न्यूज़, ब्लॉग , चर्चित व्यक्तिव , पर्यटन और सामाज और धर्म कर्म की खबरे देखो दुनिया लेकिन हमारे भाटापारा के नजरिये से ...........

शिवनाथ नदी के बीचों-बीच पर्यटन की अनूठी जगह मदकू द्वीप दो धर्म और आस्था का संगम स्थल

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परम प्रेम की परिणिति काम-क्रीडा को परिलक्षित करती छत्तीसगढ का खजुराहो भोरमदेव मंदिर।

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शिवरीनारायण का मंदिर माता शबरी का आश्रम छत्तीसगढ़-इतिहास के पन्नो में

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प्रेम का लाल प्रतीक लक्ष्मण मंदिर...........

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ताला की विलक्षण प्रतिमा-देवरानी जेठानी मंदिर

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आलेख प्रतियोगिता आयोजन हेतु सर्वजनिक सूचना का प्रकाशन:-कार्यालय कलेक्टर (पुरातत्व संघ) बलौदाबाजार – भाटापारा अंतर्गत

 कार्यालय कलेक्टर (पुरातत्व संघ) बलौदाबाजार – भाटापारा अंतर्गत आलेख प्रतियोगिता आयोजन हेतु सर्वजनिक सूचना का प्रकाशन


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भाटापारा के जनपद/जिला पंचायतों के आरक्षण का काम पूरा, पूरी सूची यंहा से देंखे


त्रि-स्तरीय पंचायत चुनाव की तैयारी जारी है। जनपद पंचायतों के आरक्षण का काम पूरा हो गया है। विभिन्न वर्ग के दावेदारों की तो पैरों तले जमीन ही खिसक गई है। आरक्षण ने जहां चुनाव में किस्मत आजमाने मंशा पाल कर बैठे लोगों की किस्मत पर पांच साल के लिए ताला लगा दिया है, वहीं ऐसे लोगों को कुर्सी के करीब ला दिया, जो मौजूदा हालात में कभी चुनाव लड़ने सपने भी नहीं देख सकते थे। पंचायत अधिनियम के अनुसार भाटापारा क्षेत्र के समस्त जनपद जिला पंचायतों क्षेत्रों का 13 नवंबर के आरक्षण की कार्रवाई की की गई ।
CG ELECTION PANCHAYAT CHUNAV


25 जनपद क्षेत्र के आरक्षण की स्थिती घोषित होने के बाद  ग्राम पंचायतों के सरपंच व पंच पद के लिए आरक्षण की कार्रवाई जनपद स्तर पर होगी। 



यंहा आप देख सकते है जनपद क्षेत्रो के आरक्षण -

जनपद क्रमांक   जनपद क्षेत्र  आरक्षण की स्थिति  महिला/ पुरुष 
1 तरेंगा अनारक्षित  महिला 
2 देवरी  अनारक्षित  महिला 
3 दतरेंगी अन्य पिछड़ा वर्ग  महिला 
4 टेहका अनु.जन जाति मुक्त 
5 कोटमी  अन्य पिछड़ा वर्ग  मुक्त 
6 अकलतरा  अनारक्षित  मुक्त 
7 सिंगारपुर  अन्य पिछड़ा वर्ग  मुक्त 
8 निपनिया  अनु.जन जाति महिला 
9 धनेली  अनु.जन जाति महिला 
10 कोदवा  अनु.जाति महिला 
11 पासीद  अनारक्षित  महिला 
12 बिटकुली  अनु.जन जाति मुक्त 
13 खैरा  अन्य पिछड़ा वर्ग  मुक्त 
14 मोपका  अनारक्षित  मुक्त 
15 करहीबाजार  अन्य पिछड़ा वर्ग  महिला 
16 कोसमंदा  अनु.जन जाति महिला 
17 धुर्राबांधा  अनु.जाति महिला 
18 बिजराडीह  अनु.जाति महिला 
19 टोनाटार  अनारक्षित  मुक्त 
20 मोपर  अन्य पिछड़ा वर्ग  महिला 
21 अमेठी  अनारक्षित  महिला 
22 गुर्रा  अनु.जाति मुक्त 
23 राजाढार  अनु.जाति मुक्त 
24 खोखली  अनारक्षित  मुक्त 
25 बोडतारा  अनु.जाति महिला 



