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शिवनाथ नदी के बीचों-बीच पर्यटन की अनूठी जगह मदकू द्वीप दो धर्म और आस्था का संगम स्थल

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परम प्रेम की परिणिति काम-क्रीडा को परिलक्षित करती छत्तीसगढ का खजुराहो भोरमदेव मंदिर।

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शिवरीनारायण का मंदिर माता शबरी का आश्रम छत्तीसगढ़-इतिहास के पन्नो में

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प्रेम का लाल प्रतीक लक्ष्मण मंदिर...........

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ताला की विलक्षण प्रतिमा-देवरानी जेठानी मंदिर

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शिवरीनारायण का मंदिर माता शबरी का आश्रम छत्तीसगढ़-इतिहास के पन्नो में

Shivrinarayan Temple Chhattisgarh  : शिवरीनारायण छत्तीसगढ़ में महानदी, शिवनाथ और जोंक नदी के त्रिधारा संगम के तट पर स्थित प्राचीन एवं विख्यात कस्बा है। यह क़स्बा जांजगीर-चाम्पा जिले में स्थित है। यह "छत्तीसगढ़ की जगन्नाथपुरी" के नाम से के नाम से भी जाना जाता है। इसे छत्तीसगढ़ का गुप्त प्रयाग भी कहते है।

इतिहास :

इस स्थान का वर्णन महाकाव्य रामायण में भी है। इसी स्थान पर भगवान श्रीराम ने शबरी नमक कोल आदिवासी महिला के जूठे बेर खाये थे। शबरी की स्मृति में 'शबरी-नारायण` नगर बसा है। यह स्थान बैकुंठपुर, रामपुर, विष्णुपुरी और नारायणपुर के नाम से विख्यात था।
शिवरीनारायण स्थित शबरीनारायण मंदिर का निर्माण शबर राजा द्वारा कराया गया मानते हैं। यहाँ ईंट और पत्थर से बना ११-१२ वीं सदी केशवनारायण मंदिर का मंदिर है। चेदि संवत् ९१९ का 'चंद्रचूड़ महादेव'' का एक प्राचीन मंदिर भी है।
महानदी के तट पर महेश्वर महादेव और कुलदेवी शीतला माता का भव्य मंदिर, बरमबाबा की मूर्ति और सुन्दर घाट है। जिसका निर्माण निर्माण संवत् १८९० में मालगुजार माखन साव के पिता श्री मयाराम साव और चाचा श्री मनसाराम और सरधाराम साव ने कराया है।


किंवदंती:

एक किंवदंती के अनुसार शिवरीनारायण के शबरीनारायण मंदिर और जांजगीर के विष्णु मंदिर में छैमासी रात में बनने की प्रतियोगिता थी। सूर्योदय के पहले शिवरीनारायण का मंदिर बनकर तैयार हो गया इसलिये भगवान नारायण उस मंदिर में विराजे और जांजगीर का मंदिर को अधूरा ही छोड़ दिया गया जो आज उसी रूप में स्थित है।

रामायण में एक प्रसंग आता है जब देवी सीता को ढूंढते हुए भगवान राम और लक्ष्मण दंडकारण्य में भटकते हुए माता शबरी के आश्रम में पहुंच जाते हैं। जहां शबरी उन्हें अपने जूठे बेर खिलाती है जिसे राम बड़े प्रेम से खा लेते हैं। माता शबरी का वह आश्रम छत्तीसगढ़ के शिवरीनारायण में शिवरीनारायण मंदिर परिसर में स्थित है। महानदी, जोंक और शिवनाथ नदी के तट पर स्थित यह मंदिर व आश्रम प्रकृति के खूबसूरत नजारों से घिरे हुए है।
शबरी माता का आश्रम



शिवरी नारायण मंदिर के कारण ही यह स्थान छत्तीसगढ़ की जगन्नाथपुरी के नाम से प्रसिद्ध हुआ है | मान्यता है कि इसी स्थान पर प्राचीन समय में भगवान जगन्नाथ जी की प्रतिमा स्थापित रही थी, परंतु बाद में इस प्रतिमा को जगन्नाथ पुरी में ले जाया गया था । इसी आस्था के फलस्वरूप माना जाता है कि आज भी भगवान जगन्नाथ जी यहां पर आते हैं |


शिवरीनारायण छत्तीसगढ़ के जांजगीर-चांपा जिले में आता है। यह बिलासपुर से 64 और रायपुर से 120 किलोमीटर की दूरी पर स्थित है। इस स्थान को पहले माता शबरी के नाम पर शबरीनारायण कहा जाता था जो बाद में शिवरीनारायण के रूप में प्रचलित हुआ।
शिवरीनारायण मंदिर



शिवरीनारायण कहलाता है गुप्त धाम :-

देश के प्रचलित चार धाम उत्तर में बद्रीनाथ, दक्षिण में रामेश्वरम्, पूर्व में जगन्नाथपुरी और पश्चिम में द्वारिका धाम स्थित हैं। लेकिन मध्य में स्थित शिवरी नारयण को ”गुप्तधाम” का स्थान प्राप्त है। इस बात का वर्णन रामावतार चरित्र और याज्ञवलक्य संहिता में मिलता है।


शबरी का असली नाम श्रमणा था, वह भील सामुदाय के शबर जाति से सम्बन्ध रखती थीं। उनके पिता भीलों के राजा थे। बताया जाता है कि उनका विवाह एक भील कुमार से तय हुआ था, विवाह से पहले सैकड़ों बकरे-भैंसे बलि के लिए लाये गए जिन्हें देख शबरी को बहुत बुरा लगा कि यह कैसा विवाह जिसके लिए इतने पशुओं की हत्या की जाएगी। शबरी विवाह के एक दिन पहले घर से भाग गई। घर से भाग वे दंडकारण्य पहुंच गई।

