकाल सकेंगे मछलियां

June 18, 2020 3
 
मत्स्य आखेट पर 15 अगस्त तक प्रतिबंध
तालाब , जलाशय और कुओं से नहीं निकाल सकेंगे मछलियां
रायपुर- मछलियों का प्रजनन काल अब चालू हो चुका है। इसे देखते हुए आगामी 2 माह तक मछली मारने पर प्रतिबंध लगा दिया गया है। यह काम आप 16 अगस्त से ही किया जा सकेगा। 
संचालक मछली पालन ने सभी जिलों के उपसंचालक और सहायक संचालकों को उक्त आशय का आदेश जारी करते हुए परिपालन के निर्देश दिए हैं।

वित्तीय वर्ष 2020- 21 के लिए संचालनालय मछली पालन ने वर्षा ऋतु को ध्यान में रखते हुए इस काल को मछलियों की वंश वृद्धि के लिए अनिवार्य मानते हुए तालाबों और जलाशयों में मछली मारने और पकड़ने पर प्रतिबंध लगा दिया है।
 प्रतिबंध का आदेश 16 जून से प्रभावी माना जाएगा। यह आदेश 16 अगस्त तक जारी रहेगा। 
संचालनालय ने जिलों में काम कर रहे उपसंचालक तथा सहायक संचालकों के साथ मछली पालन का प्रशिक्षण और अनुसंधान केंद्र को भी यह आदेश जारी किया है।

वर्षा काल को मछलियों के लिए प्राकृतिक रूप से प्रजनन काल के रूप में जाना जाता है। 
जून मध्य से अगस्त मध्य के बीच मछलियां अपने वंश को बढ़ाती है। 

इस अवधि को सुरक्षित बनाने के लिए हर साल इस अवधि में मत्स्य आखेट पर प्रतिबंध लगाया जाता है। इसके अलावा मछलियों की कुछ ऐसी भी प्रजातियां हैं जिनको इस काल में जलाशय नदियों में केज कल्चर के माध्यम से संख्या बढ़ाने के लिए डाला जाता है। ऐसे में यदि मछली पकड़ने पर प्रतिबंध नहीं लगाया गया तो स्वाभाविक रूप से यह जलचर प्राणी अपनी वंश वृद्धि नहीं कर सकेगा।
इन जगहों पर प्रतिबंध
संचालनालय ने मछली पकड़ने और मारने पर प्रतिबंध के लिए जो आदेश जारी किया है उसमें स्पष्ट किया गया है कि मछलियों का प्रजनन काल होने की वजह से संरक्षण स्वाभाविक प्रक्रिया है इसलिए 16 जून से 15 अगस्त की अवधि के दौरान तालाबों और जलाशयों में मछली पकड़ने और मारने पर तत्काल प्रभाव से प्रतिबंध लगाया जाता है। अलबत्ता वे नदी नाले इस प्रतिबंध से मुक्त रहेंगे जहां केज कल्चर के जरिए वंश वृद्धि नहीं की जा रही है। 
प्रतिबंध के 2 माह की अवधि के बीच यदि किसी ने नियम का उल्लंघन किया तो उसके खिलाफ नियमानुसार कार्यवाही की जाएगी। 
आदेश मछली पालन संचालनालय से जारी किया गया है।
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Tuesday, April 21, 2020

मई के महीने से किसानो को मिलेगा न्याय !! छत्तीसगढ़ भूपेश सरकार का बड़ा फैसला: धान के समर्थन मूल्य के अंतर की राशि का किया जाएगा भुगतान

April 21, 2020 3
 भूपेश सरकार का बड़ा फैसला: छत्तीसगढ़ में किसानों को मई माह से धान के समर्थन मूल्य के अंतर की राशि का किया जाएगा भुगतान

छत्तीसगढ़ सरकार ने किसानों के हित में बड़ा फैसला किया है। भूपेश सरकार ने तय किया है कि किसानों को मई माह से धान के समर्थन मूल्य के अंतर की राशि का भुगतान किया जाएगा।

