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शिवनाथ नदी के बीचों-बीच पर्यटन की अनूठी जगह मदकू द्वीप दो धर्म और आस्था का संगम स्थल

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परम प्रेम की परिणिति काम-क्रीडा को परिलक्षित करती छत्तीसगढ का खजुराहो भोरमदेव मंदिर।

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शिवरीनारायण का मंदिर माता शबरी का आश्रम छत्तीसगढ़-इतिहास के पन्नो में

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प्रेम का लाल प्रतीक लक्ष्मण मंदिर...........

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ताला की विलक्षण प्रतिमा-देवरानी जेठानी मंदिर

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क्या है नया कृषक बिल ? क्यों हो रहा है विरोध ? समझे आसान भाषा व संक्षिप्त में |



New Farm Bill: राज्यसभा में हंगामे के बीच कृषि से संबंधित दो विवादित बिलों को मंजूरी दे दी गई. जिसके बाद देश के कई किसान संगठन और राजनीतिक दल विरोध में सड़कों पर उतर आए. मोदी सरकार जहां इन विधेयकों (New Farm Bill) को किसानों को सशक्त बनाने का माध्यम बता रही है तो वहीं विपक्ष और लाखों की संख्या में किसान यह मानकर विरोध कर रहे हैं कि इस विधेयक के बाद किसान कॉरपोरेट घरानों के आगे मजबूर हो जाएंगे. वहीं कुछ किसान ऐसे भी जो इस पूरे मामले के राजनीतिकरण से कंफ्यूज हैं, उनकी मांग है कि सरकार आगे आए और किसानों की आशंकाओं को दूर करे और बताए कि किसानों को इस बिल से क्या फायदा.
क्या है बिल और क्यों हो रहा है विरोध:

कृषि संबंधी दो विधेयको को राज्यसभा में मंजूरी दे दी गई है, इस पर राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद के हस्ताक्षर होने के साथ ही यह कानून का रूप ले लेगा. जिन विधेयरों को मंजूरी मिली है उसमें कृषि उपज व्यापार और वाणिज्य (संवर्द्धन और सुविधा) विधेयक-2020 और कृषक (सशक्तीकरण एवं संरक्षण) कीमत आश्वासन समझौता और कृषि सेवा पर करार विधेयक-2020 शामिल है.

किसानों को इस बिल से क्या फायदा:-

  • कृषि उपज व्यापार एवं वाणिज्य (संवर्धन एवं सरलीकरण) विधेयक 2020 के तहत किसान या फिर व्यापारी अपनी उपज को मंडी के बाहर भी अन्य माध्यम से आसानी से व्यापार कर सकेंगे.


  • इस बिल के अनुसार राज्य की सीमा के अंदर या फिर राज्य से बाहर, देश के किसी भी हिस्से पर किसान अपनी उपज का व्यापार कर सकेंगे. इसके लिए व्यवस्थाएं की जाएंगी. मंडियों के अलावा व्यापार क्षेत्र में फार्मगेट, वेयर हाउस, कोल्डस्टोरेज, प्रोसेसिंग यूनिटों पर भी बिजनेस करने की आजादी होगी. बिचौलिये दूर हों इसके लिए किसानों से प्रोसेसर्स, निर्यातकों, संगठित रिटेलरों का सीधा संबंध स्थापित किया जाएगा.


  • भारत में छोटे किसानों की संख्या ज्यादा है, करीब 85 फीसदी किसानों के पास दो हेक्टेयर से कम जमीन है, ऐसे में उन्हें बड़े खरीददारों से बात करने में परेशानी आती थी. इसके लिए वह या तो बड़े किसान या फिर बिचौलियों पर निर्भर होते थे. फसल के सही दाम, सही वक्त पर मिलना संभव नहीं होता था. इन विधेयकों के बाद वह आसानी से अपना व्यापार कर सकेंगे.


