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शिवनाथ नदी के बीचों-बीच पर्यटन की अनूठी जगह मदकू द्वीप दो धर्म और आस्था का संगम स्थल

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परम प्रेम की परिणिति काम-क्रीडा को परिलक्षित करती छत्तीसगढ का खजुराहो भोरमदेव मंदिर।

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शिवरीनारायण का मंदिर माता शबरी का आश्रम छत्तीसगढ़-इतिहास के पन्नो में

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प्रेम का लाल प्रतीक लक्ष्मण मंदिर...........

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ताला की विलक्षण प्रतिमा-देवरानी जेठानी मंदिर

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Monday, September 23, 2019

आदित्य करेगा सूर्य का अध्ययन- विश्व को फिर से हैरत में डालेगा भारत

इसरो_2020_में_आदित्य_एल_1_को_लॉन्च_करने_की_योजना_बना_रहा_है

इसरो पहले से ही अपने अगले महत्वाकांक्षी लॉन्च की योजना बना रहा है और इस बार, यह सूर्य के लिए लक्ष्य बना रहा है।


आदित्य-एल 1 सूर्य का अध्ययन करने वाला पहला भारतीय मिशन है जो 2020 में लॉन्च होगा। फिलहाल, इसरो के चंद्रमा पर जाने वाले मिशन का भविष्य अनिश्चित भविष्य का सामना कर रहा है।

इसरो आदित्य-एल 1 मिशन को पहले आदित्य -1 नाम दिया गया था।

उपग्रह को अब सूर्य-पृथ्वी प्रणाली के लैग्रैजियन बिंदु 1 (L1) के चारों ओर एक प्रभामंडल की कक्षा में रखा जाएगा, जिसमें सूर्य को बिना किसी मनोगत या ग्रहण के लगातार देखने के फायदे हैं, जिसके परिणामस्वरूप नाम में परिवर्तन होता है।


आदित्य-एल 1 को एल 1 के चारों ओर एक हेलो ऑर्बिट में रखा जाएगा, जो पृथ्वी से 1.5 मिलियन किमी दूर है। इसरो राज्यों में उपग्रह में अतिरिक्त छह पेलोड है, जो विज्ञान के दायरे और उद्देश्यों को बढ़ाता है।

आदित्य एल -1 का उद्देश्य:-

पहले प्रस्तावित आदित्य -1 केवल सौर कोरोना का निरीक्षण करने के लिए था, जो सूर्य की बाहरी परतें हैं जो सौर वस्तु से हजारों किलोमीटर तक फैली हुई हैं।

अब प्रस्तावित आदित्य-एल 1 के साथ, मिशन ने सूर्य के प्रकाशमंडल (नरम और कठोर एक्स-रे), क्रोमोस्फीयर (यूवी), और कोरोना (दृश्यमान और एनआईआर) का निरीक्षण करने की योजना बनाई है।

अतिरिक्त प्रयोग सूर्य से निकलने वाले कण प्रवाह और L1 कक्षा में पहुंचने का अध्ययन भी करेगा।

आदित्य-एल 1 के मैग्नेटोमीटर पेलोड के साथ चुंबकीय क्षेत्र की भिन्नता को भी मापा जाएगा।

आदित्य-1 उपग्रह सोलर ' कॅरोनोग्राफ’ यन्त्र की मदद से सूर्य के सबसे भारी भाग का अध्यन करेगा। इससे कॉस्मिक किरणों, सौर आंधी, और विकिरण के अध्यन में मदद मिलेगी। अभी तक वैज्ञानिक सूर्य के कॅरोना का अध्यन केवल सूर्यग्रहण के समय में ही कर पाते थे। इस मिशन की मदद से सौर वालाओं और सौर हवाओं के अध्ययन में जानकारी मिलेगी कि ये किस तरह से धरती पर इलेक्ट्रिक प्रणालियों और संचार नेटवर्क पर असर डालती है।


इससे सूर्य के कॅरोना से धरती के भू चुम्बकीय क्षेत्र में होने वाले बदलावों के बारे में घटनाओं को समझा जा सकेगा। इस सोलर मिशन की मदद से तीव्र और मानव निर्मित उपग्रहों और अन्तरिक्षयानों को बचाने के उपायों के बारे में पता लगाया जा सकेगा। इस उपग्रह का वजन 200 किग्रा होगा। ये उपग्रह सूर्य कॅरोना का अध्ययन कृत्रिम ग्रहण द्वारा करेगा। इसका अध्ययन काल 10 वर्ष रहेगा। ये नासा द्वारा सन 1995 में प्रक्षेपित 'सोहो' के बाद सूर्य के अध्ययन में सबसे उन्नत उपग्रह होगा।