राजीव गांधी किसान न्याय योजना के तहत किसानों को अंतर की राशि वितरित की जाएगी। कृषि मंत्री रविंद्र चौबे ने वीडियो कॉफ्रेंसिंग के माध्यम से ये महत्वपूर्ण जानकारी दी है।

कृषि मंत्री रविंद्र चौबे ने जानकारी देते हुए कहा कि किसानों के खाते में बीमा राशि के रूप में 565 करोड़ रुपए पहुंचाई गई है। ओलावृष्टि से प्रभावित किसानों को 50 करोड़ की राशि दी गई है। मंत्री चौबे ने कहा कि खरीफ फसल नुकसान की बीमा राशि 70 करोड़ का भुगतान किया जाएगा। 52 सौ करोड़ रुपए के शार्ट टर्म लोन की तैयारी की गई है।


राजीव गांधी किसान न्याय योजना

राजीव गांधी किसान न्याय योजना को शुरू करने की घोषणा छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री भूपेश बघेल व वित्त मंत्री द्वारा विधानसभा में वर्ष 2020 -21 का बजट पेश करते हुए की है । इस योजना के अंतर्गत राज्य के किसानो को उनकी धान की फसल पर लाभ पहुंचाया जायेगा । इस योजना के तहत छत्तीसगढ़ के किसानो को धान के समर्थन मूल्य के अंतर की राशि का फायदा मुहैया कराई (The farmers of Chhattisgarh will be given the benefit of the difference of the support price of paddy ) जाएगी ।

बजट 2020 -21 की नयी घोषणा

राहुल गांधी ने लोकसभा चुनाव से पहले इस Rajiv Gandhi Kisan Nyay Yojana का जिक्र किया था। जो जल्द ही छत्तीसगढ़ राज्य के में लागू की जायगी इसके अलावा भी बजट भाषण में कई घोषणा कि गई जिसमे किसान मजदुर रोजगार और शिक्षा को लेकर घोषणा हुई छत्तीसगढ़ का बजट पेश करते हुए मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने कहा कि हमने 17 लाख किसानों का कर्ज माफ किया है। प्रदेश में गरीबी के स्तर में कमी आई है। प्रदेश की जीडीपी में सात फीसदी से अधिक की बढ़ोत्तरी होने का अनुमान है । राज्य सरकार का कहना है की इसी तरह कई प्रकार की योजनाए छत्तीसगढ़ के किसानो के हम शुरू करते रहेंगे और राज्य के किसानो को लाभ पहुंचाते रहेंगे ।

राजीव गांधी किसान न्याय योजना का लाभ


  • इस योजना के ज़रिये देश के किसानो को धान के अंतर की राशि का फायदा पहुँचाना ।
  • छत्तीसगढ़ किसान न्याय योजना के ज़रिये छत्तीसगढ़ के किसानो की आय में भी बढ़ोतरी होगी ।
  • राज्य के किसान अपनी धान की अच्छी खेती कर सकते है ।
  • इस Rajiv Gandhi Kisan Nyay Yojana का लाभ केवल छत्तीसगढ़ के किसान उठा सकते है ।
  • यह योजना केवल  छत्तीसगढ़ राज्य के केवल धान की खेती करने वाले किसान ही है ।
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Sunday, April 19, 2020

साधारण से गांव को चक्रवाय धाम बनाने वाले सतनामी समाज के सपूत पूर्व मंत्री डेरहु प्रसाद घृतलहरे का निधन

April 19, 2020 1
छत्तीसगढ़ सतनामी समाज के सपूत ,गुरु घासीदास बाबाजी के सन्देश को जन जन तक पहुंचाने के लिए कार्य किये.....गुरु घासीदास बाबाजी के सच्चे अनुयायी.....पूर्व मंत्री डीपी धृतलहरे का आज निधन हो गया है।