यह कटोरीनुमा पत्‍ता कृष्‍ण वट का है। लोगों का मानना है कि शबरी ने इसी पत्‍ते में रख कर श्रीराम को बेर खिलाए थे।

दंडकारण्य में ऋषि तपस्या किया करते थे, शबरी उनकी सेवा तो करना चाहती थी पर वह हीन जाति की थी और उनको पता था कि उनकी सेवा कोई भी ऋषि स्वीकार नहीं करेंगे। इसके लिए उन्होंने एक रास्ता निकाला, वे सुबह-सुबह ऋषियों के उठने से पहले उनके आश्रम से नदी तक का रास्ता साफ़ कर देती थीं, कांटे बीन कर रास्ते में रेत बिछा देती थी। यह सब वे ऐसे करती थीं कि किसी को इसका पता नहीं चलता था।

एक दिन ऋषि मतंग की नजऱ शबरी पर पड़ी, उनके सेवाभाव से प्रसन्न होकर उन्होंने शबरी को अपने आश्रम में शरण दे दी, इस पर ऋषि का सामाजिक विरोध भी हुआ पर उन्होंने शबरी को अपने आश्रम में ही रखा। जब मतंग ऋषि की मृत्यु का समय आया तो उन्होंने शबरी से कहा कि वे अपने आश्रम में ही भगवान राम की प्रतीक्षा करें, वे उनसे मिलने जरूर आएंगे।
शिवरीनारायण में स्तिथ शबरी सेतु

मतंग ऋषि की मौत के बात शबरी का समय भगवान राम की प्रतीक्षा में बीतने लगा, वह अपना आश्रम एकदम साफ़ रखती थीं। रोज राम के लिए मीठे बेर तोड़कर लाती थी। बेर में कीड़े न हों और वह खट्टा न हो इसके लिए वह एक-एक बेर चखकर तोड़ती थी। ऐसा करते-करते कई साल बीत गए।

एक दिन शबरी को पता चला कि दो सुकुमार युवक उन्हें ढूंढ रहे हैं। वे समझ गईं कि उनके प्रभु राम आ गए हैं, तब तक वे बूढ़ी हो चुकी थीं, लाठी टेक के चलती थीं। लेकिन राम के आने की खबर सुनते ही उन्हें अपनी कोई सुध नहीं रही, वे भागती हुई उनके पास पहुंची और उन्हें घर लेकर आई और उनके पाँव धोकर बैठाया। अपने तोड़े हुए मीठे बेर राम को दिए राम ने बड़े प्रेम से वे बेर खाए और लक्ष्मण को भी खाने को कहा।

लक्ष्मण को जूठे बेर खाने में संकोच हो रहा था, राम का मन रखने के लिए उन्होंने बेर उठा तो लिए लेकिन खाए नहीं। इसका परिणाम यह हुआ कि राम-रावण युद्ध में जब शक्ति बाण का प्रयोग किया गया तो वे मूर्छित हो गए थे।
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आर्टिकल 15' आखिर है क्या? क्यों मचा घमासान ? @जातिवाद

Article 15

आर्टिकल 15 पर मचा है घमासान -



आर्टिकल 15- बॉलीवुड अभिनेता आयुष्मान खुराना के लीड रोल वाली यह फिल्म यूं तो रिलीज के पहले से ही विवादों में थी, लेकिन शुक्रवार को फिल्म के रिलीज होते ही विरोध और बवाल बढ़ता जा रहा है। देश  में कई शहरों में कई संगठनों ने विरोध किया। कानपुर से लेकर रुड़की तक और बरेली से लेकर दिल्ली तक यह विरोध पहुंच चुका है। एक संगठन के सदस्यों ने सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया है। 

ऐसे में सबके मन में सवाल उठना लाजिमी है कि 'आर्टिकल 15' आखिर है क्या? तो आइए विस्तार से जानते हैं इसके बारे मेंः


constitution of india
संविधान में आर्टिकल का तात्पर्य अनुच्छेद से होता है। आर्टिकल 15 के बारे में जानने से पहले थोड़ा संविधान के बारे में जान लेते हैं। भारतीय संविधान दुनिया का सबसे लंबा लिखित संविधान है, जिसमें 25 भागों और 12 अनुसूचियों में 449 अनुच्छेद (आर्टिकल) शामिल हैं।

यह देश का सर्वोच्च कानून है और यह मौलिक अधिकार, निर्देश सिद्धांत, नागरिकों के मौलिक कर्तव्यों को स्थापित करते समय मौलिक राजनीतिक संहिता, संरचना, प्रक्रियाओं, शक्तियों और सरकारी संस्थानों के कर्तव्यों का निर्धारण करने वाले ढांचे को प्रस्तुत करता है।

(1) राज्य, किसी नागरिक के विरुद्ध के केवल धर्म, मूलवंश, जाति, लिंग, जन्मस्थान या इनमें से किसी के आधार पर कोई विभेद नहीं करेगा।


(2) कोई नागरिक केवल धर्म, मूलवंश, जाति, लिंग, जन्मस्थान या इनमें से किसी के आधार पर--
(क) दुकानों, सार्वजनिक भोजनालयों, होटलों और सार्वजनिक मनोरंजन के स्थानों में प्रवेश, या
(ख) पूर्णतः या भागतः राज्य-निधि से पोषित या साधारण जनता के प्रयोग के लिए समर्पित कुओं, तालाबों, स्नानघाटों, सड़कों और सार्वजनिक समागम के स्थानों के उपयोग,
के संबंध में किसी भी निर्योषयता, दायित्व, निर्बन्धन या शर्त के अधीन नहीं होगा।


(3) इस अनुच्छेद की कोई बात राज्य को स्त्रियों और बालकों के लिए कोई विशेष उपबंध करने से निवारित नहीं करेगी।