जिला पंचायत क्रमांक   आरक्षण की स्थिति  महिला/ पुरुष 
1 अनु.जाति मुक्त
2 अन्य पिछड़ा वर्ग  महिला 
3 अनारक्षित  महिला 
4 अनारक्षित  महिला 
5 अनारक्षित  महिला 
6 अनु.जन जाति महिला 
7 अनारक्षित  मुक्त
8 अन्य पिछड़ा वर्ग  महिला 
9 अन्य पिछड़ा वर्ग  मुक्त
10 अन्य पिछड़ा वर्ग  मुक्त
11 अन्य पिछड़ा वर्ग  महिला 
12 अनारक्षित  महिला 
13 अनु.जाति महिला 
14 अनु.जाति महिला 
15 अनारक्षित  मुक्त
16 अन्य पिछड़ा वर्ग  मुक्त
17 अनु.जन जाति महिला 
18 अनारक्षित  मुक्त
19 अनारक्षित  मुक्त
20 अनु.जाति महिला 
21 अनु.जाति मुक्त
22 अनु.जन जाति मुक्त
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सामाजिक गुलामी से मुक्ति का एक ही रास्ता है कि दलित-पिछड़ा इकट्ठा हों..

लेख:- चंद्र भूषण सिंह यादव

सामाजिक गुलामी से मुक्ति का एक ही रास्ता है कि दलित-पिछड़ा इकट्ठा हों........
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       दलित-पिछड़े को सामाजिक गुलामी से मुक्ति के लिए इकट्ठा होना होगा।यह काम है तो कठिन पर ऐसा भी नही है कि कभी हो नही सकता।दलित-पिछड़ा एका आज नही तो कल निश्चित होगा,हां इस निमित्त हमे प्रयत्नशील रहना होगा।दलित-पिछड़ा एका के लिए सबसे जरूरी जो बात है वह इन दोनों वर्ग के बुद्धिजीवियों का अपने जातिगत दुराग्रह को ताक पर रखना है।
          मैं देखता हूँ कि हम उनसे नही लड़ते जो हमे सदियों से तमाम तरह के अपमानजनक अलंकरणों से अलंकृत किये हुए हैं और सामाजिक तौर पर गुलाम बना कर रखे हुए हैं।हम अपने आप को श्रेष्ठ घोषित करने में अपनी ऊर्जा खपाने में मस्त व ब्यस्त हो जा रहे हैं जो अभिजात्य जनों की जीत का सबसे बड़ा कारण है।
        दलित-पिछड़ा समाज को जो लगभग सात हजार जातियों और लाखों उपजातियों में विभक्त कर ऐसे न तोड़ दिया गया है कि उसकी एकता किसी पलड़े पर मेढक तौलने जैसी हो जाती है।हम जातीय अपमान को भूल बहुजन समाज की दीगर जातियों से श्रेष्ठ होने का तर्क गढ़ने लगते हैं।हम भूल जाते हैं कि हम अपने अन्य मूलनिवासी भाईयों से भले ही उच्च होने का प्रमाण प्राप्त कर लें लेकिन सनातन पंथ में जो भूसुर हैं उनके नीचे ही रहेंगे।जो नीच व ऊंच का मानदंड है वह सारे पिछड़े-दलित के लिए एक है अंतर केवल यही है कि समझदार लोगो ने ऐसा न विभाजन किया है कि हम इकट्ठा न हो सकें और खुद को किसी से तो श्रेष्ठ हैं यह भाव मन में रख लट्टू होते रहें।
        हजारों वर्ष की सामाजिक गुलामी को दूर करने का रास्ता सारे शोषितों में आपसी समन्यव स्थापित करना है जिसके लिए सबसे पहले हमें अपनी उच्चता का भाव त्यागना होगा।इसके बाद हमें धार्मिक आडंबरों के प्रति सचेत होना पड़ेगा।जब तक हम धार्मिक बंधनो और भाग्य-भगवान में अटके रहेंगे तब तक हमारा कोई कल्याण नही कर सकेगा।
        बाबा साहब डॉ भीम राव अम्बेडकर ने देश की आजादी के पूर्व व देश की आजादी के बाद अपने निर्वाण प्राप्ति तक दलित समाज को शिक्षित होने,संगठित होने और संघर्ष करने का सूत्र दिया।बाबा साहब ने आजादी के पहले महाड तालाब आंदोलन से लेकर मनुस्मृति फूंकने तक का अभियान चलाया।उन्होंने कांग्रेस की उस आजादी को बेमानी बताया जिसमे प्रभु जातियां तो अंग्रेजो से स्वतंत्र हो जा रही थीं पर अधिकारो से वंचित जातियां यथावत रह जा रही थीं।बाबा साहब ने अंग्रेजो से बहस कर भारत की सामाजिक स्थिति के आकलन हेतु "साइमन कमीशन" लाया पर पिछड़ी जातियों का वही जातीय श्रेष्ठता का भाव उनसे यह नारा लगवा दिया कि "साइमन कमीशन गो बैक" जबकि साइमन कमीशन इन पिछड़े-दलित वर्गों को अधिकार सम्पन्न बनाने की सिफारिशें  करने हेतु आया था।