छत्तीसगढ़ के प्रथम मुख्यमंत्री अजीत जोगी के शासनकाल में वन मंत्री थे डीपी धृतलहरे। 28 जून 1949 को जन्मे डेरहू प्रसाद धृतलहरे नवागढ़ के रहने वाले थे। रविवार को रायपुर के एक निजी अस्पताल में उनका निधन हुआ है। अनुसूचित जाति सीट मारो से विधायक चुने गए थे। आदरणीय डेरहू प्रसाद धृतलहरे साधारण से गांव को चक्रवाय धाम बनाने में योगदान अविस्मरनीय हैडी.पी. धृतलहरे अविभाजित मध्यप्रदेश और छत्तीसगढ़ सरकार में मंत्री रहें है। वे चार बार मारो (नवागढ) विधानसभा से विधायक रहे। 





ज़ब भी सतनामी राजनेताओं का नाम लिया जायेगा उसमे गुरु अगमदास, गुरु माता मिनीमाता उसके बाद D.P. घृतलहरे जी का नाम आएगा.... 


डेरहू प्रसाद धृतलहरे सतनामी समाज के ऐसे नेता थे जिन्होंने मध्यप्रदेश के दौरान निर्दलीय विधान सभा चुनाव लड़कर जीता था | डेरहु प्रसाद धृतलहरे के निधन से सतनामी समाज में शोक ब्याप्त है |

रायपुर के निजी एम एम आई अस्पताल पहुँचकर मंत्री शिव डहरिया ने मुख्यमंत्री भूपेश बघेल की तरफ़ से स्व. डेरहू प्रसाद धृतलहरे जी को श्रद्धासुमन अर्पित कर श्रद्धांजलि दी।

मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने पूर्व मंत्री श्री डी.पी.धृतलहरे के निधन पर गहरा शोक व्यक्त किया है। मुख्यमंत्री ने स्वर्गीय श्री डी.पी.धृतलहरे के शोक संतप्त परिवारजनों के प्रति संवेदना प्रकट करते हुए उनकी आत्मा की शांति के लिए ईश्वर से प्रार्थना की है। 

सीएम भूपेश ने ट्वीट कर दी श्रद्धांजलि, कहा-
मेरे साथ अविभाजित मप्र में विधायक और फिर छत्तीसगढ़ में मंत्री रहे वरिष्ठ नेता डेरहू प्रसाद धृतलहरे जी का जाना बहुत दुखद है। वे सतनामी समाज के बड़े नेता थे। उनके जाने से छत्तीसगढ़ की अपूरणीय क्षति हुई है। विनम्र श्रद्धांजलि।
मेरे साथ अविभाजित मप्र में विधायक और फिर छत्तीसगढ़ में मंत्री रहे वरिष्ठ नेता डेरहू प्रसाद धृतलहरे जी का जाना बहुत दुखद है।

वे सतनामी समाज के बड़े नेता थे। उनके जाने से छत्तीसगढ़ की अपूरणीय क्षति हुई है।

विनम्र श्रद्धांजलि।

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मप्र एवं छग शासन में मंत्री रहे वरिष्ठ नेता श्री डी. पी. धृतलहरे जी के निधन का समाचार अत्यंत दुखद है।वे सतनामी समाज के वरिष्ठ नेता थे उन्होंने हमेशा मेरा मार्गदर्शन किया।उनके अंतिम दर्शन हेतु चिकित्सालय जाकर उन्हें अपनी पीसीसी एवं राज्य शासन की ओर से विनम्र श्रद्धांजलि अर्पित की।

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Saturday, April 18, 2020

भारत मे सबसे पहले लोकडाउन में छूट देने वाला राज्य बनेगा ,छत्तीसगढ़,20 अप्रैल के छूट देने का ऐलान कुछ पाबंदियां जरूर | प्रदेश में शराब,गुटखा,तंबाखू,गुड़ाखु के लिए नियम देखे जरूर