[(4) इस अनुच्छेद की या अनुच्छेद 29 के खंड (2) की कोई बात राज्य को सामाजिक और शैक्षिक दृष्टि से पिछड़े हुए नागरिकों के किन्हीं वर्गों की उन्नति के लिए या अनुसूचित जातियों और अनुसूचित जनजातियों के लिए कोई विशेष उपबंध करने से निवारित नहीं करेगी।]



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Film Article 15-समानता का अधिकार देने वाला आर्टिकल 15 , जिस पर बनी फिल्म ने रिलीज होते ही मचाया बवाल











Film Article 15:- Bollywood में अपनी अलग पहचान बना चुके आयुष्मान खुराना की फिल्म Article 15 का ट्रेलर इस समय जोर शोर से चर्चाओं में बना हुआ है | फिल्म का Trailor Launch होते ही कई लोगो ने इसे विवादों में घेर लिया है | ब्राह्मण वर्ग इस फिल्म के Trailor से बिल्कुल खुश नहीं था और Actors समेत वे सभी लोग जो इस फिल्म से जुड़े हुए है उनको धमकियां मिल रही थी।

आयुष्मान की फिल्म के विरुद्ध करणी सेना ने अपना मोर्चा खोल दिया है | इस फिल्म पर ब्राह्मणों की छवि खराब करने का आरोप लगा है जिसके बाद करणी सेना और परशुराम सेना ने विरोध शुरू कर दिया है।
विरोध के बीच फ‍िल्‍म के Director अनुभव सिन्‍हा को चेतावनी मिलने की खबरें भी सामने आई हैं। बता दें कि फिल्म की कहानी भारतीय संविधान का अनुच्छेद 15 धर्म, नस्ल, जाति, लिंग या जन्म स्थान के आधार पर भेदभाव पर रोक लगाने के बारे में है |Article 15 फिल्म के ट्रेलर में आयुष्मान खुराना IPS की भूमिका निभाते हुए नजर आएँगे | इस फिल्म की कहानी बदायूं हादसे में दो लड़कियों की रेप के बाद हुई हत्या के मामले पर आधारित है। Trailor में दिखाया गया है की गांव की दो लड़किया का बुरी तरीके से पहले रैप किया जाता है और बाद में दोनों को मारकर दोनों के शवों को पेड़ से लटका दिया जाता है |
ऐसा ही हादसा बदायू के एक गॉव में हुआ था जिसे अब फिल्म के द्वारा दिखाया जा रहा है | इस फिल्म में आरोपिओ को ब्राह्मण जाती का दिखाया गया है | बदायूं दुष्कर्म और हत्या का मामला 2014 में हुआ था। उस समय उत्तर प्रदेश में सपा सत्ता में थी। आरोपियों के नाम पप्पू यादव, अवधेश यादव, उर्वेश यादव, छत्रपाल यादव और सर्वेश यादव थे। छत्रपाल और सर्वेश पुलिसकर्मी थे।
Article 15 
Article 15:- पुलिस विभाग पर आरोप लगाया गया था कि वह इस मामले में आरोपियों के प्रति समाजवादी पार्टी के राजनीतिक दबाव के कारण नरमी दिखा रही है। वहीं इस फ‍िल्‍म में आरोपी ब्राह्मण समुदाय के दिखाए गए हैं। अब यहां परशुराम सेना के विरोध को करणी सेना का साथ मिल गया है। करणी सेना वही है जिसमें व्‍यापक स्‍तर पर फ‍िल्‍म पद्मावत और मणिकर्णिका का विरोध किया था।

आयुष्‍मान खुराना ने दिया बयान 

जूम टीवी से बातचीत में इस विवाद पर फ‍िल्‍म के एक्‍टर आयुष्‍मान खुराना ने बयान दिया था | आयुष्मान का कहना है कि फिल्म सत्य घटना से प्रेणावत है ना कि उस पर बेस्ड है। ऐसी देश में कई घटनाए हुई हैं। सेंसर बोर्ड ने जब इसे पास किया है तो इसमें ऐसा भेदभाव वाली कुछ नहीं है। Article-15 में किसी का भी पक्ष नहीं लिया गया है और ना ही किसी के बारे में कुछ गलत दिखाया गया है। आप पहले फिल्म देखें फिर बताएं कि इसमें क्या गलत है। दलित से लेकर अपर कास्ट तक की इसमें बात की गई है। किसी एक पक्ष या एक जात को निशाना नहीं बनाया गया है।
Film Article 15:- अब फिल्म के Director अनुभव सिन्हा ने इस बारे में एक Open Letter लिखा है। फिल्म की कहानी कथित तौर पर बदायूं दुष्कर्म और हत्या से प्रेरणागत है। इसमें आरोपियों को ब्राह्मण समुदाय का बताया गया है। इसी वजह से ब्राह्मण वर्ग नाराज हो गया और Actor समेत लोगो को धमकी दे डाली। अब Director सिन्हा ने अपने Twitter पर एक Open Letter शेयर किया है। इसमें उन्होंने ब्राह्मण संगठनों और करणी सेना को संबोधित किया है।
उन्होंने लिखा, ‘मेरी हत्या या मेरी बहनों और मेरी दिवंगत मां के बलात्कार की धमकियों से संवाद नहीं हो सकता। हम एक समाज हैं और हमें एक-दूसरे का सम्मान रखना चाहिए। मेरी आगामी फिल्म भी इसी संदर्भ में ही है।’
Film Article 15:- उन्होंने अपनी फिल्म Article 15 को लेकर हुए विवाद पर आगे लिखा, ‘मेरा विश्वास करें फिल्म में ब्राह्मण समाज का कोई निरादर नहीं किया गया है। आप को जानकर हर्ष होगा कि फिल्म के बनाए जाने में मेरे कई ब्राह्मण साथी भी हैं, कई कलाकर भी। कोई कारण नहीं है कि ब्राह्मणों का निरादर किया जाए।’
आपको बता दें कि फिल्म के Trailor में एक गांव की दो टीनएज लड़कियों का बेरहमी से रेप कर उनको पेड़ पर फांसी से लटकाए जाना दर्शाया गया है। ये सीन बेहद खौफनाक था। फिल्म में जाति, धर्म और अन्य चीजों को लेकर होने वाले भेदभाव को बड़े रूप में दिखाया गया है।
गौरतलब है कि बदायूं Rape और Murder Case 2014 में हुआ था। आरोपियों के नाम पप्पू यादव, अवधेश यादव, उर्वेश यादव, छत्रपाल यादव और सर्वेश यादव थे। छत्रपाल और सर्वेश पुलिसकर्मी थे। ये मामला उस वक्त पूरे देश में चर्चा में रहा था।
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ताला की विलक्षण प्रतिमा-देवरानी जेठानी मंदिर