       यह दलित-पिछडो के आपसी समन्यव का घनघोर अभाव का परिणाम रहा कि आजादी के पूर्व ही अम्बेडकर साहब के सद्प्रयासों से दलित समाज अंग्रेजी राज में ही अनेक सहूलियतें पा गया,पर पिछड़ा मुंह ताकता रह गया।गांधी जी जो वर्ण व्यवस्था के जबर्दस्त पोषक थे दलितों को दो वोट देने व लड़ने के अधिकार के विरुद्ध आमरण अनशन कर अम्बेडकर साहब को "पूना पैक्ट" करने को विवश कर दिए।यह विवशता भी पिछड़े वर्गों की कुम्भकर्णी निद्रा व जिस डाल पर बैठे हैं उसे ही काटने की प्रबृत्ति के कारण अम्बेडकर साहब के समक्ष आयी।
       पिछड़ी जातियों द्वारा अम्बेडकर साहब के आंदोलनो में कोई सहयोग न करना,दलितों के साथ प्रभु वर्ग से भी ज्यादा छुवाछूत का व्यवहार करना इन पिछड़ों के आज तक के पिछड़ेपन का कारण है जिस पर इनका ध्यान नही जा रहा है जबकि जिस दिन इन पिछड़े वर्गों को यह आभास हो गया कि वे भी गुलाम ही हैं,उसी दिन सारी परिस्थितियां बदल जाएंगी।बाबा साहब का यह कहना सोलह आने सत्य है कि "गुलाम को जिस दिन गुलामी का अहसास हो गया उसी दिन वह विद्रोह कर बैठेगा।"
           बाबा साहब डा अम्बेडकर को बहुत सारे पिछड़े लोग दोष देते हैं कि उन्होंने दलितों की तुलना में पिछडो के हित हेतु क्या किया?यही सवाल अहम है कि बाबा साहब ने पिछडो के हितार्थ क्या किया?बाबा साहब ने साइमन कमीशन लाया जिसमे पिछड़े वर्गों का भी कल्याण होना था लेकिन कांग्रेस के नेताओ ने आम-अवाम व पिछडो को समझा दिया कि साइमन कमीशन सबको चमार बनाने आ रहा है।जातीय अभिमान में चूर पिछडे वर्ग के लोग अपनी दुर्दशा भूल चमार बनने का विरोध करने लगे।यह देख बाबा साहब ठगे से रह गए।
          देश की आजादी के बाद जब बात सँविधान लिखने की आई तो सँविधान प्रारूप समिति के अध्यक्ष के रूप में बाबा साहब डॉ आंबेडकर ने अनुच्छेद 340 का प्राविधान पिछड़े वर्गों के लिए पहले किया जबकि अनुसूचित जातियों के लिए 341 व अनुसूचित जनजातियों के लिए 342 का प्राविधान बाद में किया।संवैधानिक अधिकार मिलने के बाद भी पिछड़ी जातियां सोई रहीं।
           देश का कानून मंत्री रहते हुए बाबा साहब डॉ अम्बेडकर ने लखनऊ के पिछड़ा वर्ग सम्मेलन में अपनी मनःस्थिति बयां करते हुये खुलेआम बोल दिया था कि "जिस दिन इस देश के दलित-पिछड़े एकजुट हो गए उस दिन पण्डित गोविंद बल्लभ पंत जैसे लोग इनके जूते की फीतियाँ बांधने में गर्व महसूस करेंगे।"बाबा साहब के उक्त कथन पर भारत की नेहरू सरकार ने पत्र व्यवहार भी किया कि वे कानून मंत्री रहते हुए ऐसा कैसे बोल गए?
         बाबा साहब अम्बेडकर जब तक जिंदा रहे उनके साथ पिछड़ी जातियां किसी आंदोलन में शामिल नही हुईं क्योकि कांग्रेस द्वारा रोपित विचार उनके अंदर तब भी पुष्पित-पल्लवित हो रहे थे कि अम्बेडकर साहब के साथ जाने का मतलब अछूत बनना है।
         सँविधान प्रदत्त अधिकारों के तहत पिछड़े वर्गों के लिए काका कालेलकर आयोग हो या मण्डल आयोग,सबका प्रितिरोध कांग्रेसी सत्ता ने किया क्योकि कांग्रेस हो या वर्तमान भाजपा ये इस देश के प्रभु वर्गों की हिमायती पार्टियां है।