  • कृषक (सशक्तिकरण व संरक्षण) कीमत आश्वासन और कृषि सेवा पर करार विधेयक किसानों को व्यापारियों, कंपनियों, प्रसंस्करण इकाइयों, निर्यातकों से सीधे जोड़ता है. यह कृषि करार के माध्यम से बुवाई से पूर्व ही किसान को उपज के दाम निर्धारित करने और बुवाई से पूर्व किसान को मूल्य का आश्वासन देता है.


  •  किसान को अनुबंध में पूर्ण स्वतंत्रता रहेगी, वह अपनी इच्छा के अनुरूप दाम तय कर उपज बेचेगा. देश में 10 हजार कृषक उत्पादक समूह निर्मित किए जा रहे हैं. ये एफपीओ छोटे किसानों को जोड़कर उनकी फसल को बाजार में उचित लाभ दिलाने की दिशा में कार्य करेंगे.

क्यों राजनीतिक दल और किसान कर रहे हैं कृषि विधेयकों का विरोध? 

  • नए बिल में न्‍यूनतम समर्थन मूल्‍य यानी MSP को नहीं हटाया गया है (पीएम नरेंद्र मोदी देकर यह बात कह चुके हैं कि एमएसपी को खत्‍म नहीं किया जा रहा है) लेकिन 'बाहर की मंडियों'को फसल की कीमत तय करने की इजाजत देने को लेकर किसान आशंकित हैं.


  • किसानों की इन चिंताओं के बीच राज्‍य सरकारों-खासकर पंजाब और हरियाणा- को इस बात का डर सता रहा है कि अगर निजी खरीदार सीधे किसानों से अनाज खरीदेंगे तो उन्‍हें मंडियों में मिलने वाले टेक्‍स का नुकसान होगा.


किसान यूनियन ने इन पर जताई आपत्ति


  • किसान यूनियन ने राज्यसभा में बिना चर्चा के पास हुए बिल को देश की संसद के इतिहास में पहली दुर्भाग्यपूर्ण घटना बताया है। उन्होंने कहा कि अन्नदाता से जुड़े तीन कृषि विधेयकों को पारित करते समय ना तो कोई चर्चा की और ना ही इस पर किसी सांसद को सवाल करने का सवाल करने का अधिकार दिया गया। टिकैत ने कहा कि यह भारत के लोकतंत्र के अध्याय में काला दिन है।

  • युनियन आगे कहता है कि अगर देश के सांसदों को सवाल पूछने का अधिकार नहीं है तो सरकार महामारी के समय में नई संसद बनाकर जनता की कमाई का 20,000 करोड़ रूपए क्यों बर्बाद कर रही है?

  • आज देश की सरकार पीछे के रास्ते से किसानों के समर्थन मूल्य का अधिकार छीनना चाहती हैं, जिससे देश का किसान बर्बाद हो जाएगा।

  • मण्डी के बाहर खरीद पर कोई शुल्क ना होने से देश की मण्डी व्यवस्था समाप्त हो जाएगी। सरकार धीरे-धीरे फसल खरीदी से हाथ खींच लेगी।

  • किसान को बाजार के हवाले छोड़कर देश की खेती को मजबूत नहीं किया जा सकता। इसके परिणाम पूर्व में भी विश्व व्यापार संगठन के रूप में मिले हैं।

यूनियन बोला- 'सरकार को करना होगा समझौता'


प्रधानमंत्री को संबोधित इस ज्ञापन में किसानों की ओर से कहा गया है कि-

1.केन्द्र सरकार द्वारा 5 जून को लागू किए गए अध्यादेशों का देश के किसान विरोध कर रहे हैं। हालांकि, केन्द्र सरकार इन अध्यादेशों को एक देश एक बाजार के रूप में कृषि सुधार की दशा में एक बड़ा कदम बता रही है। यह अध्यादेश अब कानून की शक्ल ले चुके हैं।