April 18, 2020 1

छत्तीसगढ़ सरकार ने 20 अप्रैल के बाद छूट देने का ऐलान किया,जरूरी सेवाओ के साथ पाबंदियां भी,देखे किन किन सेवाओ में दी गयी छूट,शराब तंबाखू 


रायपुर। कोरोना वायरस के मद्देनजर लागू लॉकडाउन में छत्तीसगढ़ सरकार ने ढील देने का ऐलान किया है। जिसके चलते कई जरूरी सेवाओं में 20 अप्रैल से छूट मिलेगी। तो वहीं कुछ सेवाओं को 3 मई तक पांबदी लगाई गई है। सरकार ने आम लोगों से जुड़ी किन-किन सेवाओं में छूट दी है जानिए….

  • 20 अप्रैल से राज्य के भीतर और बाहर माल परिवहन को अनुमति
  • हर तरह के माल परिवहन की अनुमति दी गई है।
  • रेलवे सेवाओं में माल एवं पार्सल ट्रेनें चलेंगी।
  • ट्रक एवं दूसरे वाहन अधिकतम दो ड्राइवरों तथा एक सहायक के साथ चल सकेंगे।
  • ड्राइवरों के पास वैध लाइसेंस होना जरूरी है।
  • माल डिलिवरी के बाद खाली ट्रक को लौटने की तथा माल भरने की अनुमति रहेगी।
  • ट्रक रिपेयर गैरेज तथा राज मार्गों पर ढाबे सोशल डिस्टेंसिंग के साथ खोले जा सकेंगे।
  • इन तरह के निर्माण कार्य शुरू किए जा सकेंगे।
  • नगरीय निकायों की सीमा से बाहर ग्रामीण इलाकों से बाहर सड़क-भवन निर्माण, सिंचाई परियोजना, वाटर सप्लाई एवं स्वच्छता, सौर उर्जा और विद्युत ट्रांसमिशन लाईन, दूरसंचार के लिए ऑप्टिकल फाइबर एवं केबल डालने का काम सभी प्रकार के उद्योग सहित निर्माण परियोजनाएं शुरू होगी।
  • मनोरंजन पार्क, नाट्यशाला, बार एवं सभागार, शराब बिक्री, पान तंबाकू गुटखा बिक्री, असेंबली हाल, सभी सामाजिक, राजनीतिक, खेलकूद, मनोरंजन, सांस्कृतिक, धार्मिक एवं अन्य सामूहिक आयोजन बंद रहेंगे।
  • राज्य सरकार और अधीनस्थ कार्यालयों में काम शुरू होगा।
  • पुलिस, होमगार्ड, सिविल डिफेंस, फायर ब्रिगेड, एंबुलेंस, आपातकालीन सेवाएं, आपदा प्रबंधन एवं जेल, नगरीय निकायों की सेवाएं प्रशासन का हॉटस्पाट पर कड़ा नियंत्रण रहेगा।
  • हॉटस्पाट या ऐसे क्षेत्र या ऐसे क्लस्टर जिनमें कोरोना वायरस का संक्रमण वृहद स्तर पर फैला हो, केंद्र के निर्देशों के मुताबिक पालन होंगे। इसके मुताबिक ही कंटेन्मेंट जोन सीमांकित किए जाएंगे।
  • इनके भीतर गाइडलाइन में दिए गए निर्देशों के अतिरिक्त कोई भी छूट नहीं दी जाएगी। यहां पर लोगों की आवाजाही पर कड़ा नियंत्रण रहेगा।
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दवा कम्पनियां ब्रांडेड दवा से बड़ा मुनाफा के चक्कर में जेनेरिक दवाओं पर फैलाया है भ्रम !