आज हम भारतीय शिल्पकला की चर्चा करते हैं. भारतीय शिल्प में मूर्ति निर्माण की परंपरा बहुत ही प्राचीन काल से चली आ रही है. कला इतिहासकारों इन प्रतिमाओं को उनके लक्षण एवं शैलियों के आधार पर विवेचनाएँ प्रस्तुत की हैं किन्तु कभी कभी ऐसी विलक्षण प्रतिमाएं मिल जाती हैं, जो पुरातत्व वेत्ताओं एवं कला इतिहासज्ञों के लिए समस्या बन जाती है. ऐसी ही एक प्रतिमा छत्तीसगढ़ के बिलासपुर जिले के तला गांव में प्राप्त हुई है.
बलोदाबज़ार-भाटापारा जिले के समीपस्बिथ जिला बिलासपुर से ३० किलो मीटर दूर मनियारी नदी के किनारे अमेरी-कांपा नामक गांव के "ताला" नामक स्थान पर दो भग्न मंदिर हैं. जो देवरानी-जेठानी मंदिर के नाम से प्रसिद्द हैं.

Devrani Jethani Mandir Amerikapa Bilaspur { देवरानी- जेठानी मंदिर अमेरिकापा - तालगांव बिलासपुर }

जेठानी मंदिर अत्यंत ही ख़राब हालत में है, एक पत्थरों के टीले में बदल चूका है. जबकि देवरानी मंदिर अपेक्षाकृत बेहतर हालत में है. 

ये दोनों मंदिर अपनी विशिष्ट कला के कारण देश-विदेश में प्रसिद्द हैं. समय समय पर यहाँ मलबे की सफाई होती रहती है. 


 यहाँ पर पहले मिटटी के बड़े-बड़े ढेर थे. फिर किसी ने इनकी खुदाई की तो इसमें से बड़े-बड़े पत्थरों पर खुदाई किये हुए खम्भे निकले. 

उसके बाद पुरातत्व विभाग ने यहाँ पर खुदाई की और ये मंदिर निकले. भारतीय प्रशासनिक सेवा के एक वरिष्ठ अधिकारी डॉ. के.के. चक्रवर्ती के मार्ग दर्शन में इस स्थान का मलबा सफाई का काम हुआ. जिससे 17 जनवरी 1988 को एक विलक्षण प्रतिमा प्रकाश में आई.

यह विशाल प्रतिमा 9 फुट ऊँची एवं 5 टन वजनी तथा शिल्प कि दृष्टि से अद्भुत है. 


इसमें शिल्पी ने प्रतिमा के शारीरिक विन्यास में पशु पक्षियों का अद्भुत संयोजन किया है. मूर्ति के सर पर पगड़ी के रूप में लपेटे हुए दो सांप है. नाक और आँखों की भौहों के स्थान पर छिपकिली जैसे प्राणी का अंकन किया गया है, 


मूछें दो मछलियों से बनायीं हैं. जबकि ठोढ़ी का निर्माण केकड़े से किया गया है. कानों को मोर (मयूर) की आकृति से बानाया है. सर के पीछे दोनों तरफ सांप के फेन बनाये हैं. कन्धों को मगर के मुख जैसा बनाया है जिसमे से दोनों भुजाएं निकलती हुयी दिखाई देती हैं. 


शरीर के विभिन्न अंगों में 7 मानव मुखाकृतियों का चित्रण मिलता है. वक्ष स्थल के दोनों ओर से दो छोटी मुखों का चित्रण किया गया है. पेट (उदर) का निर्माण एक बड़े मानव मुख से किया गया है. 


तीनो मुख मूछ युक्त हैं. जांघों के सामने की ओर अंजलिबद्ध दो मुख तथा दोनों पार्श्वों में दो अन्य मुख अंकित है. दो सिंह मुख घुटनों में प्रदर्शित किये गए हैं. 


उर्ध्वाकार लिंग के निर्माण के लिए मुंह निकाले कच्छप (कछुए) का प्रयोग हुआ है. घंटा की आकृति के अंडकोष पिछले पैरों से बने हैं. 


सर्पों का प्रयोग पेट तथा कटिसूत्र (तागड़ी) के लिए किया गया हैं. हाथों के नाख़ून सर्प मुख जैसे हैं. बांयें पैर के पास एक सर्प का अंकन मिलता हैं. 

इस प्रकार की प्रतिमा देश के किसी भी भाग में नहीं मिली हैं. अभी तक यह नहीं जाना जा सका हैं कि यह प्रतिमा किसकी हैं और इसका निर्माण किसने और क्यों किया? 