          समाजवादी नेता डॉ लोहिया जो सारी जाति की महिलाओं को शामिल कर पिछड़ा कांसेप्ट पर बोलते हुए नारा दिए थे कि पिछड़ा पावें सौ ने साठ ने उन्नीस सौ साठ के दशक में यह प्रयत्न जरूर किया कि बाबा साहब अम्बेडकर व समाजवादी एक साथ हो इस देश के वंचितो की लड़ाई लड़ें पर उसी दरम्यान बाबा साहब की मौत हो गयी।
         उन्नीस सौ नब्बे के दशक में मान्यवर कांशीराम साहब ने "मण्डल कमीशन लागू करो,वरना कुर्सी खाली करो" के नारे के साथ देश भर में प्रदर्शन व रैलियां आयोजित की,दिल्ली में इस निमित्त विशाल रैली कांशीराम साहब ने किया।वीपी सिंह जी की सरकार बनी और आंशिक मण्डल कमीशन लागू हुवा लेकिन पिछड़े वर्गों की जो एकजुटता व अभियान होना चाहिये वह कहीं नजर नही आया।दलित समाज पिछड़े वर्गों के मसायल पर साथ आया लेकिन पिछड़े वर्ग के लोग अपने ही अधिकार के लिए कभी संगठित हो संघर्ष करने का इतिहास न रच सके।
        दलित समाज की सजगता से पिछड़े वर्ग के लोग सीख लें,ऐसा भी नही हो सका है जिस नाते पिछड़े वर्गों की सदैव ही हकमारी होती रही है।पिछड़ी जातियों का सरकारी नौकरियों में 27 प्रतिशत आरक्षण कोर्ट ने लागू करने का फैसला कर दिया लेकिन उसमें आर्थिक आधार का प्राविधान"क्रीमी लेयर" जोड़ दिया जो कहीं भी सँविधान में नही है लेकिन पिछड़े आंदोलित न हो सके जबकि वहीं कोर्ट द्वारा एससी-एसटी खत्म करने पर दलित समाज दर्जनों की संख्या में शहादत दे कर इस अधिकार को सन्सद से पुनः लागू करवा लिया।13 प्वाइंट रोस्टर पर भी पिछड़े वर्ग के लोग सोए रहे लेकिन दलित समाज चैतन्य हो 100 प्वाइंट रोस्टर लागू करवा लिया।इस एससी-एसटी ऐक्ट व 13 प्वाइंट रोस्टर पर पिछड़े वर्गों में केवल बिहार के नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव जी ने सकारात्मक सहयोग किया।
        वर्तमान दौर बहुत दुरूह है।सँविधान,आरक्षण,सामाजिक समता की नीति खतरे में हैं।मनुवादी,यथास्थितिवादी शक्तियां सर उठाने लगी हैं।आरक्षण को खत्म करने हेतु सरकारी नौकरियां खत्म की जा रही हैं।लाभ के उपक्रमो का भी प्राइवेटाइजेशन किया जाने लगा है।आउट सोर्सिंग से काम करने हेतु अपने लोगो की भर्तियों का कार्य सरकारी दल कर रहे हैं जिसमे आरक्षण लागू नही है।इन आउटसोर्सिंग से नियुक्त लोगो को ही बाद में रेगुलराइज करने की सँविधान विरोधी मंशा को क्रियान्वित किया जाना है।जातियों के नाम पर देश भर में माव लीचिंग शुरू है ऐसे में अब निहायत ही जरूरी हो चला है कि देश का दलित-पिछड़ा बुद्धिजीवी इन दोनों समुदायों को एकजुट करने हेतु पहल करे।
      मुझे आभास है कि यह मुहिम कठिन है पर आज यही समय की मांग है कि देश का सम्पूर्ण बहुजन समाज इकट्ठा हो और समाज हित मे वर्गीय चेतना विकसित करने के लिए अपनी जातिगत कुंठा को निकाल फेंक वर्गीय संगठन तैयार करे अन्यथा आगे का दौर और संकटपूर्ण होगा।
-चंद्रभूषण सिंह यादव
प्रधान संपादक-"यादव शक्ति"/कंट्रीब्यूटिंग एडिटर-"सोशलिस्ट फ़ैक्टर"
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तुलसी विवाह 2019: Dev Uthani Ekadashi 2019: 8 नवंबर को है देवउठनी एकादशी, जानिए शुभ मुहूर्त, पूजा विध‍ि, व्रत कथा और तुलसी विवाह का महत्‍व 20