April 18, 2020 1



सामान्य दवा या जेनेरिक दवा (generic drug) वह दवाहै जो बिना किसी पेटेंट के बनायी और वितरित की जाती है। जेनेरिक दवा के फॉर्मुलेशन पर पेटेंट हो सकता है किन्तु उसके सक्रिय घटक (active ingradient) पर पेटेंट नहीं होता। जैनरिक दवाईयां गुणवत्ता में किसी भी प्रकार के ब्राण्डेड दवाईयों से कम नहीं होतीं तथा ये उतनी ही असरकारक है, जितनी की ब्राण्डेड दवाईयाँ। यहाँ तक कि उनकी मात्रा (डोज), साइड-इफेक्ट, सक्रिय तत्व आदि सभी ब्रांडेड दवाओं के जैसे ही होते हैं। जैनरिक दवाईयों को बाजार में उतारने का लाईसेंस मिलने से पहले गुणवत्ता मानकों की सभी सख्त प्रक्रियाओं से गुजरना होता है।

किसी रोग विशेष की चिकित्सा के लिए तमाम शोधों के बाद एक रासायनिक तत्‍व/यौगिक विशेष दवा के रूप में देने की संस्तुति की जाती है। इस तत्‍व को अलग-अलग कम्पनियाँ अलग-अलग नामों बेचतीं है। जैनरिक दवाईयों का नाम उस औषधि में उपस्थित सक्रिय घटक के नाम के आधार पर एक विशेषज्ञ समिति द्वारा निर्धारित किया जाता है। किसी दवा का जेनेरिक नाम पूरे विश्व में एक ही होता है।

उदाहरण के लिए, उच्छ्रायी दुष्क्रिया (शिश्न को खड़ा न कर पाना / erectile dysfunction) की चिकित्सा के लिए सिल्डेन्फिल (sildenafil) नाम की जेनेरिक दवा है। यही दवा फिजर (Pfizer) नामक कम्पनी वियाग्रा (Viagra) नाम से बेचती है।

अधिकांश बड़े शहरों में जेनेरिक मेडिकल स्टोर होते हैं जहाँ केवल जेनेरिक दवाएँ ही मिलतीं हैं। किन्तु इनका व्यापक प्रचार नहीं होने से लोगों को इनका लाभ नहीं मिलता।

किसी भी बीमारी के लिए डॉक्टर जो दवा लिखता है, ठीक उसी दवा के सॉल्ट वाली जेनेरिक दवाएं उससे काफी कम कीमत पर आपको मिल सकती हैं। कीमत का यह अंतर पांच से दस गुना तक हो सकता है। बात सिर्फ आपके जागरूक होने की है। बहुत कम लोगों को मालूम होगा कि देश में लगभग सभी नामी दवा कम्पनियां ब्रांडेड के साथ-साथ कम कीमत वाली जेनेरिक दवाएं भी बनाती हैं लेकिन ज्यादा लाभ के चक्कर में डॉक्टर और कंपनियां लोगों को इस बारे में कुछ बताते नहीं हैं और जानकारी के अभाव में गरीब भी केमिस्ट से महंगी दवाएं खरीदने को विवश हैं।

गौरतलब है कि किसी एक बीमारी के लिए तमाम शोधों के बाद एक रासायनिक यौगिक को विशेष दवा के रूप में देने की संस्तुति की जाती है। इस यौगिक को अलग-अलग कम्पनियां अलग-अलग नामों से बेचती हैं। जेनेरिक दवाइयों का नाम उसमें उपस्थित सक्रिय यौगिक के नाम के आधार पर एक विशेषज्ञ समिति निर्धारित करती है। किसी भी दवा का जेनेरिक नाम पूरे विश्व में एक ही होता है।

जेनेरिक दवा बिना किसी पेटेंट के बनाई और वितरित की जाती हैं यानी जेनेरिक दवा के फॉर्मुलेशन पर पेटेंट हो सकता है किन्तु उसकी सामग्री पर पेटेंट नहीं हो सकता। अंतरराष्ट्रीय मानकों से बनी जेनेरिक दवाइयों की गुणवत्ता ब्रांडेड दवाइयों से कम नहीं होती, जिनकी आपूर्ति दुनियाभर में भी की जाती है और यह भी उतना ही असर करती हैं जितना ब्रांडेड दवाएं करती हैं। उनकी डोज, साइड- इफेक्ट, सामग्री आदि सभी ब्रांडेड दवाओं के एकदम समान होती हैं। उदाहरण के लिए पुरुषों में इरेक्टाइल डिस्फंक्शन के इलाज के लिए सिल्डेन्फिल नाम की जेनेरिक दवा होती है जिसे फाइजर कम्पनी वियाग्रा नाम से बेचती है।