आदित्य-1 के नए प्रक्षेपण कार्यक्रम से वैज्ञानिकों को "सौर मैक्सिमा" के अध्ययन का मौका मिल जाएगा। "सौर मैक्सिमा" एक ऎसी खगोलीय घटना है जो 11 वर्ष बाद घटित होती है। पिछली बार सौर मैक्सिमा 2012 में हुई थी। इस दौरान सूर्य की सतह से असामान्य सौर लपटें उठती हैं और उनका धरती के मौसम पर व्यापक असर होता है। इसे देखते हुए इसरो ने न सिर्फ नया प्रक्षेपण कार्यक्रम तय किया, बल्कि आदित्य-1 की प्रक्षेपण योजना में थोड़ा बदलाव भी किया है। इसरो अध्यक्ष के अनुसार अब आदित्य-1 को हेलो (सूर्य का प्रभामंडल) आर्बिट में एल-1 लग्रांज बिंदु के आसपास स्थापित किया जाएगा। इस कक्षा में आदित्य-1 सूर्य पर लगातार नजर रख सकेगा और सूर्य ग्रहण के समय भी वह उपग्रह से ओझल नहीं होगा।

सूर्य के केंद्र से पृथ्वी के केंद्र तक एक सरल रेखा खींचने पर जहां सूर्य और पृथ्वी के गुरूत्वाकर्षण बल बराबर होते हैं, वह लग्रांज बिंदु कहलाता है। दरअसल सूर्य का गुरूत्वाकर्षण बल पृथ्वी की तुलना में काफी अधिक है इसलिए अगर कोई वस्तु इस रेखा के बीचों-बीच रखी जाए तो वह सूर्य के गुरुत्वाकर्षण से उसमें समा जाएगी। लग्रांज बिंदु पर सूर्य और पृथ्वी के गुरूत्वाकर्षण बल समान रूप से लगने से दोनों का प्रभाव बराबर हो जाता है। इस स्थिति में वस्तु को ना तो सूर्य अपनी ओर खींच पाएगा, ना पृथ्वी अपनी ओर खींच सकेगी और वस्तु अधर में लटकी रहेगी।

लग्रांज बिंदु को एल-1, एल-2, एल-3, एल-4 और एल-5 से निरूपित किया जाता है। इसरो धरती से 800 किलोमीटर ऊपर एल-1 लग्रांज बिंदु के आसपास आदित्य-1 को स्थापित करना चाहता है। इसरो की नई योजना के मुताबिक 200 किलोग्राम वजनी आदित्य-1 को पीएसएलवी (एक्सएल) से प्रक्षेपित किया जाएगा। आदित्य-1 देश का पहला सौर कॅरोनोग्राफ उपग्रह होगा। यह उपग्रह सौर कॅरोना के अत्यधिक गर्म होने, सौर हवाओं की गति बढ़ने तथा कॅरोनल मास इंजेक्शंस (सीएमईएस) से जुड़ी भौतिक प्रक्रियाओं को समझने में मदद करेगा। यह उपग्रह सौर लपटों के कारण धरती के मौसम पर पड़ने वाले प्रभावों और इलेक्ट्रॉनिक संचार में पड़ने वाली बाधाओं का भी अध्ययन करेगा।

आदित्य-1 से प्राप्त आंकड़ों और अध्ययनों से इसरो भविष्य में सौर लपटों से अपने उपग्रहों की रक्षा कर सकेगा। इसरो ने इसके लिए कुछ उपकरणों का चयन भी किया है, जो आदित्य-1 के पे-लोड होंगे। इनमें "विजिबल एमिशन लाइन कॅरोनोग्राफ (वीईएलसी)" सोलर अल्ट्रवॉयलेट इमेजिंग टेलिस्कोप, प्लाजमा एनालाइजर पैकेज, आदित्य सोलर विंड एक्सपेरिमेंट, सोलर एनर्जी एक्स-रे स्पेक्ट्रोमीटर और हाई एनर्जी एक्स-रे स्पेक्ट्रोमीटर शामिल हैं।

भारत सरकार के वैज्ञानिक सलाहकार समिति के सदस्य एवं इसरो के पूर्व चेयरमैन प्रो. यूआर राव ने कहा कि सूर्य के बारे में अभी हमारी जानकारियां आधी अधूरी है। सूर्य के बारे में बहुत कुछ जानना बाकी है। अभी सोलर कोर्निया के बारे में वैज्ञानिक ज्यादा नहीं जानते है, ज्वालाएं कब आएंगी इसका हमें आइडिया भी नहीं है। इस मिशन से सुरन के बारें में काफी जानकारी मिल जाएगी।

