अच्छी तरह से जान लीजिये आपको आपके सिवा कोई और सफलता नहीं दिला सकता
दयाशंकर: रंगमंच की दुनिया से हमर भाटापारा के उभरते कलाकार रवि शर्मा द्वारा प्रस्तुत नाटक दयाशंकर की डायरी का मंचन रायपुर में 2 नवंबर से। - Bhatapara_Our Proud -->

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Thursday, October 31, 2019

दयाशंकर: रंगमंच की दुनिया से हमर भाटापारा के उभरते कलाकार रवि शर्मा द्वारा प्रस्तुत नाटक दयाशंकर की डायरी का मंचन रायपुर में 2 नवंबर से।

दयाशंकर एक झन अकेल्ला मनखे हे। ओकर जिनगी ह भोरहा मा कटत हे। वास्तविक के दुनिया से ओकर दुरिहा ले भी कोनो वास्ता नई हे। वैइसने जैसे अब्बड झन मनखें मन अपन मन भितर सब सोच लेथें कोन जनी अपन आप ला का से का समझ लेथें। बड़े आदमी बने के अउ बने सुन्दर असन टुरी संग बिहाव करे के सपना कौन नई देखय? अंतर सिरिफ अतके हे कि कोनों कोनो ल जल्दी अपन हकीकत ह अपन परिस्थिति समझ आ जथे जौऊन नई समझ पाय ओकर गति दयाशंकर सही हो जथे।
'दयाशंकर' निच्चट भोरहा मा जियथे। वो बेचारा हमर छत्तीसगढ़ के एक छोटे से गाँव ले मुंम्बई फिलिम के हीरो बने बर गेहे। उहां ओला जुनियर आर्टिस्ट के काम मिलथे जेला दयाशंकर ये कहिके मना कर देथे 'भाई मछरी के आँखी ला देखना हे तो पुछी ला काबर देखना। कल कहु कोनो हिरोईन मोला देख के मना कर दिहि कि ये तो जुनियर आर्टिस्ट हे मै एकर संग काम नई करव तब मैं कैइसे करहूँ। राहन दे मोर बाप मोला अपन जीवन नष्ट नई करना हे।' 
अपन किस्मत के मौका ला अगरोत अगोरत दयाशंकर ला एक मामूली कलर्क के नौकरी करे ला पढ़ जाथे। लेकिन अपन जिन्दगी के सच्चाई ले दयाशंकर समझौता नई कर पाइस और अपन जिन्दगी के आभाव और अपन परिवार के समाजिक जिम्मेदारी मा बंधावत चले जाथे। दयाशंकर अपन बर बने बड़े बड़े सपना देखत रिथे। और अपन सपना ला सही मानेला धर लेथे अउ धीरे-धीरे हार मान जथे। जब वो होस मा आथे तब वो अपन असल जिन्दगी मा लहुटना  चाहथे त अपन आप ला पागल खाना मा पाथे। पागलखाना ले निकलना चाहथे।
का दयाशंकर सही मा पागल हे? 
का हम सब झन अइसनेच अपन असफलता ले भाग के अपन अपन कल्पना के दुनिया भीतरी सहारा नई खोंजन? जौउन मनखे मन अपन असफलता ले नई सीखें समझौता नई कर पाथें ओकर मन संग का हो सकत हे देखे बर आप ला एक बार 'दयाशंकर' जरूर देखना चाही।  अपन सुविधानुसार 'जनमंच' सड्डु अम्बुजा माल के पाछु आवव देखेबर, भुलाहू झन रे भाई।


संगवारी हो दयाशंकर एक अइसे मनखे के कहानी हे जेन बहुत अकन पईसा कमाना चाहथे हिरो बने बर बम्बई जाथे बड़े आदमी बने के सपना देखथे बने असन बडे बाप के बेटी संग बिहाव करे के सपना देखथे अउ धीरे-धीरे असल जिंदगी के उतार चढ़ाव म मामूली से 7-8हजार के नौकरी करत-करत अपन आप ला बहुत महान समझे ल धर लेथे अपन बाप अउ बहिनी के मरे के बाद पागल हो जथे।
त दयाशंकर काबर पगला जथे?
ओकर बहिनी अउ ओकर बाबू  कैसे मर  जथे?  हमर आस पास भी बहुत झन दयाशंकर हे वो कैसे? 
 वोला  जाने बर आपला एक बार 90मिनट समय निकाल के दयाशंकर देखेला परही  त 2 नवम्बर से 7नवम्बर मंझनिया 1 बजे अउ संझा 7 बजे 
 अंबुजा मॉल के पाछु म जनमंच मा आना हे आपमन के अगोरा रिही काका 💐🙏🏼
टिकट बर संपर्क करहु 💐
9425643166
9826153672

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