2.वहीं, देश के किसान कानून बन चुके इन अध्यादेशों को, यानी दोनों सदनों से पास हो चुके तीनों किसान विधेयकों को, कृषि क्षेत्र में कंपनी राज के रूप में देख रहे हैं। कुछ राज्य सरकारों ने भी इसे संघीय ढांचे का उल्लंघन मानते हुए इन्हें वापस लिए जाने की मांग की है। देश के अनेक हिस्सों में इसके विरोध में किसान आवाज उठा रहे हैं।

3.किसान जानते हैं कि इन तीनों नए कानूनों के कारण प्राइवेट कम्पनियां उनका जो हाल करेंगी वो बन्धुआ बना लिए जाने के बराबर ही होगा।

4.कृषि में कानून नियंत्रण मुक्त, विपणन, भंडारण, आयात-निर्यात, किसान हित में नहीं है। इसका खामियाजा देश के किसान विश्व व्यापार संगठन के रूप में भी भुगत रहे हैं।

5.देश में 1943-44 में बंगाल के सूखे के समय ईस्ट इण्डिया कम्पनी के अनाज भंडारण के कारण 40 लाख लोग भूख से मर गए थे।

6.समर्थन मूल्य कानून बनाने जैसे कृषि सुधारों से किसान का बिचौलियों और कंपनियों द्वारा किया जा रहा अति शोषण बन्द हो सकता है और इस कदम से किसानों के आय में वृद्धि होगी।

ये है किसानों की मागें


मांग-1 : किसान बिलों से जुड़े अध्यादेशों को तुरंत वापस लिया जाए

(अ) कृषक (सशक्तिकरण और संरक्षण) कीमत आश्वासन एवं कृषि सेवा पर करार अध्यादेश 2020 (ब) कृषक उपज व्यापार और वाणिज्य (संवर्धन और सरलीकरण) अध्यादेश 2020 (स) आवश्यक वस्तु अधिनियम संशोधन अध्यादेश 2020 कृषि और किसान विरोधी तीनों अध्यादेशों को तुरंत वापिस लिया जाए।

मांग-2: एमएसपी (MSP) पर कानून बने

न्यूनतम समर्थन मूल्य को सभी फसलों पर (फल और सब्जी) लागू करते हुए कानून बनाया जाए। समर्थन मूल्य से कम कीमत पर फसल खरीदने को अपराध की श्रेणी में शामिल किया जाए।

मांग-3: सरकारी मंडी और फसल खरीदी का कानून बने

मण्डी के विकल्प को जिन्दा रखने के लिए आवश्यक कदम उठाए जाएं एवं फसल खरीद की गारंटी के लिए कानून बनाया जाए। कानून में ये स्पष्ट हो कि प्राइवेट मंडियों की अधिकता हो जाने पर भी सरकारी मंडियां बंद नहीं होंगी बल्कि प्रतिस्पर्धा की भावना से किसानों के हित में काम करती रहेंगी।



फसलों के न्यूनतम समर्थन मूल्य का ऐलान

कृषि सुधार के विधेयकों को लेकर मचे घमासान के बीच सरकार ने फसलों के न्यूनतम समर्थन मूल्य का ऐलान कर दिया है.  किसानों की चिंता को देखते हुए एक महीने पहले ही न्यूनतम समर्थन मूल्य मंजूरी दे दी गई है. सरकार ने एमएसपी में 50 रुपये से 300 रुपये प्रति क्विंटल तक की वृद्धि की है.किसानों से उनके अनाज की खरीदी FCI व अन्य सरकारी एजेंसियां एमएसपी पर करेंगी.