आदित्य सूर्य के कोरोना की गर्मी और उससे होने वाले उत्सर्जन के रहस्य को भी सुलझाने में मदद करेगा। सूर्य कॅरोना का टेंपरेचर लाखों डिग्री है। पृथ्वी से कॅरोना सिर्फ पूर्ण सूर्यग्रहण के दौरान ही दिखाई देता है। यह भारतीय वैज्ञानिकों की इस तरह की पहली कोशिश होगी। कॅरोना के अध्ययन से सोलर एक्टिविटी कंडीशंस के बारे में अहम जानकारियां मिल सकेंगी। इसरो के इस सन मिशन से सूर्य की सतह और सूर्य के आसपास हो रही गतिविधियों और सौर विस्फोटकों के बारे में जान सकेंगे।

अब तक सिर्फ अमेरिका, यूरोपीय अंतरिक्ष एजेंसी और जापान ने सूरज के अध्ययन की लिए स्पेसक्राफ्ट भेजे हैं। 'आदित्य' के प्रक्षेपण के बाद निसंदेह अंतरिक्ष के क्षेत्र में भारत की दखल और बढ़ जाएगी। सूर्य मिशन बहुत महत्वपूर्ण है और वैश्विक अंतरिक्ष अनुसंधान के क्षेत्र में अपनी तरह का एक विशिष्ट मिशन है, इसलिए इसरो के वैज्ञानिकों को इस मिशन से भारी उम्मीदें हैं।

इस मिशन की सफ़लता इसरों के लिए संभावनाओं के नए दरवाजे खोल देगी। फिलहाल इसरो पूरी दुनियां में अपनी सफलता से अबको आश्चर्य चकित कर रहा है और इसरो के एक के बाद एक सफलता देखते हुए लगता है कि जल्द ही भारत अंतरिक्ष के क्षेत्र में सबसे ऊंचाई पर पहुंच जाएगा।
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Wednesday, September 18, 2019

19 ऊंट की कहानी


एक गाँव में एक व्यक्ति के पास 19 ऊंट थे।


एक दिन उस व्यक्ति की मृत्यु हो गयी।

मृत्यु के पश्चात वसीयत पढ़ी गयी। जिसमें लिखा था कि:

मेरे 19 ऊंटों में से आधे मेरे बेटे को,19 ऊंटों में से एक चौथाई मेरी बेटी को, और 19 ऊंटों में से पांचवाँ हिस्सा मेरे नौकर को दे दिए जाएँ।

सब लोग चक्कर में पड़ गए कि ये बँटवारा कैसे हो ?

19 ऊंटों का आधा अर्थात एक ऊँट काटना पड़ेगा, फिर तो ऊँट ही मर जायेगा। चलो एक को काट दिया तो बचे 18 उनका एक चौथाई साढ़े चार- साढ़े चार फिर?

सब बड़ी उलझन में थे। फिर पड़ोस के गांव से एक बुद्धिमान व्यक्ति को बुलाया गया।

वह बुद्धिमान व्यक्ति अपने ऊँट पर चढ़ कर आया, समस्या सुनी, थोडा दिमाग लगाया, फिर बोला इन 19 ऊंटों में मेरा भी ऊँट मिलाकर बाँट दो।



सबने सोचा कि एक तो मरने वाला पागल था, जो ऐसी वसीयत कर के चला गया, और अब ये दूसरा पागल आ गया जो बोलता है कि उनमें मेरा भी ऊँट मिलाकर बाँट दो। फिर भी सब ने सोचा बात मान लेने में क्या हर्ज है।

19+1=20 हुए।

20 का आधा 10 बेटे को दे दिए।

20 का चौथाई 5 बेटी को दे दिए।

20 का पांचवाँ हिस्सा 4 नौकर को दे दिए।

10+5+4=19

बच गया एक ऊँट, जो बुद्धिमान व्यक्ति का था…

वो उसे लेकर अपने गॉंव लौट गया।


इस तरह 1 उंट मिलाने से, बाकी 19 उंटो का बंटवारा सुख, शांति, संतोष व आनंद से हो गया।

सो हम सब के जीवन में भी 19 ऊंट होते हैं।

5 ज्ञानेंद्रियाँ
(आँख, नाक, जीभ, कान, त्वचा)

5 कर्मेन्द्रियाँ
(हाथ, पैर, जीभ, मूत्र द्वार, मलद्वार)