यह प्रतिमा पुराविदों के लिए भी एक पहेली बन गई है। फ़िर भी इसे "रुद्र शिव" माना जा रहा है। 

प्राचीन काल में दक्षिण कोसल के शरभपुरीय राजावो के राजत्वकाल में मनियारी नदी के तट पर ताला नामक स्थल पर अमेरि काँपा गाव के समीप दो शिव मंदिर का निर्माण कराया गया था जिसका संशिप्त विवरण निम्नानुसार है :-

देवरानी मंदिर :- इस मंदिर में प्रस्तर निर्मित अर्ध भग्न देवरानी मंदिर ,शिव मंदिर है|जिसका मुख पूर्व दिशा कि ओर है | इस मंदिर के पीछे कि तरफ शिवनाथ कि सहायक नदी मनियारी प्रावाहित हो रही है | इस मंदिर का माप बहार कि ओरसे ७५ *३२ फिट है जिसका भू – विन्याश अनूठा है |इसमें गर्भगृह , अंतराल एवं खुली जगह युक्त संकरा मुखमंडप है |मंदिर में पहुच के लिए मंदिर द्वार कि चंद्रशिलायुक्त देहरी तक सीढ़िय 




निर्मित है |मुख मंडप में प्रवेश द्वार है |मंदिर कि द्वारशाखाओ पर नदी देवियों का अंकन है | सिरदल में ललाट बिम्ब में गजलक्ष्मी का अकन है |इस मंदिर में उपलब्ध भित्तियों कि उचाई १० फिट है इसके शिखर अथवा छत आभाव है | इस मंदिर स्थली में हिन्दू मत के विभिन्न देवी – देवताओ ,व्यन्तर देवता पशु ,पौराणिक आकृतिया ,पुष्पांकन एवं विविध ज्यमितिक एवं अज्यमितिक प्रतिको के अंकलनयुक्त प्रतिमाये एवं वास्तुखंड प्राप्त हुवे है | उनमे रूद्रशिव के नाम से सम्भोधित कि जाने वाली एक प्रतिमा सर्वाधिक महत्वपूर्ण है| या विशाल एकाश्मक द्विभुजी प्रतिमा समभगमद्रा में खड़ी हुई है तथा इसकी उचाई २.७० मीटर है| यह प्रतिमा शास्त्र के लक्षणों कि दृष्टी से विलक्षण प्रतिमा है| इसमें मानव अंग के रूप में अनेक पशु मानव अथवा देवमुख एवं सिह मुख बनाये गए है| इसके सिर का जटामुकुट(पगड़ी )जोड़ाशर्पो से निर्मित है| ऐसा प्रतीत होता है यहाँ के कलाकार को सर्प – आभूषण बहुत प्रिय था क्योकि प्रतिमा में रूद्रशिव का कांटे हात एवं उंगलियों को सर्प कि भांति आकर दिया गया है|

इसके अतिरिक्त प्रतिमा के उपरी भाग पर दोनों ओर एक – एक सर्पफन छत्र कंधो के ऊपर प्रदर्शित है|इसी तरह बाये पैर में लिपटे हुवे फणयुक्त सर्प का अंकन है| दुसरे जीव जन्तुवो में मोर से कान एव कुंडल ,आखो कि भोहे एव नाक छिपकली से मुख कि ठुड्डी केकड़ा स निर्मित है| तथा भुजाये मकरमुख से निकली है| सात मानव अथवा देवमुख शरीर के विभिन्न अंगो से निर्मित है| ऊपर बतलाये अनुसार अद्वितीय होने के कारण विद्वानों के बीच इस प्रतिमा कि सही पहचान को लेकर अभी भी विवाद बना हुवा है| 



शिव के किसी भी ज्ञात स्वरुप के शास्त्रोक्त प्रतिमा लक्षण पूर्ण रूप से न मिलने के कारण इसे शिव के किसी स्वरुप विशेष कि प्रतिमा के रूप में अभियान सर्वमान्य नहीं है| निर्माण शैली के आधार पर ताला क पुरावशेषो को छठी ईस्वी के पूर्वाद्ध में रखा जा सकता है| 


जेठानी मंदिर :- दक्षिणाभिमुखी यह मंदिर भगवान शिव को समर्पित है| भग्नावशेष के रूप में ज्ञात सरंचना उत्खनन अनावृत किया गया है| किन्तु कोई भी इसे देखकर इसकी भू – निर्माण योजना के विषय में जान सकता है| सामने इसमें गर्भगृह एवं मण्डप है| जिसमे पहुचने के लिए दक्षिण , पूर्व एवं पश्चिम दिशा से प्रविष्ट होते है| मंदिर का प्रमुख प्रवेश द्वार चौड़ी सीढियों से सम्बद्ध था| इसके चारो ओर बड़े एवं मोटे स्तंभों कि यष्टिया बिखरी पड़ी हुई है और यहाँ अनेक प्रतितो के अन्कंयुक्त है स्तम्भ के निचले भाग पर कुम्भ बने हुए है स्तंभों के उपरी भाग पर आमलक घट पर आधारित दर्शाया गया है जो कीर्तिमुख से निकली हुई लतावल्ली से अलंकृत है| मंदिर का गर्भगृह वाला भाग बहुत ही अधिक क्षतिग्रस्त है| और मंदिर के ऊपरी शिखर भाग के कोई प्रमाण प्राप्त नहीं हुई है| दिग्पाल देवता या गजमुख चबूतरे पर निर्मित किये गए है| निसंदेह ताला स्थित स्मारकों के अवशेष भारतीय स्थापत्यकला के विलक्षण उदाहरण है| छत्तीसगढ़ के स्थापत्य कला कि मौलिकता इसके पाषाण खंड से जीवित हो उठी है



















































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मोपका में एक लड़की और उसके दादी माँ की कर दी गई हत्या


भाटापारा से लगभग 20 किलोमीटर दूर में स्थित ग्राम मोपका में एक लड़की और उसके दादी की माँ की हत्या करदी गई है| उन दोनोंको बेरहमी से सुबह लगभग 5 बजे के आस पास हत्या कर दिया गया खुनी उनके घर के कोठी में छीपा रहा |
सही समय में गाव वालो ने पुलिस को खबर देखर हल्यारा को धर दबोचा | लड़के के बारे में ज्यादा तो जानकारी नहीं है पर कहा सुनी के अनुसार उस लड़का का भाभी मोपका गाव से गई थी और वो लड़का मोपका के लड़की को पसनद करता था |
उस लड़के ने उस लड़की को सादी के लिए बोला था पर लड़की ने मन क्र दिया तो लड़के गुस्से में उनकी व उनकी दादी ही बेहरहमी से हत्या कर दिया |
जब खुनी को गिरिफ्तर किया गया तो उसके घर के सामने सभी मोपकावासी उपस्तिथ थे | और लड़के को गाव वाले पिट रहे थे | पुलिस ने वह से उसे थाने ले गया और उसका क़ानूनी रूप से खातिरदारी किया गया |

