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Saturday, May 29, 2021

यास ने थामा था नौतपा का ताप, अब संभल जाएं आप ! नौतपा में सूर्य की किरणें बरपा रही कहर, गर्मी के मारे सड़कें हुई सूनसान




नौतपा में सूर्य की किरणों का कहर जारी है। सुबह से ही सूरज की किरणें प्रचंड रूख अख्तियार कर लेती है। दोपहर तक शहर की सड़कें सुनसान हो जाती है। प्रचंड़ गर्मी की वजह से लोगों का ही नहीं, अपितु जीव जंतुओं का भी हाल बेहाल है। पशु-पक्षियों को पानी न मिलने से ज्यादा परेशानी देखी जा सकती है। लेकिन यास चक्रवात ने कुछ असर कम किया था अब यास चक्रवात का असर ढीला पड़ने के बाद मौसम खुल चूका है, जिले में चक्रवात का कुछ खास असर देखने को नहीं मिला , लेकिन अब पारा चढ़ सकता है।
नौतपा 25 मई से 3 जून तक रहेगा। इस दौरान ज्येष्ठ महीने के शुरुआती दिन रहेंगे।

यास चक्रवात का असर ढीला पड़ते ही सूर्य के तेवर अचानक तेज हो गए। हालांकि तपने से पहले ही शुक्रवार को आसमान में बादल घिर आए। इसके कारण गर्मी का उतना असर नहीं हुआ। उमस ने लोगों हलकान किया। वहीं यास का असर भी अब समाप्ति की ओर है, जिससे पारा चढ़ने के आसार हैं और ऐसे में गर्मी बढ़ने पर सावधानी जरूरी रहेगी।

मौसम विज्ञान केंद्र बहतराई के विज्ञानी डा.एके दास के मुताबिक एक उत्तर-पश्चिम द्रोणिका राजस्थान से उत्तर-पूर्वी राजस्थान होते हुए उत्तर-पूर्वी मध्य प्रदेश की ओर समुद्र तल से 0.9 किमी उंचाई पर है। बिहार और उससे सटे पूर्वी उत्तर प्रदेश के ऊपर सुनिश्चित निम्न दबाव का क्षेत्र अब पूर्वी उत्तर प्रदेश और उससे सटे बिहार के पूर्वी हिस्सों पर स्थित है और इसके साथ चक्रीय चक्रवाती घेरा 7.6 किमी तक विस्तारित है।

अगले 12 घंटों के दौरान सिस्टम के उत्तर-पश्चिम की ओर बढ़ने और कमजोर होकर कम दबाव के क्षेत्र में परिवर्तित होने की संभावना है। प्रदेश के सरगुजा संभाग और उससे लगे जिलों में हल्की से मध्यम वर्षा होने की संभावना है। प्रदेश के उत्तरी और दक्षिणी भाग में गरज चमक के साथ अंधड़ चलने और आकाशीय बिजली गिरने की संभावना है। फिलहाल भाटापारा में मौसम शुष्क है।

तापमान में 4-6 डिग्री की वृद्धि

भाटापारा में 24 घंटे के भीतर तापमान में 4-6 डिग्री सेल्सियस की वृद्धि दर्ज की गई है। एक दिन पहले पारा 36.0 डिग्री था। दरअसल इसका प्रमुख कारण यास चक्रवात का असर कमजोर पड़ने के बाद आसमान साफ होना है। तापमान में वृद्धि तो हुई लेकिन आसमान में दोपहर बाद फिर से बादल छा गए। इसके कारण सूर्य की तपिश से राहत मिली।
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