5 प्राण
(प्राण, अपान, समान, व्यान, उदान)

और

4 अंतःकरण
(मन, बुद्धि, चित्त, अहंकार)

कुल 19 ऊँट होते हैं।

सारा जीवन मनुष्य इन्हीं 19 ऊँटो के बँटवारे में उलझा रहता है।

और जब तक उसमें आत्मा रूपी ऊँट नहीं मिलाया जाता यानी के आध्यात्मिक जीवन नहीं जिया जाता, तब तक सुख, शांति, संतोष व आनंद की प्राप्ति नहीं हो सकती।

यह थी 19 ऊंट की कहानी…
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Sunday, September 15, 2019

गरीबी रेखा के निचे वर्ग के अंतर्गत राशन कार्डों के नवीनीकरण में अपात्र अथवा निरस्त होने वालो के लिए एक और मौका !

छत्तीसगढ़ राज्य में सार्वजनिक वितरण प्रणाली के तहत प्राथमिकता वाले राशन कार्डों का नवीनीकरण के दौरान अपात्र पाए गए राशन कार्ड धारियों को अपील का अवसर दिया गया है। नवीनीकरण के लिए प्राप्त आवेदनों का परीक्षण और डाटा एन्ट्री के बाद अपात्र पाए गए राशन कार्डधारी आवेदक तहसीलदार के समक्ष अपील कर सकते हैं।
राशन कार्ड नवीनीकरण के संबंध में दावा-आपत्ति होने पर संबंधित जनपद क्षेत्र के मुख्य कार्यपालन अधिकारी और नगरीय निकायों में मुख्य नगरपालिका अधिकारी या नगर निगम आयुक्त द्वारा सुनवाई की गई थी। सुनवाई की प्रक्रिया पूरी होने के बाद दावा-आपत्तियों का निराकरण 10 सितम्बर तक किया गया था।


खाद्य विभाग द्वारा राशन कार्ड नवीनीकरण के संबंध में जारी निर्देशों के अनुसार नगरीय क्षेत्र में आयुक्त या मुख्य नगरपालिका अधिकारी अथवा उसके द्वारा प्राधिकृत सक्षम अधिकारी और ग्रामीण क्षेत्रों में मुख्य कार्यपालन अधिकारी जनपद पंचायत द्वारा दिए गए आदेश के विरूद्ध आदेश की तारीख के 30 दिनों के भीतर तहसीलदार के समक्ष अपील की जा सकती है। राशन कार्ड पात्र-अपात्र होने के संबंध में तहसीलदार द्वारा लिया गया निर्णय अंतिम होगा।

दावा-आपत्तियों के निराकरण के बाद तैयार अंतिम सूची के आधार पर खाद्य विभाग के वेबसाइट में निरस्त किए जाने वाले राशन कार्डों को 20 सितम्बर 2019 तक हटा दिया जाएगा। जिन राशन कार्ड धारियों का दावा-आपत्ति निराकरण में राशन कार्ड पुन: पात्र पाए जाते हैं तो उनको उचित मूल्य की दुकानों से राशन मिलना शुरू हो जाएगा।
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पितृ पक्ष में श्राद्ध के वैदिक पररंपरा



पितरों को तृप्‍त करने और उनकी आत्‍मा की शांति के लिए पितृ पक्ष में श्राद्ध किया जाता है


वैदिक पररंपरा के अनुसार आश्विन कृष्ण प्रतिपदा से अमावस्या तक की तिथि को पितृपक्ष कहा जाता है. इस समय 15 दिनों तक अपने पितरों का श्राद्ध कर्म किया जाता है. पितृकर्म में किए गए श्राद्ध से पूर्वजों की आत्मा को शांति मिलती है. सनातन वैदिक धर्म में ऐसी मान्यता है कि इन 15 दिनों में पितर मृत्यु लोक से पृथ्वी पर आते हैं.हिन्दू धर्म में माता-पिता की सेवा को सबसे बड़ी पूजा माना गया है. इसलिए हिंदू धर्म शास्त्रों में पितरों का उद्धार करने के लिए पुत्र की अनिवार्यता मानी गई हैं. जन्मदाता माता-पिता को मृत्यु-उपरांत लोग विस्मृत न कर दें, इसलिए उनका श्राद्ध करने का विशेष विधान बताया गया है.

आश्विन कृष्ण प्रतिपदा से लेकर अमावस्या तक ब्रह्माण्ड की ऊर्जा तथा उस उर्जा के साथ पितृप्राण पृथ्वी पर व्याप्त रहता है.