तुलसी विवाह 2019

8 नवंबर 2019 तुलसी विवाह 2019 शुभ मुहूर्त
द्वादशी तिथि प्रारंभ- दोपहर 12 बजकर 16 मिनट से (8 नवंबर 2019) 
द्वादशी तिथि अंत- दोपहर 2 बजकर 21 मिनट से (9 नवंबर 2019)


तुलसी विवाह

तुलसी विवाह का महत्व

तुलसी विवाह को हिंदू धर्म के अनुसार अधिक महत्व दिया जाता है।् माह की नींद पूरी करके उठते हैं। जिसके बाद से ही सभी शुभ कामों की शुरुआत हो जाती है। तुलसी के पौधे की पूजा प्रत्येक घर में होती है। हिंदू धर्म के अनुसार तुलसी पूजा करने से विशेष लाभ प्राप्त होता है। इसलिए प्रत्येक घर में तुलसी विवाह को अधिक महत्व दिया जाता है।तुलसी विवाह को शालिग्राम से सनातन धर्म के अनुसार पूरे विधि - विधान से कराया जाता है। तुलसी विवाह के दिन कन्या दान भी किया जाता है।क्योंकि कन्या दान को सबसे बड़ा दान माना जाता है।

तुलसी विवाह पूजा विधि-

1.तुलसी विवाह के दिन सबसे पहले सूर्योदय से पहले उठें। इसके बाद स्नान करके साफ वस्त्र धारण करें और व्रत का संकल्प लें। 
2.तुलसी विवाह के दिन तुलसी के पौधे को लाल चुनरी ओढ़ाएं। 
3.इसके बाद तुलसी के पौधे पर श्रृंगार की वस्तुएं चढ़ाएं।इसके बाद पत्थर रूपी शालिग्राम को तुलसी के पौधे के साथ स्थापित करें। 
4.शालिग्राम को स्थापित करने के बाद तुलसी के पौधे का विधिवत की पंडित जी से विवाह कराएं.
5. तुलसी विवाह में तुलसी के पौधे और शालिग्राम की सात परिक्रमा कराएं और अंत में तुलसी जी की आरती गाएं।

तुलसी विवाह व्रत कथा-

पौराणिक कथा के अनुसार राक्षस कुल में एक अत्यंत ही सुदंर कन्या का जन्म हुआ। जिसका नाम वृंदा रखा गया। वृंदा बचपन से ही भगवान विष्णु की पूजा करती थी और उनकी बहुत बड़ी भक्त भी थी। वह कन्या जैसे ही बड़ी हुई उसका एक असुर जलंधर से विवाह हो गया। वृंदा की भक्ति के कारण जलंधर को और भी ज्यादा शक्तियां प्राप्त हो गई। जलंधर वृंदा की भक्ति के कारण इतना शक्तिशाली हो गया था कि वह न केवल मनुष्य और देवताओं पर बल्कि राक्षसों पर भी अत्याचार करने लगा था। वह इतना बलशाली हो गया था कि उसे हरा पाना किसी के भी वश में नहीं था। सभी देवी- देवता इस समस्या के निदान के लिए भगवान विष्णु की शरण मे गए और मदद मांगने लगे। देवाताओं को इस समस्या से निकालने के लिए भगवान विष्णु ने जलंधर का रूप धारण कर लिया और वृंदा का पतिव्रता धर्म नष्ट कर दिया। जिसकी वजह से 
जलंधर की शक्तियां कम हो गई और वह युद्ध में मारा गया। जिसके बाद वृंदा ने भगवान विष्णु के इस छल के कारण उन्हें पत्थर हो जाने का श्राप दे दिया। जिसके बाद सभी देवी- देवताओं ने वृंदा से अपना श्राप वापस लेने का आग्रह किया। वृंदा ने अपना श्राप तो वापस ले लिया। लेकिन खुद को अग्नि में भस्म कर लिया। भगवान विष्णु ने वृंदा की राख से एक पौधा लगाया और उसे तुलसी नाम दे दिया और यह भी कहा कि मेरी पूजा के साथ के पृथ्वीं के अंत तक तुलसी की भी पूजा होगी।