कृषि मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर के अनुसार, रबी मौसम के लिए चने की एमएसपी में 225 रुपये प्रति क्विंटल की वृद्धि की गई है और यह बढ़कर 5100 रुपये प्रति क्विंटल हो गई है. मसूर का न्यूनतम समर्थन मूल्य 300 रुपये प्रति क्विंटल बढ़ाया गया है और यह 5100 रुपये प्रति क्विंटल हो गया है. उन्होंने बताया कि सरसों के एमएसपी में 225 रुपये प्रति क्विंटल की वृद्धि की गई है और यह बढ़कर 4650 रुपये प्रति क्विंटल हो गई है. जौ के न्यूनतम समर्थन मूल्य में 75 रुपये की वृद्धि के बाद यह 1600 रुपये प्रति क्विंटल और कुसुम के एमएसपी में 112 रुपये प्रति क्विंटल की वृद्धि के साथ यह 5327 रुपये प्रति क्विंटल हो गई है.


कृषि बिलों की तारीफ करते हुए 'पीएम ने कहा कि 'हमारे देश में अब तक उपज बिक्री की जो व्यवस्था चली आ रही थी, जो कानून थे, उसने किसानों के हाथ-पांव बांधे हुए थे. इन कानूनों की आड़ में देश में ऐसे ताकतवर गिरोह पैदा हो गए थे, जो किसानों की मजबूरी का फायदा उठा रहे थे.




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बलौदाबाजार-भाटापारा पूरा जिला पूरी तरह से सील , प्रदेश का पहला जिला होगा कोना-कोना सील !




बलौदाबाजार/भाटापारा- कलेक्टर एवं जिला दंडाधिकारी सुनील कुमार जैन ने दण्ड प्रकिया संहिता, 1973 की धारा 144, आपदा प्रबंधन अधिनियम, 2005 की धारा 30 एवं 34 सहपठित एपिडेमिक डिसीजेज एक्ट, 1897 यथा संशोधित 2020 द्वारा प्रदत्त शक्तियों का प्रयोग करते हुए 1973 की धारा 144 सम्पूर्ण जिले में 22 सितम्बर दिन मंगलवार रात्रि 12 बजे से 29 सितम्बर, दिन मंगलवार के रात्रि 12 बजे तक तथा बलौदाबाजार भाटापारा जिला अन्तर्गत सम्पूर्ण क्षेत्र को कंटेनमेंट जोन घोषित किया है।

जिले की सभी सीमाएं 22 से 29 सितम्बर के रात्रि 12 बजे तक पूर्णतः सील

आज जारी किए गए आदेश के अनुसार बलौदाबाजार-भाटापारा जिले की सभी सीमाएं 22 सितम्बर रात 12 बजे से 29 सितम्बर के रात 12 बजे की अवधि तक पूर्णतः सील रहेगी। इस अवधि में केवल मेडिकल दुकानों को अपने निर्धारित समय में खोलने की अनुमति होगी। मरीज एवं मेडिकल दुकान संचालक दवाओं की होम डिलीवरी व्यवस्था को प्राथमिकता दिया जाएगा। पेट्रोल पंप संचालकों द्वारा केवल शासकीय वाहनों व शासकीय कार्य में प्रयुक्त वाहन, मेडिकल इमरजेन्सी से संबंधित निजी वाहन, एम्बुलेंस तथा एल.पी.जी. परिवहन कार्य में प्रयुक्त वाहनों को ही पी.ओ.एल. प्रदान किया जाएगा। अन्य सभी वाहनों हेतु पी.ओ.एल. प्रदान करना पूर्णतः प्रतिबंधित रहेगा। दुग्ध पार्लर व वितरण की समयावधि सुबह 8 बजे से सुबह 9.30 बजे तक एवं शाम 5.30 बजे से शाम 7.00 बजे तक ही होगी। साथ ही यह स्पष्ट किया गया है कि दुग्ध व्यवसाय हेतु कोई भी दुकान या पार्लर नही खोले जायेंगे। केवल दुकान या पार्लर के सामने फिजिकल डिस्टेंसिग एवं मास्क संबंधी निर्देशों का पालन करते हुए उपरोक्त समयावधि में केवल दुग्ध विक्रय की अनुमति होगी। पैट शॉप एक्वेरियम को केवल पशुओं को पशुचारा देने हेतु सुबह 6 बजे से सुबह 8 बजे तक एवं शाम 5 बजे से शाम 6.30 बजे तक दुकान खोलने की अनुमति होगी। एल.पी.जी. गैस सिलेन्डर की एजेसिंयाँ केवल टेलीफोनिक या ऑनलाइन ऑर्डर लेंगे तथा ग्राहकों को सिलेन्डरों की घर पहुँच सेवा उपलब्ध करायेगें। औद्योगिक संस्थानों एवं निर्माण इकाईयों को अपने कैम्पस के भीतर मजदूरों को रखकर व अन्य आवश्यक व्यवस्था करते हुये उद्योगों के संचालन व निर्माण कार्यो की अनुमति होगी।