भारतीय धर्मग्रंथों के अनुसार मनुष्य पर तीन प्रकार के ऋण प्रमुख माने गए हैं-

पितृ ऋण,

देव ऋण

ऋषि ऋण.

पितृऋण है सर्वोपरि

पितृ ऋण में पिता के अतिरिक्त माता तथा वे सब बुजुर्ग भी सम्मिलित हैं, जिन्होंने हमें अपना जीवन धारण करने तथा उसका विकास करने में सहयोग दिया.पितृपक्ष में हिन्दू लोग मन कर्म एवं वाणी से संयम का जीवन जीते हैं. पितरों को स्मरण करके जल चढाते हैं. निर्धनों एवं ब्राह्मणों को दान देते हैं. पितृपक्ष में प्रत्येक परिवार में मृत माता-पिता का श्राद्ध किया जाता है.


श्राद्ध की तिथियाँ

14 सितंबर- प्रतिपदा
15 सितंबर- द्वितीया
16 सितंबर- तृतीया
17 सितंबर- चतुर्थी
18 सितंबर- पंचमी महा भरणी
19 सितंबर- षष्ठी
20 सितंबर- सप्तमी
21 सितंबर- अष्टमी
22 सितंबर- नवमी
23 सितंबर- दशमी
24 सितंबर- एकादशी
25 सितंबर- द्वादशी
26 सितंबर- त्रयोदशी, मघा श्राद्ध
27 सितंबर- चतुर्दशी श्राद्ध
28 सितंबर- पितृ विसर्जन, सर्वपितृ अमावस्या।

श्राद्ध के नियम पितृपक्ष में हर दिन तर्पण करना चाहिए. पानी में दूध, जौ, चावल और गंगाजल डालकर तर्पण किया जाता है.
इस दौरान पिंड दान करना चाहिए. श्राद्ध कर्म में पके हुए चावल, दूध और तिल को मिलाकर पिंड बनाए जाते हैं. पिंड को शरीर का प्रतीक माना जाता है.

श्राद्ध में ये काम नही करना चाहिए


इस दौरान कोई भी शुभ कार्य, विशेष पूजा-पाठ और अनुष्‍ठान नहीं करना चाहिए. हालांकि देवताओं की नित्‍य पूजा को बंद नहीं करना चाहिए.
श्राद्ध के दौरान पान खाने, तेल लगाने की मनाही है.
इस दौरान रंगीन फूलों का इस्‍तेमाल भी वर्जित है.
पितृ पक्ष में चना, मसूर, बैंगन, हींग, शलजम, मांस, लहसुन, प्‍याज और काला नमक भी नहीं खाया जाता है.
इस दौरान कई लोग नए वस्‍त्र, नया भवन, गहने या अन्‍य कीमती सामान नहीं खरीदते हैं.


पितृ पक्ष में किस दिन करें श्राद्ध?

दिवंगत परिजन की मृत्‍यु की तिथ‍ि में ही श्राद्ध किया जाता है. यानी कि अगर परिजन की मृत्‍यु प्रतिपदा के दिन हुई है तो प्रतिपदा के दिन ही श्राद्ध करना चाहिए. आमतौर पर पितृ पक्ष में इस तरह श्राद्ध की तिथ‍ि का चयन किया जाता है:
- जिन परिजनों की अकाल मृत्‍यु या किसी दुर्घटना या आत्‍महत्‍या का मामला हो तो श्राद्ध चतुर्दशी के दिन किया जाता है.
- दिवंगत पिता का श्राद्ध अष्‍टमी के दिन और मां का श्राद्ध नवमी के दिन किया जाता है.
- जिन पितरों के मरने की तिथि याद न हो या पता न हो तो अमावस्‍या के दिन श्राद्ध करना चाहिए.
- अगर कोई महिल सुहागिन मृत्‍यु को प्राप्‍त हुई हो तो उसका श्राद्ध नवमी को करना चाहिए.
- संन्‍यासी का श्राद्ध द्वादशी को किया जाता है.

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Wednesday, September 11, 2019

हताश धान खरीदी के ऑपरेटर, सहकारिता, /खाद्य विभाग ,समिति और बैंक के मझधार में गोते खा रहे, क्या सरकार पार लगायेंगे




हैरत की बात है...की ये सहकारिता के काम मे लगे किंतु किसके कर्मचारी है...यह पता नहीं है....??
संविदा है या दैनिक वेतनभोगी..??