कन्यादान का फल देता है तुलसी विवाह-

तुलसी विवाह देवउठनी एकादशी के दिन पड़ता है। तुलसी विवाह के दिन तुलसी के पौधे का विवाह शालिग्राम के साथ किया जाता है। यह दिन उन लोगों के लिए विशेष फलदायी होता है। जिनके घर में बेटियां नही होती।माता-पिता विवाह के समय कन्यादान करते हैं। जिसे सबसे बड़ा दान भी माना जाता है। लेकिन जिनके घर में कन्याएं नहीं होती। वह इस दिन विधि पूर्वक तुलसी का विवाह कर सकते हैं और कन्यादान का पुण्य कमा सकते हैं। इसी कारण तुलसी विवाह को अत्याधिक महत्व दिया जाता है।

तुलसी के पौधे का औषधीय महत्व-

तुलसी के पौधे में बहुत अधिक गुण होते हैं। तुलसी की पत्तियों को चाय में डालने से उसका स्वाद अत्याधिक बढ़ जाता है। इसके साथ ही तुलसी शरीर में ऊर्जा बढ़ाने का काम भी करती हैं। तुलसी रोगों से लड़ने मे भी अत्याधिक फायदेमंद होती है। तुलसी के इसी गुण के कारण इसका प्रयोग दवाईयों में भी अत्याधिक होता है।

तुलसी के पौधे का धार्मिक महत्व-
तुलसी का धार्मिक महत्व भी बहुत अधिक है। तुलसी भगवान विष्णु को अत्याधिक प्रिय है।इसलिए तुलसी के पत्ते से भगवान विष्णु की पूजा करने पर अत्याधिक लाभ प्राप्त होता है। मुख्य रूप से एकादशी के दिन तुलसी के पत्ते से भगवान विष्णु की पूजा की जाती है। लेकिन भगवान गणेश की पूजा में तुलसी का बिल्कुल भी प्रयोग नहीं किया जाता।


घर में कैसे करें तुलसी का विवाह-

1.तुलसी विवाह शाम के समय यानि गोधूलि बेला में ही करें। इसके बाद तुलसी के गमले पास गेरु से रंगोली बनाएं। 
2. इसके बाद गन्न से तुलसी जी और शालिग्राम के विवाह का मंडप सजाएं। 
3. इसके बाद एक चौकी पर तुलसी का गमला और दूसरी चौकी पर शालिग्राम या भगवान विष्णु की मूर्ति स्थापित करें।तुलसी जी को शालिग्राम 
के दाईं और स्थापित करें। 
4. इसके बाद शालिग्राम जी की चौकी पर अष्टदल कमल बनाकर उस पर कलश की स्थापना करें और उस पर 
स्वास्तिक बनाएं। 
5.इसके बाद आम के पत्तों पर रोली से तिलक करके उसे कलश पर स्थापित करके उस पर लाल कपड़े में लपेटकर नारियल को रखें।
6.इसके बाद तुलसी जी के आगे घी का दीपक जलाएं। क्योंकि अग्नि को साक्षी मानकर ही तुलसी जी का 
विवाह कराया जाता है। 
7.इसके बाद गंगाजल में फूल डिबोकर ऊं तुलसाय नम: मंत्र का जाप करते हुए गंगाजल का छिड़काव तुलसी जी पर करें।
8.इसके बाद उसी फूल और गंगाजल से ऊं नमो भगवते वासुदेवाय नम: मंत्र का जाप करते हुए गंगाजल को शालिग्राम या भगवान विष्णु 
की प्रतिमा पर छिड़कें। 
9. इसके बाद तुलसी जी को रोली और शालिग्राम जी को चंदन का तिलक करें.
10.इसके बाद दूध में हल्दी डालकर तुलसी जी और शालिग्राम को लगाएं।।

                  आपका अपना
            "पं.खेमेश्वर पुरी गोस्वामी"
            धार्मिक प्रवक्ता-ओज कवि
          प्रदेश संगठन मंत्री एवं प्रवक्ता
   अंतरराष्ट्रीय युवा हिंदू वाहिनी छत्तीसगढ़
      ८१२००३२८३४-/-७८२८६५७०५७
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सावधान !- धान 37.5 क्विंटल से अधिक बेचने पर राशन कार्ड होगा निरस्त - आदेश पंजीयन प्रक्रिया के पहले ही जारी हो चूका है ! बिचौलियों से धान खरीदी ना हो इसके लिए उठाये जा रहे है सख्त कदम .