जेनेरिक दवाइयों को भी बाजार में लाने का लाइसेंस मिलने से पहले गुणवत्ता मानकों की सभी सख्त प्रक्रियाओं से गुजरना होता है। इन दवाओं के प्रचार-प्रसार पर कंपनियां कुछ खर्च नहीं करती। जेनेरिक दवाओं के मूल्य निर्धारण पर सरकारी अंकुश होता है, इसलिए वे सस्ती होती हैं, जबकि पेटेंट दवाओं की कीमत कंपनियां खुद तय करती हैं, इसलिए वे महंगी होती हैं। विश्व स्वास्थ्य संगठन का कहना है कि यदि डॉक्टर मरीज को जेनेरिक दवाइयों की सलाह देने लगें तो केवल धनी देशों में चिकित्सा व्यय पर 70 प्रतिशत तक कमी आ जायेगी तथा गरीब देशों के चिकित्सा व्यय में यह कमी और भी ज्यादा होगी।

कई बार तो ब्रांडेड और जेनेरिक दवाओं की कीमतों में नब्बे प्रतिशत तक का फर्क होता है। जैसे यदि ब्रांडेड दवाई की 14 गोलियों का एक पत्ता 786 रुपये का है, तो एक गोली की कीमत करीब 55 रुपये हुई। इसी सॉल्ट की जेनेरिक दवा की 10 गोलियों का पत्ता सिर्फ 59 रुपये में ही उपलब्ध है, यानी इसकी एक गोली करीब 6 रुपये में ही पड़ेगी। खास बात यह है कि किडनी, यूरिन, बर्न, दिल संबंधी रोग, न्यूरोलोजी, डायबिटीज जैसी बीमारियों में तो ब्रांडेड व जेनेरिक दवा की कीमत में बहुत ही ज्यादा अंतर देखने को मिलता है।

दवा कम्पनियां ब्रांडेड दवा से बड़ा मुनाफा कमाती हैं। दवाओं की कंपनियां अपने मेडिकल रिप्रजेंटेटिव्ज के जरिए डॉक्टरों को अपनी ब्रांडेड दवा लिखने के लिए खासे लाभ देती हैं। इसी आधार पर डॉक्टरों के नजदीकी मेडिकल स्टोर को दवा की आपूर्ति होती है। यही वजह है कि ब्रांडेड दवाओं का कारोबार दिन प्रति दिन बढ़ता जा रहा है। यही वजह है कि डॉक्टर जेनेरिक दवा लिखते ही नहीं हैं। जानकारी होने पर कोई व्यक्ति अगर केमिस्ट की दुकान से जेनेरिक दवा मांग भी ले तो दवा विक्रेता इनकी उपलब्धता से इंकार कर देते हैं।

देश के ज्यादातर बड़े शहरों में एक्सक्लुसिव जेनेरिक मेडिकल स्टोर होते हैं, लेकिन इनका व्यापक प्रचार नहीं होने से लोगों को इनका फायदा नहीं मिलता आजकल हर प्रकार की जानकारी इंटरनेट के जरिये आसानी से हासिल की जा सकती है। ब्रांडेड और जेनेरिक दवाओं की कीमत में अंतर का पता लगाने के लिए एक मोबाइल एप 'समाधान और हैल्थकार्ट भी बाजार में उपलब्ध है। दरकार है कि आज लोग जेनेरिक दवाओं के बारे में जानें और खासतौर पर गरीबों को इस ओर जागरूक करें ताकि वे दवा कंपनियों के मकडज़ाल में न फंसें।
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