जिले के सभी शराब दुकानें रहेंगे बंद

इस अवधि के दौरान सम्पूर्ण जिले के अन्तर्गत संचालित समस्त शराब दुकाने बंद रहेगी। सभी धार्मिक, सांस्कृतिक एवं पर्यटन स्थल आम जनता के लिए पूर्णतः बंद रहेंगे।


केन्द्रीय, शासकीय, अर्द्धशासकीय एवं निजी कार्यालय भी रहेगें बंद

इस अवधि में जिले के अन्तर्गत सभी केन्द्रीय, शासकीय, अर्द्धशासकीय एवं निजी कार्यालय बंद रहेगें। सभी प्रकार की सभा, जुलुस, आयोजन आदि प्रतिबंधित रहेगें। होम आइसोलेशन में रह रहे कोविड पॉजिटिव मरीजों को भोजन की समस्या उत्पन्न होने पर कोविड केयर सेंटर आवश्यकतानुसार भेजा जाएगा। आपात स्थिति में 07727-223532 नंबर पर आवश्यकतानुसार संपर्क किया जा सकता है।



कोरोना संक्रमण रोकथाम एवं नियंत्रण के लिए गठित विभिन्न दलों में शामिल अधिकारी-कर्मचारी की उपस्थिति अनिवार्य