मोपका में सन 2019 में 2 Crime हो गया पिछले बारे एक लड़के ने दुसरे लड़के का सर काट के  तालाब में फेक दिया था | और उसके शारीर को घर में छुपा के रखा था उसे बेदारार्दी से मौत की दी | इसका भी कोई पर्सनल प्राब्लेम था जिसके कारण उसको मारा गया |

लेकिन एक बात कहना चाहत हु कोईभी  व्यकी  किसी का मर्डर तभी करता है जब कोई उसके साथ गलत  करता है जो उसे माफ़ी  देने लायक नहीं होते है , या फिर अन्य कोई कारण भी हो सकते है लेकिन दोस्तों आप कभी भी  कानून को अपना हाथ न ले |


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दानवीर नाम का अर्थ को सार्थक करने वाले दाउ कल्‍याण सिंह

दान की परम्‍परा छत्‍तीसगढ में सदियों से रही है। वैदिक काल में दानवीर राजा मोरध्‍वज की कर्मस्‍थली इस प्रदेश में अनेकों दानवीरों नें जन्‍म लिया है । इन्‍हीं दानवीरों में तरेंगा, भाटापारा में जन्‍में दाउ कल्‍याण सिंह का नाम संपूर्ण प्रदेश में आदर के साथ लिया जाता है । दाउ कल्‍याण सिंह के दान से सुवासित छत्‍तीसगढ के शिक्षा व चिकित्‍सा सेवा के क्षेत्र आज भी पुष्पित व पल्‍लवित हैं । समाज सेवा के अन्‍य क्षेत्रों में भी दाउ कल्‍याण सिंह जी का योगदान सदैव याद रखा जाने वाला रहा है ।

आज रायपुर प्रदेश का प्रशासनिक महकमा जिस छाव तले सुकून से एयरकंडीशनरों की हवा में शासन चला रहा है वह भवन भी दाउ कल्‍याण सिंह के दान में दी गई राशि से बनवाई गई है । छत्‍तीसगढ शासन का मंत्रालय आज जिस भवन में स्‍थापित है वह पहले चिकित्‍सा सुविधाओं से परिपूर्ण भव्‍य डीके हास्‍पीटल हुआ करता था जहां छत्‍तीसगढ के दूर दूर गांव-देहात व शहरों से लोग आकर नि:शुल्‍क चिकित्‍सा सेवा का लाभ उठाते थे जो संपूर्ण छत्‍तीसगढ में एकमात्र आधुनिक चिकित्‍सा का केन्‍द्र था । इस हास्‍पीटल के निर्माण के लिए दाउ कल्‍याण सिंह नें सन् 1944 में एक लाख पच्‍चीस हजार रूपये दान में दिया था । उस समय के उक्‍त राशि का वर्तमान समय के अनुपात में यदि आकलन किया जाए तो वह लगभग सत्‍तर करोड रूपये होते हैं । निर्माण के बाद इस हास्‍पीटल का नाम दाउ कल्‍याण सिंह चिकित्‍सालय रखा गया था। इस चिकित्‍सालय नें छत्‍तीसगढ में अभूतपूर्व चिकित्‍सा सुविधायें उपलब्‍ध कराई, बाद में यह चिकित्‍सालय नये भवन में स्‍थानांतरित हो गया और दाउ कल्‍याण सिंह के द्वारा दिये दान से बनवाये गये इस भवन में छत्‍तीसगढ मंत्रालय स्‍थापित हो गया ।

रायपुर का कृषि विश्‍वविद्यालय भी दाउ कल्‍याण सिंह द्वारा 1784 एकड जमीन दान में देने के बाद ही (पहले कृषि महाविद्यालय फिर कृषि विश्‍वविद्यालय) अस्तित्‍व में आ सका । इसके अतिरिक्‍त दाउ कल्‍याण सिंह नें रायपुर में पुत्री शाला, जगन्‍नाथ मंदिर भाटापारा में पुलिस थाना सहित अनेकों भवनों के लिए भूमि व राशि दान में दिया जिनमें चर्च के लिए भी सहर्ष भूमि दान दिया जाना दाउ जी के सामाजिक सौहाद्र को प्रदर्शित करता है । इनके इन सहयोगों से ही तत्‍कालीन छत्‍तीसगढ में विकास के सोपान लिखे जा सके ।

दाउ कल्‍याण सिंह का जन्‍म 4 अप्रैल को हुआ था, दाउ जी विलक्षण प्रतिभा के धनी व दीन-दुखियों के सेवा में सदैव तत्‍पर रहने वाले मनीषी थे इन्‍होंने कब-कब व कहां-कहां कितना दान दिया इसका उल्‍लेख करें तो कई पन्‍ने रंगनें पडेंगें। छत्‍तीसगढी अग्रवाल समाज दाउ जी के यादों को अक्षुण बनाये रखने के लिए आज के दिन को दानशीलता दिवस के रूप में मनाते हैं ।