छत्तीसगढ़ में सीमांत और  लघु किसान यदि तय मात्रा से अधिक धान की बिक्री करेंगे तो उनका राशनकार्ड निरस्त कर दिया जाएगा।कृषकों मे ये चर्चा का विषय है ,लेकिन ज्यादातर कृषक इसे एक अफवाह मन रहे है किन्तु सरकार ने पंजीयन प्रक्रिया के पहले से ही इसके लिए दिशा-निर्देश जारी कर दिए हैं।


  • इस बार समितियोंके धान खरीदी केन्द्रों में 31 दिसम्बर से प्रारंभ होगा ! 
  • छत्तीसगढ़ में राज्य के किसानों से धान कि खरीदी 2500 रूपये / क्विंटल से किया जायेगा | यह केवल पंजीकृत किसानों के लिए रहेगा |
  • मापक यंत्र से जांच कर, 17 प्रतिशत से अधिक नमी वाले धान की खरीदी नहीं की जायेगी।
  • समर्थन मूल्य पर किसानों से प्रति एकड़ 15 क्विंटल के मान से धान खरीदा जाएगा।



जानकारी के मुताबिक शासन ने तय किया है कि जिनके पास पांच एकड़ से अधिक कृषि भूमि है और जो 75 
क्विंटल से अधिक धान बेचेगा वह गरीब की श्रेणी में नहीं आता है। ऐसे लोगों का राशन कार्ड निरस्त होगा।  
कैबिनेट सब कमेटी धान बिक्री के लिए किसानों का पंजीयन प्रक्रिया नवीनतम आदेश के अनुसार 7 नवम्बर तक कृषको का धान विक्रय हेतु खरीदी केंद्र /समितियों मे पंजीयन होना है कलेक्टरों को कहा गया है कि अन्य फसलों के रकबे का धान बेचने के लिए पंजीयन नहीं होना चाहिए, इससे अवैध धान बिक्री की गुंजाइश नहीं रहेगी। विधिक व्यक्तियों यथा ट्रस्ट, प्राइवेट कंपनी अथवा केन्द्र, या राज्य सरकार की संस्था की जमीन को धान बोने के लिए यदि लीज दिया गया है तो विवरण देना होगा। 

अधिक बेचने पर राशन कार्ड होगा निरस्त

सीमांत तथा लघु कृषक होने के आधार पर जिन लोगों ने प्राथमिकता वाले राशन कार्ड प्राप्त किया है किंतु ऐसे सीमांत किसान जो 37.5 क्विंटल से अधिक मात्रा का समर्थन मूल्य पर धान विक्रय करेंगे एवं ऐसे लघु किसान जो 75 क्विंटल से अधिक मात्रा का समर्थन मूल्य पर धान विक्रय करेंगे उन्हें चिह्नांकित कर उनका राशनकार्ड निरस्त किया जाएगा।



इतना धान बेच सकेंगे किसान


सीमांत तथा लघु किसान होने के आधार पर जिन लोगों ने राशन कार्ड लिया है, किन्तु ऐसे सीमांत किसान जो 37.5 क्विंटल और लघु किसान 75 क्विंटल से अधिक मात्रा का समर्थन मूल्य पर धान बेचेगें तो उन्हें चिन्हांकित कर उनके राशन कार्ड निरस्त किए जाएंगे। यह प्रावधान कृषक की खुद की धारित भूमि पर लागू होगा। ताकि कृषकों को धोखे में रखकर बिचौलियों के द्वारा उनके नाम पर अवैध भूमि पंजीयन कराकर धान विक्रय का प्रयास न किया जा सके।
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छत्तीसगढ़ राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन अंतर्गत संचालित विभिन्न कार्यक्रम हेतु वित्तीय वर्ष 2019-20 में संविदा पदों की भर्ती हेतु दिनांक 05-11-2019 से दिनांक 25-11-2019 शाम 5.00 बजे तक ऑनलाइन आवेदन आमंत्रित किये जाते हैं|

राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन अंतर्गत
संचालित विभिन्न कार्यक्रम हेतु वित्तीय वर्ष 2019-20 में संविदा पदों की भर्ती हेतु
दिनांक 05-11-2019 से दिनांक 25-11-2019 शाम 5.00 बजे तक
 ऑनलाइन आवेदन आमंत्रित किये जाते हैं|
  
4) ऑनलाइन आवेदन करे(Apply Online)
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CG Health Department Recruitment Online Form 2020 – स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण एवं चिकित्सा शिक्षा विभाग छत्तीसगढ़ के द्वारा सीधी भर्ती रोजगार समाचार छत्तीसगढ़ सरकारी नौकरी 2020 आमंत्रित किये गये है जिसके अंतर्गत संचालित विभिन्न कार्यक्रम हेतु वित्तीय वर्ष 2019-20 में संविदा पदों की भर्ती हेतु दिनांक 05-11-2019 से दिनांक 25-11-2019 शाम 5:00 बजे तक ऑनलाइन आवेदन आमंत्रित किये गए है अगर आप भी इस रोजगार के लिए आवेदन करना चाहते है और मंगाए गए मापदंड की पूर्ति रखते है तो आप भी अपनी उम्मीदवारी ऑनलाइन आवेदन के माध्यम से स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण विभाग,छत्तीसगढ़ को कर सकते है इस स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण विभाग,छत्तीसगढ़ भर्ती 2020 रोजगार से जुड़े सारी जानकारी आपको इस पोस्ट में मिल जायेगा आवेदक पूरी जानकारी को अच्छी तरह से पढ़ने के बाद ही अपना आवेदन विभाग को करें ताकि आपको किसी भी तरह से कोई दिक्कत ना हो।
हमारे रोजगार वेबसाइट पर रोज नए-नए गवर्नमेंट जॉब की जानकारी दी जाती है इसे सभी सोशल नेटवर्किंग साइट पर शेयर करें दोस्तों के साथ शेयर करें व्हाट्सएप ग्रुप पर शेयर करें।

स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण विभाग,छत्तीसगढ़ भर्ती 2020

विभाग का नाम – स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण एवं चिकित्सा शिक्षा विभाग छत्तीसगढ़ ।
आवेदित पद का नाम – तकनिकी अधिकारी , मेनेजर , प्रोग्राम एसोसिएट , कंसलटेंट और प्रोग्रामर पदों के लिए ।
आवेदन प्रक्रिया – ऑनलाइन ।
नौकरी का स्थान –  छत्तीसगढ़ में कही भी।
शैक्षणिक योग्यता – शैक्षणिक योग्यता से जुड़े और भी अपडेट को जानने के लिए विभागीय विज्ञापन देखे।
आयु सीमा पात्रता मापदंड – उम्मीदवार का आयु कम – कम 18 वर्ष और अधिकतम 31 के बीच होना चाहिए आयु सम्बन्धी व छूट सटीक जानकारी के लिए कृपया विभागीय समाचार एक बार जरूर देखे।
भर्ती रिक्तियां विवरण – स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण विभाग,छत्तीसगढ़ भर्ती 2020 के द्वारा सीनियर मैनेजर और डीजीएम पद के लिए आवेदन मंगाए गए है।
आवेदन शुल्क – पदों की उम्मीदवारी कर रहे उम्मीदवारों को अलग – अलग पोस्ट के लिए विभाग के द्वारा निर्धारित किये गए हैं जिनके अनुसार आपको आवेदन शुल्क जमा करना होगा।
ऐसे करें आवेदन – इन पदों के आवेदन करने के लिए भली भांति से विभाग के जारी दिशा निर्देशों को सही तरह से अध्ययन करने के बाद ही अपना आवेदन ( स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण विभाग,छत्तीसगढ़ भर्ती 2020 ) को कर सकते हैं।ऑनलाइन आवेदन करने की अंतिम तिथि – इन पदों के लिए विभाग को 25-11-2019 तक ऑनलाइन आवेदन कर सकते है।
चयन प्रक्रिया – इन पदों पर विभाग के द्वारा लिखित परीक्षा और इंटरव्यू लिए जायेगा में प्रदर्शन के आधार पर सलेक्शन किया जायेगा।
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