अच्छी तरह से जान लीजिये आपको आपके सिवा कोई और सफलता नहीं दिला सकता
बालसमुंद एवं सिद्धेश्वर मंदिर : पलारी छत्तीसगढ़-Bhatapara Tourism - Bhatapara_Our Proud -->

BHATAPARA

header ads

Hot

SEARCH IN HINDI

Followers

Thursday, June 20, 2019

बालसमुंद एवं सिद्धेश्वर मंदिर : पलारी छत्तीसगढ़-Bhatapara Tourism

बलौदाबाजार-भाटापारा जिले में बलौदाबाजार से रायपुर रोड पर 25 कि॰मी॰ तथा छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर से बलोदाबाजार रोड पर 70 कि॰मी॰ दूर स्थित पलारी ग्राम में बालसमुंद तालाब के तटबंध पर यह शिवालय स्थित है। इस मंदिर का निर्माण लगभग ७-८वीं शती ईस्वी में हुआ था। ईष्टिका निर्मित यह मंदिर पश्चिमाभिमुखी है। मंदिर की द्वार शाखा पर नदी देवी गंगा एवं यमुना त्रिभंगमुद्रा में प्रदर्शित हुई हैं।


प्रवेश द्वार स्थित सिरदल पर शिव विवाह का दृश्य सुन्दर ढंग से उकेरा गया है एवं द्वार शाखा पर अष्ट दिक्पालों का अंकन है। गर्भगृह में सिध्देश्वर नामक शिवलिंग प्रतिष्ठापित है। इस मंदिर का शिखर भाग कीर्तिमुख, गजमुख एवं व्याल की आकृतियों से अलंकृत है जो चैत्य गवाक्ष के भीतर निर्मित हैं। विद्यमान छत्तीसगढ़ के ईंट निर्मित मंदिरों का यह उत्तम नमूना है। 


जनश्रुतियों के अनुसार इस मंदिर एवं तालाब का निर्माण नायकों ने छैमासी रात में किया गया। इस अंचल में घुमंतू नायक जाति होती है जो नमक का व्यापार करती थी। उनका कबीला नमक लेकर दूर दूर तक भ्रमण करता था। कहते हैं कि इस पड़ाव पर नायकों को जल की समस्या हमेशा बनी रहती थी। उन्होने यहां तालाब बनवाने का कार्य शुरु किया। (नायकों द्वारा तालाब निर्माण की कहानी अन्य स्थानों पर भी सुनाई देती हैं, खारुन नदी के उद्गम पेटेचुआ का तालाब भी नायकों ने बनवाया था। इससे प्रतीत होता है कि नायक अपने व्यापार के मार्ग में जलसंसाधन का निर्माण करते थे।) 


तालाब का निर्माण होने के बाद इस तालाब में पानी नहीं आया तो किसी बुजूर्ग के कहने से नायकों के प्रमुख ने अपने नवजात शिशु को परात में रख कर तालाब में छोड़ दिया, इसके बाद तालाब में भरपूर पानी आ गया और यह लबालब भर गया। बालक भी सुरक्षित परात सहित उपर आ गया। तब से इस तालाब का नाम बालसमुंद रखा गया। इस तालाब का विस्तार 120 एकड़ में है। जल साफ़ एवं सुथरा है। तालाब का पानी कभी नहीं सूखता। 


तालाब के मध्य में एक टापू बना हुआ है, कहते हैं इसका निर्माण तालाब खोदने के दौरान तगाड़ी झाड़ने से झड़ी हुई मिट्टी से हुआ। इस मंदिर का जीर्णोद्धार तत्कालीन केन्द्रीय मंत्री बृजलाल वर्मा ने 1960-61 के दौरान करवाया तथा गर्भ गृह में शिवलिंग स्थापित करवाया। इस स्थान पर प्रतिवर्ष माघ पूर्णिमा दे दिन मेला भरता है, जिसमें हजारों श्रद्धालू आकर बालसमुंद में स्नान कर पूण्यार्जित करते हैं।


No comments:

Post a Comment

Post Top Ad