स्‍वस्‍थ व संस्‍कारित छत्‍तीसगढ के निर्माण के लिए संपूर्ण जीवन अर्पित कर देने वाले दाउ कल्‍याण सिंह को हम अपना श्रद्वा सुमन अर्पित करते हैं।
4 अप्रैल 1876 को जन्म हुआ दाऊ कल्याण सिंह का। पिता बिसेसरनाथ व माता पार्वती देवी थी। पिता एक छोटे तहुतदार थे। ताहुतदारी को बढ़ाने व राजस्व आय को दृष्टिगत रखते हुए निर्जन स्थानों पर नए गांव बसाकर अपने ताहुतदारी गांवों में वृद्धि की, पर साथ मे कर्ज का बोझ भी बढ़ा लिया। कारोबार ठीक चल ही रहा था कि बिसेसरनाथ की मृत्यु हो गई, सन 1903 जब पिता की मृत्यु हुई दाऊ तब 27 वर्ष के थे। 
अब कथा शुरू होती है हमारे नायक “दाऊ कल्याण सिंह” की। 27 वर्ष की आयु में सारे कारोबार का भार दाऊ के कंधे पर आया और साथ मे आया 2 लाख 12 हज़ार का कर्ज भी। इस कर्ज के एवज में तरेंगा की उनकी संपत्ति जबलपुर के सेठ गोकुलदास के पास गिरवी थी। दाउ की पढाई तरेंगा ग्राम में ही हुई पर प्रबन्ध कौशल किसी शहर वाले से भी तेज था। कारोबार हाथ मे लेते ही अपने सूझ बूझ और प्रबंध कौशल से सारा कर्ज जल्द ही उतार फेका और अपने क्षेत्र में ऐसा विकास किया कि ताहुतदारी की वार्षिक आय तीन लाख तक पहुच गई। कारोबार में बढ़ोतरी अब ऐसी थी कि सन 1937 में “दाऊ कल्याण सिंह” ने 70 हज़ार रुपय से अधिक का राजस्व पटाया। इन आकड़ो से उनका परिश्रम और प्रबंधन कौशल दोनो झलकता है। दाऊ के मुकाबले आज के उद्योगपति कुछ भी नही।
DKS HOSPITAL RAIPUR
दाऊ केवल कमाने के लिए मशहूर नही थे, दाऊ प्रेमभाव से अपनी संपत्ति लोगो मे बाटने के लिए भी मशहूर थे। छत्तीसगढ़ के इतिहास में इनसे बड़ा दानी शायद ही आपको कोई और मिलेगा। राज्य का पुराना मंत्रालय भवन याद होगा ना आपको ? घड़ी चौक के समीप जहाँ पहले पूरा प्रशानिक अमला उस भवन की छाव में रहा करता था। छत्‍तीसगढ शासन का मंत्रालय जिस भवन में स्‍थापित था, वह पहले चिकित्‍सा सुविधाओं से परिपूर्ण भव्‍य डीके अस्पताल (दाऊ कल्‍याण सिंह चिकित्सालय) हुआ करता था। अस्पताल के निर्माण के लिए दाउ कल्‍याण सिंह नें सन् 1944 में एक लाख पच्‍चीस हजार रूपये दान में दिया था। उस समय की उस राशि का वर्तमान समय में यदि आकलन किया जाए तो लगभग सत्‍तर करोड रूपये होते है। वह छत्‍तीसगढ में एकमात्र आधुनिक चिकित्‍सा का केन्‍द्र था। प्रदेश के दूर दूर गांव व शहर से लोग निःशुल्क चिकित्सा के लिए इस अस्पताल में आया करते थे। 
दान के रूप में दाऊ के कल्याणकारी कार्यो की लंबी सूची है, रायपुर के लाभांडी में कृषि महाविद्यालय हेतु कृषि प्रायोगिक फार्म के लिये 1729 एकड़ भूमि तथा 1 लाख 12 हज़ार रुपए नगद उन्होंनो दान किया था। रायपुर में ही 323 एकड़ भूमि क्षयग्रस्त रोगियों के आयोग्य धाम निर्माण हेतु दान। रायपुर स्थित एक प्रसूत चिकित्सालय में कई कमरो का निर्माण। रायपुर के पुरानी बस्ती स्थित टुरी हटरी में जग्गनाथ के प्राचीन मंदिर को खैरा नामक पूरा गांव दान में चढ़ा दिया था। ये सारे कुछ ही उदाहरण थे उनकी दानवीरता के। इसलिए दाऊ नही होते तो रायपुर का नक्शा ही कुछ और होता। 
उन्होंने केवल रायपुर ही नही बल्कि प्रदेश व देश के अनेक स्थानों पर अपनी महानता की छाप छोड़ी है, सन 1921 के भयंकर अकाल के समय, पीड़ितों की सहायता के लिए भाटापारा में लाखों रुपय खर्च कर एक बड़े जलाशय का निर्माण करवाया, जिसे आज लोग कल्याण सागर जलाशय के नाम से पहचानते है। भाटापारा में ही उनके द्वारा मवेशी अस्पताल, धर्मशाला तथा पुस्तकालय का निर्माण भी करवाया गया था। दाऊ की उदारता प्रदेश की सीमा में कैद नही रही, नागपुर स्थित लेडी डफरिन अस्पताल तथा सेंट्रल महिला महाविद्यालय का निर्माण नही हो पाता अगर दाऊ कल्याण सिंह प्रचुर मात्रा में दान राशि उपलब्ध ना कराते। बिहार के भूकंप का समय हो या वर्धा में बाढ़ का, या उनके पहुँच वाले क्षेत्र में कोई अकाल इन सभी प्राकृतिक आपदाओं के समय मे दाऊ अपने कोष का मुँह खोल दिया करते थे। 
दाऊ को लोग कट्टर हिन्दू माना करते थे, लेकिन जब दाऊ दान करते, तब दानधर्म ही उनके लिए सबसे बड़ा धर्म बन जाता था, उन्होंने धर्म, जाति, या वर्ण से कभी कोई भेदभाव नही किया। उन्होंने मंदिर, मस्जिद, चर्च सभी के लिए भूमि उपलब्ध कराई। बाजार, कांजीहाउस, शासकीय कार्यालय भवन, स्कूल, गौशाला, शमशान, सड़क, पुस्तकालय, तालाब आदि अनेक कार्यो के लिये न केवल भूमि मुहैया कराई वरन नगद राशि भी दान की। दाऊ के दान के कई किस्से है, सारे किस्से पिरोने बैठे तो ना जाने कितने शब्द ढूढने पड़े। 
दाऊ का छत्तीसगढ़ के लिये जितना प्यार था, हम उन्हें उसका आधा भी नही दे पाए, आज दाऊ को लोग भूल चुके है। ना किसी मंच से उनका नाम सुनाई देता है, ना कोई उनकी कहानिया सुनता है। बाहरी किस्सों की भीड़ में अपने नायक के किस्से लोगो को पता ही नही। किस्से कहानियों में ही नही तस्वीरों में भी गुम हो चुके है दाऊ। ऐसी कहानियो को वापस खोजने की ज़रूरत है जो अब खो चुकी है।
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कृषि विज्ञान केंद्र, भाटापारा, छत्तीसगढ़