आदेश का उल्लंघन करने वाले पर भारतीय दण्ड संहिता के अनुसार होगी कड़ी कार्यवाही

कोविड संक्रमण के रोकथाम हेतु जिले में समस्त कार्य जैसे कांटेक्ट ट्रेसिंग, एक्टिव सर्विलांस, होम आइसोलेसन, दवाई वितरण आदि पूर्वानुसार चलते रहेगें। इन कार्य में संलग्न सभी शासकीय कर्मचारियों की उपस्थिति पूर्वानुसार अनिवार्य होगी। कोविड केयर सेंटर से डिस्चार्ज होने वाले मरीजों के परिवहन में संलग्न वाहन पूर्वानुसार संचालित रहेगें। अपरिहार्य परिस्थितियों में बलौदाबाजार भाटापारा जिले से अन्यत्र जाने वाले यात्रियों को ई-पास के माध्यम से पूर्व अनुमति लिया जाना अनिवार्य होगा। आपात स्थिति में यात्रा के दौरान 04 पहिया वाहनों में ड्राइवर सहित अधिकतम 3 एवं दो पहिया वाहन में केवल 2 व्यक्तियों को यात्रा की अनुमति होगी। इस निर्देश का उल्लंघन किए जाने पर 15 दिवस हेतु वाहन जप्त करते हुये चालानी व अन्य कानूनी कार्रवाई की जाएगी। मीडिया कर्मी यथासंभव वर्क फ्रॉम होम द्वारा कार्य संपादित करेगें। अत्यावश्यक स्थिति में कार्य हेतु बाहर निकलने पर अपना आई-कार्ड साथ रखेगें तथा फिजिकल डिस्टेंसिंग एवं मास्क संबंधी निर्देशा का कड़ाई से पालन सुनिश्चित करेंगे।
यह आदेश कार्यालय पुलिस महानिरीक्षक, कलेक्टर, पुलिस अधीक्षक, अतिरिक्त जिला दण्डाधिकारी, अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक, उप पुलिस अधीक्षक (शहर/ग्रामीण), मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी कार्यालय एवं उनके अधीनस्थ समस्त कार्यालय, अनुविभागीय दण्डाधिकारी, तहसील, थाना एवं पुलिस चौकी पर लागू नही होगा। इसके अतिरिक्त कानून व्यवस्था एवं स्वास्थ्य सेवा से संबंधित पदाधिकारी एवं कर्मी, बिजली, पेयजल आपूर्ति एवं नगरपालिका सेवायें जिसमें सफाई, सीवरेज एवं कचरे का डिस्पोजल इत्यादि भी शामिल है तथा अग्निशमन सेवाएं प्रदान करने वाले शासकीय कार्यालयों में उपरोक्त अवधि में आम जनता का प्रवेश प्रतिबंधित रहेगा। उपर्युक्त बिन्दुओं को छोड़कर जिले में समस्त गतिविधियाँ पूर्णतः प्रतिबंधित रहेगी। इस आदेश का उल्लंघन करने वाले व्यक्ति अथवा प्रतिष्ठानों पर भारतीय दण्ड संहिता 1860 की धारा 188 तथा अन्य सुसंगत विधि अनुसार कड़ी कार्यवाही की जाएगी।
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क्या हुआ तेरा वादा ........... चुनावी सरकार का अनियमित कर्मचारीयों से नाता @नियमितीकरण

छत्तीसगढ़ के युवाओं में 1,80,000 कर्मचारी-अधिकारी विभिन्न विभागों के केंद्र एवं राज्य प्रवर्तित योजनाओं में विगत 17 वर्षों से अनियमित कर्मचारी (संविदा/ठेका) होने का दंश झेल रहे हैं, प्रत्येक कर्मी न्यूनतम 15 से 20 रिश्तेदार के वोटों को प्रभावित कर सकते हैं, जिससे विधानसभा निर्वाचन 2018 को लगभग 18 से 20 लाख वोटर प्रभावित हो हुए , जिसका सीधा प्रभाव छत्तीसगढ़ सरकार बनाने में महत्वपूर्ण साबित हुआ था ।


ज्ञातव्य हो, कि छत्तीसगढ़ सरकार ने लगभग 5-6 वर्षों पूर्व ही 8 वर्ष की सेवा अवधी को पूर्ण करने वाले शिक्षाकर्मियों को नियमित भी किया गया है और कुछ माह पूर्व ही उन्हें राज्य सरकार के कर्मचारी मानते हुए स्कूल शिक्षा विभाग में संविलियन भी किया, इसी के साथ ही मातृराज्य मध्यप्रदेश के संविदा कर्मचारियों को भी नियमित किया गया, इस विषय से माननीय प्रधानमंत्री महोदय को भी निरंतर अवगत कराया गया, किन्तु छत्तीसगढ़ के स्थाई निवासी होने के बावजूद भी आधी नौकरी- आधे वेतन से नाराज अनियमित कर्मियों ने विगत कई वर्षों से मौजूदा सरकार से नियमितीकरण की मांगों के लिए धरना, प्रदर्शन, आन्दोलन और शासन से पत्राचार निरंतर कई वर्षो से करने के बावजूद मौजूदा सरकार की अनदेखी और नजरअंदाज किये जाने से अनियमित कर्मचारियों में काफी रोष व्याप्त रहा था ।

सरकार बदलने से अपनी मांगों के सम्बन्ध में वर्तमान सरकार से अनियमित कर्मचारी संगठन काफी आशान्वित थी, किन्तु सरकार द्वारा कोई भी पहल नहीं होने से काफी आक्रोशित रहे हैं.