  • समिति के निरंकुश व्यवस्था में ऑपरेटर शासन का कार्य करते है.....!!!
  • मगर यह नहीं जानते कि वह शासन का किस विभाग का काम करता है...??
  • ऑपरेटरो से काम खाद्य विभाग लेता है और वह भी मात्र धान खरीदी......!!!!
  • बाकी सभी काम  बैंक और जिला पंजीयक लेता है...........!!!!
  • नियोक्ता भी यही दोनो है..!!!!
  • और  यही दोनो के अधीन समितियाँ है....!!!!
  • कहने को संचालक मंडल को पूरा अधिकार दिया गया है....!!!!

मगर क्या आप जानते है....????

समिति संचालक मंडल को ज्यादातर अधिकार दिया गया है..
और सबसे शक्तिशाली 100% और एकमात्र अंतिम दण्ड देने का अधिकार पंजीयक अपने पास रखा है...?

1.ऑपरेटर का ज्यादातर समिति रिकार्ड में ना उल्लेख होता और न तो समिति मे कार्यरत अन्य कर्मचारियों को मिलने वाले बोनस य अन्य तरह की सुविधाएँ होती है ! ..इससे ये तो सिद्ध होता है की समिति ऑपरेटर को समिति कर्मचारी नहीं मानता !!

2.बैंक और पंजीयक...बड़े तसल्ली से कहते है...समिति में फलाँ कर्मचारी अंशकालिक है और फलाँ कर्मचारी पूर्णकालिक है....ऑपरेटर बैंक के हर आदेश का पालन करता है..किंतु बैंक वाले नियम य सुविधाओ भी ऑपरेटर पर लागु नहीं होता  

3.ऑपरेटर नहीं जनता की वह संविदा है या दैनिक वेतनभोगी या नियमित या जाँब दर वाला कर्मचारी है...और इसी पेंच की वजह से  भविष्य निधि नहीं हो पा रहा है...?. 

4.शासन के रिकार्ड के हिसाब से नियमित/संविदा/दैनिकवेतन भोगी/जाँब दर.....नामक कर्मचारी छ ग तो क्या पूरे भारतवर्ष में पाया जाता है किंतु अंशकालीन और पूर्णकालीन...नामक कर्मचारी मात्र छ ग के पंजीयक द्वारा अनुमोदित सहकारी समितियों में पाया जाता है.....😜😜

5.नियमित / अनियमित को भी छोड़ दे तो ....ऑपरेटर चाहे वह अकुशल/अर्द्धकुशल/कुशल/...ही क्यों ना हो......समिति मे सहकारिता /खाद्य विभाग /बैंक  के कार्य कर रहा ऑपरेटर की गिनती किस वर्ग मे आता है  ये भी सवाल है ......


उपरोक्त सवालो के जवाब मे किये हड़ताल और मांग आश्वासन के मझदार मे गोते खा रहे ...????

पूर्व रमन सरकार में ऑपरेटर विगत दिनो नियमितीकरण की एकसूत्रीय मांग को लेकर प्रदेशस्तर पर बूढ़ातालाब रायपुर के धरनास्थल पर 3 अक्टूबर 2016 को एकदिवसीय आंदोलन एवं 11 नवम्बर 2016 से 16 नवम्बर 2016 तक अनिश्चितकालीन आंदोलन किया गया...जिसे श्रीमधुसूदन यादव महापौर राजनांदगाँव की मध्यस्थता मे माननीय मुख्यमंत्री रमनसिंह जी के आश्वासन पर स्थगित किया गया.....

16 नवम्बर 2016 को विधानसभा भवन मे श्रीमधुसूदन यादव जी की मध्यस्थता मे मुख्यमंत्री के समक्ष संघ के प्रतिनिधियो द्वारा तीन मुद्दो पर सहमति बनाकर शासन द्वारा आदेश जारी करने का आश्वासन मिला......ये तीन मुद्दे है...

  • ऑपरेटरो का विभाग तय करना...
  • वेतन प्रतिमाह पूरे सालभर नियमित रूप से मिले...
  • वर्तमान मे संविदा वेतन 13776

किन्तु ये केवल सहमति तक और विचारों और चुनाव के उलझनों में उलझ कर रह गई!!!!!





भूपेश सरकार से उम्मीद!!!!   क्या इस बार सरकार ऑपरेटर की नौका  पार लगवा पाएंगे .?????