Krishi Vigyan Kendra, Bhatapara, Chhattisgarh
कृषि विज्ञान केंद्र, भाटापारा, छत्तीसगढ़

Indira Gandhi Krishi Vishwavidyalaya, Raipur, Chhattisgarh
इंदिरा गांधी कृषि विश्वविद्यालय, रायपुर, छत्तीसगढ़



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कृषि विज्ञान केंद्र, भाटापारा, छत्तीसगढ़



  • कृषि विज्ञान केन्द्र भारतीय कृषि अनुसंधान संस्थान नई दिल्ली द्वारा पोषित एवं इंदिरा गांधी कृषि विष्वविद्यालय, रायपुर (छ.ग.) द्वारा संचालित संस्थान है। अनुसंधान केन्द्रों से अनुषंसित नवीन कृषि उत्पादन तकनीकों को जिले के विकास खण्डस्तर की भू-जलवायु के आधार पर परीक्षण कर उसमें आवष्यकतानुसार संषोधन कर कृषकों में प्रसारित करने के लिये अनुषंसित करना कृषि विज्ञान केन्द्र का प्रमुख उद्देष्य एवं कार्य है।
  • इन्हीं उद्देष्यों को ध्यान में रखते हुए कृषि विज्ञान केन्द्र, भाटापारा (जिला-बलौदाबाजार-भाटापारा) की स्थापना नवंबर 2004 को की गई।
  • क्रियाकलाप -
  • कृषि एवं कृषि संबंधी अन्य प्रणालियों में उत्पादन को प्रभावित करने वाले कारकों का अवलोकन कर समाधान हेतु कार्य करना।
  • जिले की भू-जलवायु के कारण कृषि के उत्पादन को प्रभावित करने वालों कारणों को जानना तथा उसके अनुरूप कृषि तकनीकी का कृषक प्रक्षेत्र पर मूल्यांकन करना एवं आवष्यकता अनुरूप उसमें संषोधन करना।
  • कृषि तकनीकी के मूल्यांकन उपरांत उचित कृषि तकनीकीयों का कृषक प्रक्षेत्र पर विषय वस्तु विषेषज्ञों द्वारा अग्रिम पंक्ति प्रदर्षन कर उत्कृष्ठ प्रदर्षन को कृषकों एवं संबंधित विभाग के विस्तार अधिकारियों को अवगत कराना तथा आवष्यकता अनुरूप कृषि तकनीकीयों पर कृषकों एवं विस्तार अधिकारियों को प्रषिक्षण देना।
  • नवीनतम कृषि तकनीकों से संबधित जानकारियों तथा कुषलता को बढ़ाने हेतु कृषकों व कृषक महिलाओं के लिए तथा सेवारत कृषि, उद्यानिकी, वानिकी, पशुपालन विभाग के कर्मचारियों/अधिकारियों हेतु प्रषिक्षण का आयोजन करना।
  • जिले की कृषि आय को उत्कृष्ट बनाने हेतु विभिन्न कृषि तकनीकों के स्त्रोत व ज्ञान केन्द्र के रूप में कार्य करना।


News/ Announcement
Krishi Vigyan Kendra, Bhatapara (C.G) launching the news website for the peoples of Bhatapara.
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आवास (होटल / रिसोर्ट / धर्मशाला)-जिले के अंतर्गत समस्त विश्राम गृह

    आवास (होटल / रिसोर्ट / धर्मशाला)   


विश्राम गृह का  पता विभाग
बार नवापारा रिसॉर्ट बार नवापारा वन विभाग
सर्किट हाउस बलौदाबाजार गार्डन चौक के पास, भाटापारा रोड, बलौदाबाजार  पी.डब्लू.डी.
गेस्ट हाउस बलौदाबाजार  भाटापारा रोड, बलौदाबाजार  पी.डब्लू.डी.
गेस्ट हाउस भाटापारा  मेन रोड,भाटापारा  पी.डब्लू.डी.
गेस्ट हाउस सिमगा  बलौदाबाजार रोड, सिमगा  पी.डब्लू.डी.
गेस्ट हाउस पलारी  मेन रोड, पलारी  पी.डब्लू.डी.
गेस्ट हाउस कसडोल  तहसील ऑफिस के सामने, कसडोल  पी.डब्लू.डी.
गेस्ट हाउस लवन  मेन रोड, लवन  पी.डब्लू.डी.
गेस्ट हाउस बिलाईगढ़  मेन रोड,बिलाईगढ़  पी.डब्लू.डी.
गेस्ट हाउस,भटगॉव  मेन रोड,भटगॉव  पी.डब्लू.डी.
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BHATAPARA MANDI-भाटापारा कृषि उपज मंडी आज का भाव जानकारी

मंडी के अनुसार                                                                             

उत्पादों के अनुसार                



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मंडी/उत्पादों  के अनुसार जानिए फ़सलों के भाव Market wise daily commodity report

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