अपना विरोध प्रदर्शन हेतु “मेरा वोट उसको, जो नियमितीकरण करे मुझको” से सभी अनियमित कर्मचारी अपने नियमितीकरण की मांग को प्रबल बनाने परिवार और रिश्तेदारों को सम्पर्क कर ज्यादा से ज्यादा संख्या में मतदान करने हेतु प्रेरक मुहीमचला था ।

भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष श्री राहुल गाँधी जी ने प्रदेश कांग्रेस से चर्चा कर अपने संज्ञान में लिया और राष्ट्रीय स्तर पर इस मुद्दे पर अपना पक्ष रखा और इसे छत्तीसगढ़ के रोजगार और युवाओं के विकास में बाधक मानते हुए, छत्तीसगढ़ में कांग्रेस सरकार बनेगी, “नियमित किये जायेंगे सभी अनियमित कर्मचारी” का भी केन्द्रीय होर्डिंग से अनियमित कर्मचारियों में काफी उत्साह दिखा था , उत्साही युवा सुरक्षित भविष्य की कामना लिए “हमारा वोट उसको जो नियमित रोजगार दे सबको” का धेय बना चूके थे ।


अनियमित कर्मचारियों से किए वादे अनुरूप इस बज़ट में उनके लिए प्रावधान नहीं किए जाने से समस्त अनियमित कर्मचारियों में आक्रोश है।

जबकि घोषणा पत्र में किए वादे के अनुसार अनियमित कर्मचारियों को नियमित किए जाने व छटनी नहीं किए जाने का वादा किया गया था परन्तु इसके विपरीत लगातार अनियमित कर्मचरियों की छटनी जारी है ।

अनियमित कर्मचारियों की मांगों में मुख्य रूप से नियमितीकारण किए जाने की मांग है पर अनियमित कर्मचारियों की मांगों से सरकार उदासीन नजऱ आ रही है। जबकि मुख्यमंत्री द्वारा वर्ष 2019 में कहा गया था कि यह वर्ष किसानों का,अगला वर्ष कर्मचारियों के लिए होगा। परन्तु अनियमित कर्मचारियों के किए कुछ ना देकर यह उन्हें ठेंगा दिखा दिया।अनियमित कर्मचारियों के लिए कुछ प्रावधान नहीं किए जाने से क्षुब्ध अनियमित कर्मचारियों के पास एक मात्र विकल्प आन्दोलन ही है।

जनघोषणा पत्र में सरकार बनने के 10 दिन के अंदर नौकरी, नियमितिकरण, और बेरोजगारी भत्ता देने का वादा किया था,लेकिन पिछले 18 महीने से सिर्फ़ खोखली घोषणाओं करने के अलावा कुछ नहीं किया है। जब कोरोना काल में सरकार प्रदेश भर में शराब की होम डिलीवरी और निगम मंडल अध्यक्षों की नियुक्ति कर सकती है, तो नौकरी नियमितिकरण और भत्ता क्यों नहीं दे सकती? क्या सरकार की नजर में अब प्रदेश के युवा केवल गोबर बीनने लायक ही बचे हैं?



उपरोक्त वादा खिलाफी अनियमित कर्मचारियों  गुनगुनाने का मन बनाया है ....

क्या हुआ तेरा वादा ...........वो कसम ............

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भाटापारा के नए तहसीलदार मयंक अग्रवाल!!!

भाटापारा-10 सितंबर को जिले के विभिन्न तहसील व उपतहसील में पदासीन अफसरों का तबादला का आदेश जारी किया गया है । जिसमे आदेशनुसार भाटापारा के नए तहसीलदार अब मयंक अग्रवाल होंगे। जानकारी के अनुसार भाटापारा में मयंक अग्रवाल पहले भी नायाब तहसीलदार के रूप में कर चुके है काम।।
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