कर्मचारियों के हित व नियमितीकरण के मुद्दों पर सरकार बनाने वाली काँग्रेस की सरकार से उम्मीदों के दम पर नौका पार करने की चाह भी अब दम तोड़ते नजर आ रही है क्योंकि समस्त विभागों के अनियमित कर्मचारियों की जानकारी मांगी गई है ,लेकिन धान खरीदी के इन हताश ऑपरेटरों की सुध किसी विभागों ने नही लिया है।




उपरोक्त वाक्यांश एक अपने को ठगा सा महसूस करने वाला ऑपरेटर के द्वारा लिखा गया है 
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Tuesday, September 10, 2019

जिस देश के रोल मॉडल वैज्ञानिक और सैनिक हों तो उस देश को आगे बढ़ने से कोई नहीं रोक सकता।किसान का बेटा कैसे बना भारत का 'रॉकेट मैन'


जिस देश के रोल मॉडल वैज्ञानिक और सैनिक हों तो उस देश को आगे बढ़ने से कोई नहीं रोक सकता। 

मुझे अपने देश और देशवासियों पर गर्व है।

अभिनंदन के बाद अब इसरो प्रमुख सिवन  को लोगो ने चंद्रयान-2 के बाद एक नए रोल मॉडल के रूप में पूरे देश ने स्वीकार किया है।

किसान का बेटा कैसे बना भारत का 'रॉकेट मैन',
ISRO चेयरमैन की जिंदगी का सफरनामा

सिवन के सहकर्मी उन्हें कठिन काम को पूरा करने में माहिर लेकिन सादा और हंसमुख व्यक्ति बताते हैं। एक किसान परिवार में जन्में के. सिवन के भारत के 'रॉकेट मैन' बनने का सफर आसान नहीं है।

चंद्रयान-2 के लैंडर विक्रम के चांद पर सॉफ्ट लैंडिंग करने की असफलता के बाद इसरो के अध्यक्ष के. सिवन रो पड़े। इससे पहले सिवन ने रुंधे गले से घोषणा की कि लैंडर का जमीनी स्टेशन से संपर्क टूट गया है और आंकड़ों का विश्लेषण किया जा रहा है। सिवन के सहकर्मी उन्हें कठिन काम को पूरा करने में माहिर लेकिन सादा और हंसमुख व्यक्ति बताते हैं। एक किसान परिवार में जन्में के. सिवन के भारत के 'रॉकेट मैन' बनने का सफर आसान नहीं है।

पढ़ें उनकी जिंदगी का सफरनामा और संघर्ष की दास्तां...
- सिवन का जन्म कन्याकुमारी के तरक्कनविलई गांव में हुआ था। उनके पिता एक किसान थे। सिवन ने अपनी स्कूली शिक्षा तमिल मीडियम के एक सरकारी स्कूल से की। सिवन अपने परिवार के पहले ग्रेजुएट थे।

- 1980 में सिवन ने मद्रास इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी से एयरोनॉटिकल इंजीनियरिंग में बैचरल डिग्री हासिल की। उसके बाद आईआईएससी बेंगलुरु से 1982 में मास्टर्स किया।

- सिवन ने 1982 में ही इसरो ज्वॉइन कर लिया और पीएसएलवी प्रोजेक्ट का हिस्सा बने। अपने तीन दशक लंबे करियर में सिवन ने जीएसएलवी, पीएसएलवी, जीएसएलवी मार्क3 प्रोजेक्ट में काम किया और जीएसएलवी रॉकेट के निदेशक भी रहे।

- सिवन ने 2006 में आईआईटी बॉम्बे से पीएचडी पूरी की। इसरो में उनके योगदान के लिए उन्हें कई अवार्ड से सम्मानित किया जा चुका है।

- इसरो के अध्यक्ष का पदभार संभालने से पहले सिवन तिरुवनंतपुरम के विक्रम साराभाई स्पेश सेंटर के निदेशक थे।

- फरवरी 2017 में भारत ने 104 सैटेलाइट को अंतरिक्ष में सफलतापूर्वक भेजकर विश्व रिकॉर्ड बनाया। सिवन ने इसमें अहम भूमिका अदा की।

- 22 जुलाई 2019 को सिवन के नेतृत्व में इसरो ने चंद्रयान-2 मिशन लॉन्च किया। लेकिन 6-7 सितंबर की रात को अपने आखिरी चरण में चंद्रमा की सतह से 2 किमी दूर लैंडर विक्रम से संपर्क टूट गया।

चंद्रयान-2 के विक्रम लैंडर का पता चल गया है। कहा जा रहा है कि ऑर्बिटर ने कुछ तस्वीरें भी भेजी हैं। इसरो के वैज्ञानिक उससे संपर्क स्थापित करने की कोशिश कर रहे हैं। इस प्रोजेक्ट से वैसे तो कई वैज्ञानिक जुड़े हैं, लेकिन सबसे अहम भूमिका इसरो प्रमुख के सिवन और मिशन डायरेक्टर ऋतु कारिधाल और प्रोजेक्ट डिप्टी डायरेक्टर, रेडियो फ्रीक्वेंसी चंद्रकांत ने निभाई।

पिता के साथ खेत में काम करते थे
तमिलनाडु के कन्याकुमारी जिले के नागरकोईल कस्बे में जन्मे के. सिवन की पढ़ाई तमिल मीडियम सरकारी स्कूल में हुई। स्कूल में छुट्‌टी के दिन पिता के साथ खेत में काम करते थे। नंगे पैर स्कूल जाते थे और लूंगी पहनते थे। 12वीं में गणित में 100% अंक लिए। इंजीनियरिंग करना चाहते थे, लेकिन पिता ने कहा कि पास के कॉलेज से बीएससी कर लो, ताकि खेत में भी काम कर सको। सिवन अड़ गए और पसंद के कॉलेज में जाने के लिए पिता के खिलाफ ही 7 दिन के अनशन पर बैठ गए। पिता नहीं माने तो बीएससी में प्रवेश ले लिया। तभी पिता को सिवन की प्रतिभा का अहसास हुआ और इंजीनियरिंग करने के लिए चेन्नई भेज दिया। उन्हें खेत बेचने पड़े। सिवन ने मद्रास इंस्टी‌ट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी से बीई किया। सिवन की रुचि सैटेलाइट बनाने में थी, लेकिन काम मिला रॉकेट बनाने का। वे कहते हैं, ‘मैंने जो चाहा, वो कभी नहीं मिला, पर जो मिला, पूरी शिद्दत से किया।’

नोट:-सभी तथ्य व जानकारी वेब & सोशल मीडिया से जुटाए गए है....
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Sunday, September 1, 2019

नवीन राशन कार्ड बनाने हेतु प्रक्रिया प्रारम्भ।

 राशन कार्ड बनाने का इंतजार कर रहे लोगों के लिए अच्छी खबर है।
राज्य सरकार ने उनका इंतजार खत्म कर दिया है 10 सितंबर से नवीन राशन कार्ड बनाने के लिए आवेदन फॉर्म लेना चालू हो गया ।

यह नए एपीएल कार्ड सर्वभौम पीडीएस योजना के तहत बनाए जाएंगे ।
राशन कार्ड सामान्य परिवारों के लिए बनेगा इसके पहले पुराने राशन कार्ड  का नवीनीकरण किया गया , लेकिन नए राशन कार्ड बनाने वाले को इंतजार करना पड़ा ,जो कि अब 10से जमा प्रक्रिया पंचायतो/निकाय/जनपदों में प्रारंभ कर दिया जाएगा।


खाद्यान्न की पात्रता
घर में केवल एक सदस्य है तो 10 किलो 2 सदस्य के मामले में 20 किलो , तथा 3 सदस्य से अधिक होने पर 35 किलो तक चल दिया जाएगा

आवेदन पत्र यहां नीचे दिए लिंक से डाउनलोड कर सकते हैं 
Download Application Form

अधिक जानकारी आप अपने निकटतम ग्राम पंचायत /जनपद पंचायत/नगर निकायों से प्राप्त कर सकते हैं ।
आवश्यक दस्तावेज
वोटर आईडी
आधार कार्ड
बैंक पासबुक
2-फ़ोटो
2011 Secc Data के exclsion data के अनुसार शहरी क्षेत्रों के लिए
  हर गांवों में शिविर लगाया जाएगा जो कि 10 सितंबर से प्रारंभ हो गया है।

नए राशन कार्ड बनाने की प्रक्रिया के लिए 6 सितंबर से शुरू कर दी गई है ,जो कि 10 तारीख से आवेदन लेना प्रारंभ कर दिया यह 17 सितंबर तक प्राप्त किया जाएगा तथा 2 अक्टूबर से कार्ड का वितरण भी प्रारंभ कर दिया जाएगा ।

राशन कार्ड से संबंधित महत्वपूर्ण तिथि :-

  •  10 से 17 सितंबर के मध्य राशन कार्ड के लिए आवेदन लिया जाएगा 
  • 20 सितंबर तक सत्यापन दलों द्वारा निकायों में जनपद में रिपोर्ट प्रस्तुत करना होगा 
  • 25 सितंबर तक दावा पत्ती लेकर उनका निराकरण किया जाएगा
  •  30 सितंबर तक पात्र अपात्र की सूची सार्वजनिक किया जाएगा इसकी पीडीएफ तैयार की जाएगी 
  • 2 से 10 अक्टूबर के लिए राशन कार्ड वितरण किया जाएगा
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